नेताजी के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने तृणमूल कांग्रेस छोड़ी, महज चार महीने में दिया इस्तीफा
सारांश
मुख्य बातें
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने सोमवार, 3 अगस्त 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने यह पार्टी मात्र चार महीने पहले — 12 अप्रैल को — जॉइन की थी, जिससे उनका यह राजनीतिक कदम अल्पकालिक साबित हुआ।
इस्तीफे का ब्यौरा
चंद्र कुमार बोस ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को एक पत्र लिखकर अपना इस्तीफा सौंपा। पत्र में उन्होंने लिखा, 'मैं व्यक्तिगत कारणों से तत्काल प्रभाव से ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूँ। मैं आपको और एआईटीसी को भविष्य के सभी प्रयासों के लिए शुभकामनाएँ देता हूँ।' इस्तीफे में 'व्यक्तिगत कारणों' के अलावा कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
चंद्र कुमार बोस ने 2016 में हावड़ा में एक रैली के दौरान तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दिग्गज नेता अमित शाह की उपस्थिति में BJP की सदस्यता ली थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कोलकाता दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से BJP उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन TMC उम्मीदवार माला रॉय से हार गए। इसके बाद उन्होंने BJP से धीरे-धीरे दूरी बना ली और 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद सक्रिय राजनीति से अलग रहे।
गौरतलब है कि BJP छोड़ने से पहले बोस ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के तहत उन्हें बुलाए जाने पर सार्वजनिक रूप से नाराज़गी जताई थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र होने के बावजूद उनकी नागरिकता पर संदेह क्यों किया जा रहा है। उन्होंने BJP में शामिल होने के अपने पुराने फैसले को 'गलती' भी बताया था।
TMC में आंतरिक संकट की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस स्वयं गहरे आंतरिक संकट से गुज़र रही है। राज्य में सरकार बदलने के बाद पार्टी में बड़ी फूट पड़ी है और अधिकांश विधायक राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी खेमे में शामिल हो गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब TMC के मूल लेकिन अल्पसंख्यक गुट का नेतृत्व कर रही हैं।
इस विभाजन के बीच चंद्र कुमार बोस ने किसी भी गुट का साथ देने की बजाय पार्टी से ही बाहर निकलने का रास्ता चुना — जो उनकी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
आगे की राह
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि चंद्र कुमार बोस किसी अन्य दल में शामिल होंगे या स्वतंत्र रूप से राजनीतिक भूमिका निभाएँगे। उनके इस्तीफे ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बोस परिवार की स्थिति और प्रासंगिकता को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।