नंदनकानन में बचाए गए 5 ओरांगुटान बच्चों में से 2 में एनीमिया, विशेषज्ञ टीम कर रही निगरानी
सारांश
मुख्य बातें
नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क, भुवनेश्वर में रखे गए पाँच बेबी ओरांगुटान में से दो में एनीमिया (खून की कमी) पाई गई है — यह जानकारी मैसूरु चिड़ियाघर के असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. शशीधर ने बुधवार, 16 सितंबर को प्राइमेट्स की विस्तृत स्वास्थ्य जाँच के बाद दी। ये सभी पाँचों बच्चे हाल ही में बालेश्वर फॉरेस्ट डिवीज़न, ओडिशा से बचाए गए थे और फिलहाल नंदनकानन में विशेष देखरेख में हैं।
स्वास्थ्य जाँच में क्या सामने आया
डॉ. शशीधर के अनुसार, शारीरिक परीक्षण के दौरान सभी पाँचों ओरांगुटान बच्चे सामान्य, स्वस्थ और सक्रिय दिखे। हालाँकि, प्रयोगशाला में रक्त और मल के नमूनों की विस्तृत जाँच के बाद दो में एनीमिया की पुष्टि हुई।
उन्होंने बताया, 'खून की जाँच से पता चला कि एक में एनीमिया बहुत ज़्यादा है, जबकि दूसरे में एनीमिया का असर कम है। हमने दवा का सुझाव दिया है और बायोकेमिकल टेस्ट जैसे कई दूसरे टेस्ट के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद हम उनकी सेहत की पूरी जाँच करेंगे।'
माँ से बिछड़ने का मनोवैज्ञानिक असर
विशेषज्ञों का कहना है कि इन बच्चों को अत्यंत कम उम्र में ही अपनी माँ से अलग कर दिए जाने के कारण वे गहरे तनाव में हो सकते हैं। डॉ. शशीधर ने कहा, 'ओरांगुटान लंबे समय तक अपनी माँ पर निर्भर रहते हैं। चूँकि उन्हें बहुत जल्दी अलग कर दिया गया है, इसलिए वे बहुत ज़्यादा तनाव में हैं, जिससे उन्हें संक्रमण होने का खतरा बढ़ सकता है।'
गौरतलब है कि ओरांगुटान का बचपन असाधारण रूप से लंबा होता है — शून्य से तीन वर्ष तक शिशु अवस्था और चार से सात वर्ष तक किशोर अवस्था। इस दौरान वे पूरी तरह माँ पर निर्भर रहते हैं।
देखरेख और आगे का इलाज
ओडिशा सरकार ने इन बेबी ओरांगुटान की सेहत और भलाई पर नज़र रखने के लिए एक विशेष तकनीकी टीम गठित की है, जिसमें डॉ. शशीधर भी शामिल हैं। लैब रिपोर्ट मिलने और उनके विश्लेषण के बाद आगे के उपचार का निर्णय लिया जाएगा।
डॉ. शशीधर ने नंदनकानन जू के अधिकारियों द्वारा किए गए इंतज़ामों की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ तापमान और नमी को नियंत्रित करने वाले विशेष कमरे उपलब्ध हैं, जो इन प्राइमेट्स के लिए उचित माहौल सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने कहा, 'वे अभी ठीक हैं।' जानवरों को उनकी उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार निरंतर देखभाल और उचित पोषण दिया जाएगा।
ओरांगुटान ओडिशा के जंगल में कैसे पहुँचे
ये पाँचों बेबी ओरांगुटान बालासोर ज़िले के एक जंगल में लावारिस हालत में मिले थे। एक वायरल वीडियो में इन्हें जंगल की ज़मीन पर एक साथ बैठकर केले खाते हुए देखा गया था। ओरांगुटान भारत के मूल निवासी नहीं हैं — ये गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्राइमेट मूल रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया के उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में पाए जाते हैं और अपने प्राकृतिक आवास से हज़ारों किलोमीटर दूर पाए जाने की यह घटना अपने आप में असाधारण है।
स्थानीय लोगों ने इन्हें देखकर वन अधिकारियों को सूचित किया, जिसके बाद इन्हें बचाया गया। अब इस बात की जाँच जारी है कि ये बच्चे ओडिशा के जंगल में कैसे पहुँचे।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों के अनुसार, इन युवा ओरांगुटान को आत्मनिर्भर बनने से पहले लंबे समय तक नियंत्रित माहौल में एक बाड़े में रखकर देखभाल की आवश्यकता होगी। प्रयोगशाला परिणामों के आधार पर उपचार योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा और तकनीकी टीम उनकी स्वास्थ्य स्थिति की नियमित समीक्षा करती रहेगी।