7 जुलाई 2026
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मदरसों में 'वंदे मातरम' अनिवार्य हो: दिलीप घोष बोले — 'सरकारी पैसे पर सरकारी नियम लागू होंगे'

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मदरसों में 'वंदे मातरम' अनिवार्य हो: दिलीप घोष बोले — 'सरकारी पैसे पर सरकारी नियम लागू होंगे'

सारांश

BJP मंत्री दिलीप घोष ने साफ कहा — सरकारी पैसे से चलने वाले हर मदरसे और स्कूल में 'वंदे मातरम' गाया जाना चाहिए। यह बयान पश्चिम बंगाल में मदरसा शिक्षा नीति को लेकर नई बहस की शुरुआत कर सकता है।

मुख्य बातें

दिलीप घोष ने 22 मई को कहा कि सरकारी सहायता प्राप्त सभी स्कूलों और मदरसों में 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य होना चाहिए।
उन्होंने कहा — 'जहाँ सरकारी पैसा लगता है, वहाँ सरकारी नियम लागू होंगे।' पश्चिम बंगाल को पाँच क्षेत्रों में बाँटकर विकास बैठकें आयोजित करने की नई रणनीति की घोषणा; सिलीगुड़ी और दुर्गापुर में पहली बैठकें हो चुकी हैं।
बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजने की माँग; कहा — केवल केस दर्ज करने से समस्या हल नहीं होगी।
फुरफुरा शरीफ के पीरजादा तोहा सिद्दीकी की बकरीद पर गाय की कुर्बानी न करने की अपील को घोष ने 'स्वागत योग्य' बताया।

पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता दिलीप घोष ने 22 मई को पश्चिम मेदिनीपुर में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि सरकारी सहायता प्राप्त सभी स्कूलों और मदरसों में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "जहाँ भी सरकारी पैसा लगता है, वहाँ सरकारी नियम लागू होंगे — यही पूरे देश में व्यवस्था है।" यह बयान ऐसे समय आया है जब मदरसा शिक्षा और राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ है।

मुख्य बयान: राष्ट्रगीत पर घोष का रुख

घोष ने दो-टूक कहा कि 'वंदे मातरम' केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए — जहाँ भी सार्वजनिक धन लगाया जाता है, वहाँ राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान अनिवार्य होना चाहिए। उन्होंने कहा, "राष्ट्रगीत हर जगह गाया जाना चाहिए। सभी स्कूलों और मदरसों में 'वंदे मातरम' गाया जाएगा।" गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में सरकारी सहायता प्राप्त मदरसे हैं, जो राज्य के मदरसा शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत संचालित होते हैं।

विकास बैठकों की नई रणनीति

मंत्री घोष ने यह भी बताया कि सरकार ने विकास कार्यों की समीक्षा के लिए एक नई विकेंद्रीकृत व्यवस्था अपनाई है। अब पश्चिम बंगाल को पाँच क्षेत्रों में विभाजित कर अलग-अलग स्थानों पर बैठकें आयोजित की जाएंगी। उन्होंने बताया कि 20 मई को सिलीगुड़ी में पाँच जिलों की बैठक हुई और 21 मई को दुर्गापुर में पाँच अन्य जिलों की। इन बैठकों में मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल के सदस्य, स्थानीय विधायक, ज़िलाधिकारी (DM) और खंड विकास अधिकारी (BDO) समेत संबंधित अधिकारी उपस्थित रहेंगे। घोष ने कहा, "कोई प्रचार नहीं, सिर्फ काम की बात होगी।"

बांग्लादेशी घुसपैठ पर कड़ा रुख

बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर घोष ने कहा कि केवल मामले दर्ज करने या उन्हें हिरासत में रखने से समस्या हल नहीं होगी। उनके अनुसार, "वे वर्षों से यहाँ रहकर सारी सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं — उन्हें वापस भेजना होगा।" उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले पर सरकारी स्तर पर चर्चा जारी है।

पिछले शासन पर आरोप और बकरीद अपील पर प्रतिक्रिया

घोष ने आरोप लगाया कि पिछले शासनकाल में पुराने कानूनों का पालन नहीं किया गया और पश्चिम बंगाल को देश के बाकी हिस्सों से अलग करने की कोशिश की गई। इसके अलावा, फुरफुरा शरीफ के पीरजादा तोहा सिद्दीकी द्वारा बकरीद पर गाय की कुर्बानी न करने की अपील पर घोष ने इसे 'स्वागत योग्य कदम' बताया। उन्होंने कहा, "यह बहुत अच्छी बात है। गाय की कुर्बानी कोई धार्मिक परंपरा नहीं है और इसका धर्म से सीधा संबंध नहीं है।" आगे के दिनों में यह देखना होगा कि राज्य सरकार मदरसों में 'वंदे मातरम' को लेकर कोई औपचारिक नीतिगत कदम उठाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि राज्य में सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों की संख्या सैकड़ों में है। 'सरकारी पैसा — सरकारी नियम' का तर्क कानूनी दृष्टि से सुनने में सरल लगता है, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों में धार्मिक अल्पसंख्यक संस्थाओं की स्वायत्तता को लेकर जटिल व्याख्याएँ मौजूद हैं। असली सवाल यह है कि क्या यह बयान नीतिगत इरादे की झलक है या राजनीतिक संकेत — क्योंकि अभी तक कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिलीप घोष ने मदरसों में 'वंदे मातरम' को लेकर क्या कहा?
BJP मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि सरकारी सहायता प्राप्त सभी स्कूलों और मदरसों में 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य होना चाहिए। उनका तर्क है कि जहाँ सरकारी धन लगता है, वहाँ सरकारी नियम भी लागू होने चाहिए।
क्या पश्चिम बंगाल में मदरसों में 'वंदे मातरम' अनिवार्य करने का कोई आधिकारिक आदेश जारी हुआ है?
अभी तक कोई औपचारिक सरकारी आदेश जारी नहीं हुआ है। दिलीप घोष का यह बयान पत्रकारों से बातचीत में आया है और यह सरकार की नीतिगत मंशा को दर्शाता है, लेकिन इसे अभी आधिकारिक निर्देश नहीं माना जा सकता।
पश्चिम बंगाल को पाँच हिस्सों में बाँटने की योजना क्या है?
घोष ने बताया कि सरकार ने विकास बैठकों को विकेंद्रीकृत करने का फैसला किया है — राज्य को पाँच क्षेत्रों में बाँटकर अलग-अलग स्थानों पर समीक्षा बैठकें होंगी। 20 मई को सिलीगुड़ी और 21 मई को दुर्गापुर में पहली दो बैठकें हो चुकी हैं।
फुरफुरा शरीफ की बकरीद अपील पर दिलीप घोष ने क्या कहा?
घोष ने फुरफुरा शरीफ के पीरजादा तोहा सिद्दीकी की उस अपील को 'स्वागत योग्य' बताया जिसमें मुसलमानों से बकरीद पर गाय की कुर्बानी न करने का आग्रह किया गया। घोष ने कहा कि गाय की कुर्बानी कोई अनिवार्य धार्मिक परंपरा नहीं है।
बांग्लादेशी घुसपैठियों पर दिलीप घोष का क्या रुख है?
घोष ने कहा कि केवल मामले दर्ज करने या हिरासत में रखने से घुसपैठ की समस्या हल नहीं होगी। उनके अनुसार घुसपैठियों को वापस भेजना होगा और इस पर सरकारी स्तर पर चर्चा जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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