उड़ान योजना: झारखंड के बोकारो और दुमका हवाई अड्डे तैयार, ₹117.61 करोड़ खर्च
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना उड़े देश का आम नागरिक (आरसीएस-उड़ान) के तहत झारखंड के बोकारो और दुमका हवाई अड्डों का विकास कार्य पूरा हो चुका है। नागरिक विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने 27 जुलाई को राज्यसभा में सांसद परिमल नथवाणी के लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। झारखंड में उड़ान योजना के अंतर्गत चुने गए छह हवाई अड्डों में से चार का विकास कार्य अब तक पूर्ण हो चुका है।
मुख्य घटनाक्रम
उड़ान योजना में झारखंड के बोकारो, दुमका, जमशेदपुर, हजारीबाग, देवघर और डाल्टनगंज हवाई अड्डों को शामिल किया गया है। इनमें जमशेदपुर और देवघर हवाई अड्डों से पहले ही उड़ान सेवाएँ संचालित हो रही हैं, जबकि बोकारो और दुमका हवाई अड्डों का बुनियादी ढाँचा विकसित कर लिया गया है। हालाँकि, इन दोनों हवाई अड्डों से वाणिज्यिक उड़ानें कब शुरू होंगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। स्थानीय आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, उड़ान संचालन के लिए नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी है।
बजट और व्यय
राज्यसभा में दिए गए जवाब के अनुसार, झारखंड में हवाई अड्डों के विकास के लिए पिछले कुछ वर्षों में ₹122.04 करोड़ स्वीकृत किए गए थे। इनमें से ₹117.61 करोड़ अब तक खर्च किए जा चुके हैं। इस राशि का उपयोग हवाई अड्डों की आधारभूत सुविधाएँ विकसित करने और छोटे शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने के लिए किया गया है।
हजारीबाग और डाल्टनगंज में अड़चन
हजारीबाग और डाल्टनगंज हवाई अड्डों का विकास कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि इन दोनों परियोजनाओं के लिए झारखंड राज्य सरकार की ओर से आवश्यक भूमि अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिसके कारण विकास कार्य आगे नहीं बढ़ पाया है। यह स्थिति देश के अन्य राज्यों में भी देखी जाती है, जहाँ भूमि अधिग्रहण में देरी हवाई अड्डा परियोजनाओं की सबसे बड़ी बाधा बनती है।
उड़ान योजना का नया संस्करण
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 4 जुलाई से उड़ान योजना का नया संस्करण लागू किया है। इसके तहत अगले 10 वर्षों में देश के 120 नए या कम सेवा वाले हवाई अड्डों और गंतव्यों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार का उद्देश्य लगभग 4 करोड़ लोगों तक सस्ती क्षेत्रीय हवाई सेवा पहुँचाना है। झारखंड जैसे आदिवासी-बहुल और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्यों में यह योजना विशेष महत्त्व रखती है, जहाँ सड़क और रेल संपर्क अभी भी सीमित है।
आगे की राह
बोकारो और दुमका हवाई अड्डों से उड़ान सेवाएँ शुरू होने के बाद झारखंड के औद्योगिक और आदिवासी क्षेत्रों को सीधे हवाई संपर्क मिलेगा। हजारीबाग और डाल्टनगंज के मामले में भूमि उपलब्धता की समस्या का समाधान राज्य और केंद्र सरकार के बीच समन्वय पर निर्भर करेगा।