ट्रंप का फेड पर हमला: 'अमेरिका नंबर वन, हमें दुनिया की सबसे कम ब्याज दर मिलनी चाहिए'
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 सितंबर 2026 को व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बात करते हुए ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी का कड़ा विरोध किया। उनका तर्क था कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वैश्विक प्रमुखता को देखते हुए अमेरिका को दुनिया में सबसे कम लागत पर कर्ज मिलना चाहिए, न कि मजबूत आर्थिक आंकड़ों के बावजूद दरें बढ़ाई जानी चाहिए।
क्या है विवाद का केंद्र
ट्रंप की यह टिप्पणी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श के उस संकेत के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना का उल्लेख किया था। ट्रंप ने कहा कि वे वार्श का सम्मान करते हैं और इस विषय पर उनसे कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है, लेकिन उनका स्पष्ट मत है कि अमेरिका में ब्याज दरें पहले से ही बहुत अधिक हैं।
ट्रंप ने दो-टूक कहा, 'हम दुनिया में नंबर एक हैं। हमें दुनिया की सबसे कम ब्याज दर मिलनी चाहिए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी केंद्रीय बैंक और व्हाइट हाउस के बीच मौद्रिक नीति को लेकर तनाव पहले से चर्चा में है।
ट्रंप का आर्थिक तर्क
ट्रंप ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वैश्विक व्यापारिक ताकत का हवाला देते हुए कहा कि कई देश अमेरिकी बाजार तक पहुँच का लाभ उठाते हैं और फिर भी अमेरिका से कम ब्याज दरों पर कर्ज लेते हैं। उनका कहना था, 'अगर हम चाहें तो उन पर टैरिफ लगा सकते हैं या उनके साथ कारोबार बंद कर सकते हैं। ऐसा होने पर वे तथाकथित विकसित देशों से सीधे गरीबी से जूझ रहे देशों की श्रेणी में आ सकते हैं।'
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी राय में अमेरिका को दुनिया में सबसे कम ब्याज दरें चुकानी चाहिए, और वह भी बड़े अंतर से। गौरतलब है कि ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में भी फेड की स्वायत्तता पर सवाल उठाते रहे हैं।
फेड की नीति पर ऐतिहासिक आपत्ति
ट्रंप ने फेडरल रिजर्व की मौजूदा कार्यप्रणाली की तुलना पिछले 25 वर्षों से की। उनके अनुसार, पहले जब अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन करती थी तो ब्याज दरें घटती थीं, लेकिन अब अच्छे आर्थिक आंकड़ों को महंगाई के खतरे के रूप में देखा जाता है और दरें बढ़ाने की चर्चा शुरू हो जाती है।
उन्होंने कहा, 'पहले जब अच्छे आर्थिक आंकड़े आते थे तो ब्याज दरें नीचे जाती थीं। अब जब अच्छे आंकड़े आते हैं तो ब्याज दरें बढ़ाने की बात होती है, क्योंकि उन्हें महंगाई का डर रहता है। लेकिन इसका मतलब यह है कि आप कभी पूरी रफ्तार से आगे नहीं बढ़ सकते।' आलोचकों का कहना है कि यह तर्क फेड की मुद्रास्फीति-नियंत्रण की जिम्मेदारी को नजरअंदाज करता है।
महंगाई और विकास पर ट्रंप का रुख
ट्रंप ने इस प्रचलित धारणा को भी खारिज किया कि तेज आर्थिक विकास अपने आप महंगाई को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा, 'आर्थिक सफलता और विकास अपने आप महंगाई नहीं लाते। महंगाई के पीछे दूसरी वजहें होती हैं।' उनका तर्क था कि जब अर्थव्यवस्था मजबूत होती है तो अमेरिका की वित्तीय साख बेहतर होती है और ऐसे में ब्याज दरें घटनी चाहिए, बढ़नी नहीं।
उन्होंने हाल के आर्थिक आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा, 'हमने अभी शानदार आर्थिक आंकड़े जारी किए हैं और अब ब्याज दरें बढ़ाने की बात हो रही है। यह हास्यास्पद है।' व्हाइट हाउस और फेड के बीच यह तनाव वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता का एक नया कारण बन सकता है।