मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य हो: दिलीप घोष बोले, 'सरकारी पैसा तो सरकारी नियम भी लागू होंगे'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता और पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने 22 मई को पश्चिम मेदिनीपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि सभी सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों और मदरसों में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहाँ सरकारी धन खर्च होता है, वहाँ सरकारी नियम लागू करना स्वाभाविक है।
मुख्य बयान: 'राष्ट्रगीत हर जगह गाया जाना चाहिए'
मंत्री घोष ने अपने बयान में कहा, 'जहाँ भी सरकारी पैसा लगता है, वहाँ सरकारी नियम लागू होंगे। सभी स्कूलों और मदरसों में वंदे मातरम गाया जाएगा। राष्ट्रगीत हर जगह गाया जाना चाहिए। पूरे देश में यही व्यवस्था है।' उन्होंने इसे किसी एक समुदाय पर थोपी गई शर्त नहीं, बल्कि सरकारी अनुदान की स्वाभाविक शर्त बताया।
विकेंद्रीकृत बैठकों की नई रणनीति
घोष ने यह भी बताया कि सरकार ने विकास कार्यों की समीक्षा के लिए एक नई रणनीति अपनाई है। अब पश्चिम बंगाल को पाँच क्षेत्रों में बाँटकर अलग-अलग स्थानों पर बैठकें आयोजित की जाएँगी, ताकि केंद्रीय बड़ी बैठकों पर होने वाला अनावश्यक खर्च कम हो। उन्होंने बताया कि 20 मई को सिलीगुड़ी में पाँच जिलों की बैठक हुई और 21 मई को दुर्गापुर में पाँच जिलों के अधिकारी एकत्रित हुए।
मंत्री ने कहा, 'इन बैठकों में मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल के सदस्य, स्थानीय विधायक, डीएम, बीडीओ समेत सभी संबंधित अधिकारी उपस्थित रहेंगे। कोई पब्लिसिटी नहीं, सिर्फ काम की बात होगी।'
बांग्लादेशी घुसपैठ पर कड़ा रुख
बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर घोष ने कहा कि केवल मामले दर्ज करना या उन्हें यहाँ रखना पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, 'वे कई सालों से यहाँ रह रहे हैं और सारे फायदे उठा रहे हैं। हमें उन्हें वापस भेजना होगा। इस मामले पर चर्चा चल रही है।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले शासनकाल में पुराने कानूनों का पालन नहीं हुआ और पश्चिम बंगाल को भारत से अलग देश जैसा बनाने की कोशिश की गई।
बकरीद पर गाय की कुर्बानी न करने की अपील का स्वागत
फुरफुरा शरीफ के पीरजादा तोहा सिद्दीकी द्वारा मुसलमानों से बकरीद पर गाय की कुर्बानी न करने की अपील पर घोष ने इसे स्वागत योग्य बताया। उन्होंने कहा, 'यह बहुत अच्छी बात है कि मुस्लिम समुदाय ने यह अपील की है। गाय की कुर्बानी कोई धार्मिक परंपरा नहीं है और इसका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है।'
आगे क्या
घोष के इस बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ आने की संभावना है, विशेषकर विपक्षी दलों की ओर से जो इसे अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं की स्वायत्तता पर हस्तक्षेप के रूप में देख सकते हैं। पश्चिम बंगाल में मदरसा शिक्षा का मुद्दा पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है और यह बयान आगामी राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।