टू-व्हीलर रोड एंबुलेंस को मान्यता देने का प्रस्ताव, दुर्गम इलाकों में आपातकालीन सेवा होगी मजबूत
सारांश
मुख्य बातें
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 3 अगस्त 2026 को 'टू-व्हीलर रोड एंबुलेंस' के लिए एक समर्पित नियामक ढाँचे का मसौदा प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य ग्रामीण, पहाड़ी और दूरदराज के उन इलाकों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना है जहाँ पारंपरिक चार पहिया एंबुलेंस की पहुँच सीमित है। यह प्रस्ताव इन वाहनों को केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के अंतर्गत एक अलग और मान्यता प्राप्त श्रेणी में शामिल करने की दिशा में पहला ठोस कदम है।
प्रस्ताव की पृष्ठभूमि
वर्तमान में टू-व्हीलर रोड एंबुलेंस को केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत कोई अलग श्रेणी प्राप्त नहीं है। इस कारण इनके डिज़ाइन, सुरक्षा सुविधाओं, पंजीकरण, प्रकार अनुमोदन और फिटनेस निरीक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कोई निर्धारित मानक मौजूद नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, यह नियामक शून्यता इन वाहनों की प्रभावी तैनाती में एक बड़ी बाधा रही है।
नया मानक: AIS-209 (भाग 1):2026
इस अंतर को पाटने के लिए मंत्रालय ने AIS-209 (भाग 1):2026 को अपनाने का प्रस्ताव दिया है — यह एक नवीन तकनीकी मानक है जो जीवन रक्षक टू-व्हीलर रोड एंबुलेंस के निर्माण और कार्यात्मक आवश्यकताओं को परिभाषित करता है। मसौदे के अनुसार, 1 अक्टूबर 2027 को या उसके बाद निर्मित सभी L2-श्रेणी के ऐसे वाहनों को इस मानक का अनुपालन अनिवार्य रूप से करना होगा। इसके साथ ही वाहनों पर लगी आपातकालीन चेतावनी वाली ऊपरी लाइटें भी उसी तिथि से निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।
राज्यों को परिचालन लचीलापन
प्रस्तावित नियम राज्य सरकारों को यह अधिकार देते हैं कि वे स्थानीय आवश्यकताओं और भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर इन एंबुलेंस के परिचालन क्षेत्र स्वयं निर्धारित करें। यह प्रावधान विशेष रूप से उत्तर-पूर्व भारत, हिमालयी राज्यों और आदिवासी बहुल जिलों के लिए महत्त्वपूर्ण है, जहाँ संकरी सड़कें और दुर्गम भूभाग पारंपरिक एंबुलेंस की राह में बाधा बनते हैं।
फिटनेस और पंजीकरण नियम
मंत्रालय ने टू-व्हीलर रोड एंबुलेंस को परिवहन वाहन के रूप में वर्गीकृत करने का भी प्रस्ताव दिया है। इसके फलस्वरूप इन वाहनों को अनिवार्य फिटनेस प्रमाणन की शर्त पूरी करनी होगी और हर दो वर्ष में फिटनेस प्रमाण पत्र का नवीनीकरण कराना होगा। यह व्यवस्था सेवा की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को दीर्घकालिक रूप से बनाए रखने के लिए ज़रूरी मानी जा रही है।
आगे की राह
मंत्रालय ने इस मसौदे पर सार्वजनिक टिप्पणियाँ आमंत्रित की हैं। गौरतलब है कि यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब देश में स्वास्थ्य सेवाओं की अंतिम मील की पहुँच को लेकर नीतिगत बहस तेज़ हो रही है। यदि यह ढाँचा लागू होता है, तो भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिन्होंने टू-व्हीलर एंबुलेंस के लिए एक विधिवत राष्ट्रीय नियामक व्यवस्था स्थापित की है।