त्रिपुरा के सभी स्कूलों में 'वंदे मातरम्' से होगी दिन की शुरुआत, फिर गाया जाएगा 'जन गण मन'
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 7 जुलाई 2026 को घोषणा की कि राज्य के सभी स्कूलों में अब प्रतिदिन शैक्षणिक गतिविधियों की शुरुआत राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के सामूहिक एवं पूर्ण गायन से होगी, जिसके तत्काल बाद राष्ट्रगान 'जन गण मन' गाया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य छात्रों में देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ करना है।
मुख्यमंत्री की घोषणा और उद्देश्य
प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग का प्रभार भी संभाल रहे मुख्यमंत्री माणिक साहा ने सोशल मीडिया पर इस निर्णय की जानकारी साझा करते हुए कहा कि राज्य सरकार विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और राष्ट्रीय पहचान की भावना को मजबूत करना चाहती है। उन्होंने कहा कि इस पहल से राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिलेगा, भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान विकसित होगा और नई पीढ़ी में राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना पैदा होगी।
साहा ने यह भी कहा कि सरकार चाहती है कि छात्र अधिक जागरूक, जिम्मेदार और देशभक्त नागरिक के रूप में विकसित हों।
अधिसूचना का विवरण और दायरा
मुख्यमंत्री ने त्रिपुरा शिक्षा (स्कूल) विभाग की आधिकारिक अधिसूचना भी सार्वजनिक की, जिसमें इस व्यवस्था को लागू करने का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है। अधिसूचना के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के सम्मान, गरिमा और आधिकारिक प्रस्तुति को लेकर जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप यह निर्णय लिया गया है।
इन दिशा-निर्देशों के तहत सभी औपचारिक, अर्ध-औपचारिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के गायन के दौरान निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य होगा।
किन संस्थाओं पर लागू होगा यह आदेश
यह व्यवस्था राज्य के सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों पर लागू होगी। इसके साथ ही विभाग के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त मदरसों को भी इस आदेश के दायरे में शामिल किया गया है। यह समावेशी दायरा इस पहल को राज्य के संपूर्ण स्कूली शिक्षा तंत्र पर लागू बनाता है।
सावधान की मुद्रा और प्रोटोकॉल
अधिसूचना में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि राष्ट्रगीत के गायन या वादन के दौरान सभी छात्र, शिक्षक, कर्मचारी और प्रशासनिक अधिकारी सम्मान प्रकट करने के लिए सावधान की मुद्रा में खड़े रहेंगे। गौरतलब है कि यह प्रोटोकॉल केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है और राष्ट्रीय गौरव एवं सांस्कृतिक विरासत के सम्मान को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किया जा रहा है।
आगे की राह
राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल राष्ट्रीय एकता मजबूत होगी, बल्कि छात्रों में संविधान और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और अधिक गहरा होगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य भर के स्कूल इस आदेश को किस प्रकार क्रियान्वित करते हैं और इसके अनुपालन की निगरानी की क्या व्यवस्था बनाई जाती है।