तृणमूल अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ प्रमुख मोसरफ हुसैन का इस्तीफा, BJP सरकार से नज़दीकी के संकेत
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक और राज्य अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रमुख मोसरफ हुसैन ने रविवार, 21 जून 2026 को पार्टी पद से इस्तीफा दे दिया। उत्तर दिनाजपुर जिले के इटाहार विधानसभा क्षेत्र से विधायक हुसैन ने यह घोषणा अपने आवास पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की। यह कदम पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल के भीतर गहराती दरार का ताज़ा संकेत माना जा रहा है।
इस्तीफे की वजह
हुसैन ने आधिकारिक तौर पर अपनी माँ की बीमारी को इस्तीफे का कारण बताया। उन्होंने कहा, 'मेरी माँ कुछ दिन पहले बीमारी के कारण मक्का से घर लौटी हैं। इस हालत में मैं कुछ दिनों से विधानसभा नहीं जा पाया हूँ। इसलिए मैं तृणमूल कांग्रेस के अल्पसंख्यक दल के लिए काम नहीं करना चाहता।' हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 'राज्य सरकार में बदलाव के कारण मैं अब पहले की तरह काम नहीं कर पा रहा हूँ।'
बागी खेमे से संपर्क की स्वीकृति
हुसैन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी माना कि विधानसभा में तृणमूल के बागी गुट से उनके संपर्क हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी से बातचीत हो चुकी है। गौरतलब है कि उत्तर दिनाजपुर जिले के पाँच तृणमूल विधायकों में से चार पहले ही ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी तृणमूल खेमे में शामिल हो चुके हैं — हुसैन का यह कदम उसी दिशा में पाँचवाँ संकेत है।
मुख्यमंत्री अधिकारी की प्रशंसा
हुसैन ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सराहना करते हुए कहा, 'मुख्यमंत्री एक समय हमारी पार्टी के लिए इस जिले के पर्यवेक्षक थे। तब से हमारे उनके साथ अच्छे संबंध हैं। इस क्षेत्र का विकास करना महत्वपूर्ण है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि वे भविष्य में अधिकारी के नेतृत्व में राज्य के विकास के लिए काम करना चाहते हैं — जो कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के साथ उनकी बढ़ती नज़दीकी का स्पष्ट संकेत है।
बजट सत्र और अनुपस्थिति
शुक्रवार को नई राज्य सरकार के पहले बजट सत्र की शुरुआत के दौरान हुसैन सदन से अनुपस्थित रहे थे, जिसने उनकी पार्टी-निष्ठा पर सवाल खड़े किए थे। अब सोमवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नई BJP सरकार का पहला बजट राज्य विधानसभा में पेश होना है। हुसैन ने संकेत दिया कि उस दिन उनके सदन में उपस्थित रहने की संभावना है — यह तथ्य उनके राजनीतिक रुख को और स्पष्ट करता है।
राजनीतिक असर
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता-परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर विखंडन तेज़ हो रहा है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले मूल तृणमूल गुट और ऋतब्रत बनर्जी के बागी धड़े के बीच की खाई अब उत्तर दिनाजपुर जैसे ज़िलों में भी साफ़ दिखने लगी है। हुसैन का यह इस्तीफा आने वाले दिनों में और विधायकों के दल-बदल की संभावना को बल देता है।