ट्विशा शर्मा केस: सीबीआई का डिजिटल सीन री-क्रिएशन, गिरिबाला-समर्थ 2 जून तक हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भोपाल के कटारा हिल्स स्थित उस घर में कथित तौर पर खुदकुशी करने वाली ट्विशा शर्मा की मौत की जांच में तेज़ी लाते हुए फोरेंसिक और डिजिटल उपकरणों की मदद से सीन री-क्रिएशन शुरू कर दी है। एजेंसी घटना की मिनट-दर-मिनट वर्चुअल टाइमलाइन तैयार कर रही है, ताकि उस रात की हर अहम गतिविधि को दस्तावेज़ीकृत किया जा सके।
डिजिटल पुनर्निर्माण में क्या शामिल है
सूत्रों के अनुसार इस डिजिटल री-क्रिएशन में घटना वाली रात की सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन की गतिविधि, घर के वाईफाई लॉग, इंटरनेट सर्च हिस्ट्री, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और तीन मंजिला घर की फॉरेंसिक मैपिंग को शामिल किया गया है।
इस वर्चुअल टाइमलाइन से यह स्पष्ट करने की कोशिश की जाएगी कि अपने अंतिम क्षणों में ट्विशा कहाँ थीं, उस समय कौन-कौन से मोबाइल डिवाइस चालू थे और घर में कौन-सी ऑनलाइन गतिविधियाँ हो रही थीं।
अदालत ने दी पाँच दिन की सीबीआई हिरासत
शुक्रवार, 30 मई को भोपाल की एक जिला अदालत ने गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को 2 जून तक पाँच दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया। विशेष न्यायाधीश शोभना भालवे ने दहेज उत्पीड़न, क्रूरता और कथित उकसावे के आरोपों में दोनों से पूछताछ के लिए यह रिमांड मंजूर की।
सीबीआई अधिकारियों ने अदालत को बताया कि कई उपकरणों से प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के संदर्भ में आरोपियों से हिरासत में पूछताछ अनिवार्य है। एजेंसी यह भी जाँच कर रही है कि क्या स्थानीय पुलिस की प्रारंभिक जांच के दौरान कोई डिजिटल डेटा मिटाया गया, बदला गया या जानबूझकर छिपाया गया।
गिरिबाला की गिरफ्तारी और हाई कोर्ट का फैसला
गिरिबाला सिंह को गुरुवार को उनके कटारा हिल्स स्थित घर से गिरफ्तार किया गया। यह गिरफ्तारी मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा उनकी अग्रिम जमानत रद्द किए जाने के ठीक एक दिन बाद हुई। अदालत ने अंतरिम राहत रद्द करते हुए कहा कि व्हाट्सऐप चैट और परिवार के बयानों से यह संकेत मिलता है कि आरोप केवल ट्विशा के पति तक सीमित नहीं थे।
परिवार के वकील के गंभीर आरोप
मां-बेटे की हिरासत के बाद ट्विशा के पारिवारिक वकील अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने शुरुआती जांच में गंभीर कमियों का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'इसमें लगभग 40 से 45 मोबाइल नंबर शामिल थे, लेकिन शुरुआत में गिरिबाला सिंह के फोन से कोई कॉल रिकॉर्ड नहीं मिला।'
श्रीवास्तव ने आगे दावा किया कि बाद में रिकॉर्ड से पता चला कि कई लोगों के बीच लगातार बातचीत हो रही थी और उन कॉल रिकॉर्ड में कुछ पुलिस अधिकारी भी शामिल थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अदालत में पेश किए गए कॉल डिटेल चुनिंदा थे और सीसीटीवी फुटेज को जब्त किए जाने से पहले उसमें छेड़छाड़ की गई थी।
आगे की जांच की दिशा
गौरतलब है कि यह मामला तब और संवेदनशील हो गया जब सीबीआई ने स्थानीय पुलिस की जांच की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठाना शुरू किया। एजेंसी की डिजिटल फोरेंसिक टीम अगले कुछ दिनों में अपनी वर्चुअल टाइमलाइन रिपोर्ट तैयार करेगी, जो इस मामले की आगे की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।