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यूनेस्को की चेतावनी: जलवायु संकट और सशस्त्र संघर्ष से विश्व धरोहरों पर 'अभूतपूर्व दबाव'

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यूनेस्को की चेतावनी: जलवायु संकट और सशस्त्र संघर्ष से विश्व धरोहरों पर 'अभूतपूर्व दबाव'

सारांश

बुसान में यूनेस्को की चेतावनी महज़ औपचारिकता नहीं — यह एक स्वीकारोक्ति है कि जलवायु संकट और युद्ध मिलकर उन धरोहरों को मिटा रहे हैं जिन्हें मानवता ने सदियों में बनाया। बुसान घोषणा के साथ अब असली परीक्षा यह है कि शब्द कब कार्रवाई में बदलेंगे।

मुख्य बातें

यूनेस्को ने 20 जुलाई को बुसान में चेताया कि विश्व धरोहरें जलवायु परिवर्तन और सशस्त्र संघर्षों से 'अभूतपूर्व दबाव' में हैं।
विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में सर्वसम्मति से 'बुसान डेक्लरेशन ऑन वर्ल्ड हेरिटेज' अपनाई गई।
यूनेस्को के सहायक महानिदेशक नायेफ अल-फायेज ने मरम्मत के बजाय रोकथाम को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
धरोहर केंद्र के निदेशक लाजारे एलाउंडू असोमो ने कहा — सांस्कृतिक और मानसिक क्षति की भरपाई भौतिक नुकसान से कहीं कठिन है।
दक्षिण कोरिया 1988 में सदस्य बनने के बाद पहली बार इस बैठक की मेज़बानी कर रहा है; 10 दिवसीय सत्र अगले बुधवार तक चलेगा।

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) के शीर्ष अधिकारियों ने 20 जुलाई को स्पष्ट चेतावनी दी कि जलवायु परिवर्तन और सशस्त्र संघर्षों के कारण विश्व की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरें 'अभूतपूर्व दबाव' में हैं और इनके संरक्षण के लिए तत्काल वैश्विक जागरूकता तथा सामूहिक निवारक उपायों की आवश्यकता है। यह चेतावनी दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में आयोजित विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र के दौरान दी गई।

मुख्य घटनाक्रम

बुसान में आयोजित प्रेस वार्ता में यूनेस्को के संस्कृति मामलों के सहायक महानिदेशक नायेफ अल-फायेज ने कहा कि विश्व धरोहर स्थलों का लगातार हो रहा विनाश पूरे वैश्विक समुदाय पर मिलकर समाधान खोजने की बड़ी जिम्मेदारी डालता है। उन्होंने रोकथाम को मरम्मत से अधिक प्राथमिकता देने पर बल दिया।

अल-फायेज ने कहा, "इस जिम्मेदारी को निभाना केवल सरकारों का काम नहीं है। इन स्थलों पर रहने वाले लोगों, वहाँ काम करने वालों और उन्हें देखने आने वाले पर्यटकों की भी समान जिम्मेदारी है। हम सभी को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि इन अमूल्य धरोहरों का सही तरीके से संरक्षण और रखरखाव हो।"

धरोहरों पर मँडराते खतरे

यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र के निदेशक लाजारे एलाउंडू असोमो ने बताया कि इन धरोहरों के सामने कई परस्पर जुड़े खतरे हैं — लगातार बढ़ रही चरम मौसम की घटनाएँ, प्राकृतिक आपदाएँ, जानबूझकर किए जाने वाले हमले और मानव गतिविधियों का बढ़ता दबाव। गौरतलब है कि भौतिक क्षति की भरपाई कभी-कभी संभव होती है, लेकिन प्रभावित समाजों को होने वाली मानसिक और सांस्कृतिक क्षति की भरपाई करना कहीं अधिक कठिन होता है।

असोमो ने कहा, "ऐसे समय में बुसान में हो रही समिति की यह बैठक पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के रुख को तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।"

बुसान घोषणा: एक ऐतिहासिक कदम

सत्र के दौरान समिति ने सर्वसम्मति से 'बुसान डेक्लरेशन ऑन वर्ल्ड हेरिटेज' (विश्व धरोहर पर बुसान घोषणा) को अपनाया, जिसमें दुनिया भर की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों पर बढ़ते खतरों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करने का आह्वान किया गया। असोमो ने इस घोषणा को समिति का "स्पष्ट और सशक्त संदेश" बताते हुए कहा कि "हमें धरोहरों की रक्षा के प्रयासों को रोकना नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें और अधिक मजबूत करना चाहिए।"

दक्षिण कोरिया की ऐतिहासिक मेज़बानी

यह 10 दिवसीय सत्र अगले बुधवार तक चलेगा। 1988 में यूनेस्को विश्व धरोहर सम्मेलन का सदस्य बनने के बाद यह पहला अवसर है जब दक्षिण कोरिया इस बैठक की मेज़बानी कर रहा है। उद्घाटन समारोह रविवार को आयोजित किया गया था, जबकि सत्र सोमवार को औपचारिक रूप से शुरू हुआ।

क्या होगा आगे

बुसान घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपेक्षा है कि वह धरोहर संरक्षण के लिए ठोस वित्तीय और नीतिगत प्रतिबद्धताएँ सामने रखे। असोमो ने उम्मीद जताई कि यह बैठक वैश्विक जागरूकता का एक नया दौर शुरू करेगी और विश्व धरोहरों की रक्षा के लिए नई प्रतिबद्धता को प्रेरित करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यूनेस्को की पिछली घोषणाओं का इतिहास बताता है कि संकल्पों और ज़मीनी संरक्षण के बीच की खाई अक्सर चौड़ी रही है। यमन, सीरिया और यूक्रेन जैसे संघर्ष-ग्रस्त देशों में धरोहरों की तबाही यह साबित करती है कि घोषणाएँ गोलियों और बाढ़ के सामने बेअसर होती हैं। असली सवाल यह है कि क्या सदस्य देश वित्तीय प्रतिबद्धताओं और संघर्ष-क्षेत्रों में त्वरित हस्तक्षेप तंत्र के साथ आगे आएँगे — या यह भी महज़ एक और 'ऐतिहासिक' दस्तावेज़ बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूनेस्को विश्व धरोहर समिति का 48वाँ सत्र कहाँ और कब हो रहा है?
यह सत्र दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में 20 जुलाई से शुरू हुआ और अगले बुधवार तक, यानी 10 दिनों तक चलेगा। उद्घाटन समारोह रविवार को आयोजित किया गया था।
बुसान घोषणा (Busan Declaration) क्या है?
बुसान घोषणा विश्व धरोहर समिति द्वारा सर्वसम्मति से अपनाया गया एक अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज़ है, जिसमें जलवायु परिवर्तन और सशस्त्र संघर्षों से सांस्कृतिक व प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा के लिए वैश्विक सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया गया है।
विश्व धरोहर स्थलों पर कौन-से प्रमुख खतरे हैं?
यूनेस्को के अनुसार इन धरोहरों पर चरम मौसम की घटनाएँ, प्राकृतिक आपदाएँ, जानबूझकर किए गए हमले और मानव गतिविधियों का बढ़ता दबाव — ये सभी परस्पर जुड़े खतरे एक साथ काम कर रहे हैं।
यूनेस्को ने धरोहर संरक्षण के लिए क्या सुझाव दिया?
यूनेस्को के सहायक महानिदेशक नायेफ अल-फायेज ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं या संघर्षों के बाद मरम्मत करने के बजाय पहले से रोकथाम के उपायों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह जिम्मेदारी केवल सरकारों की नहीं, बल्कि स्थानीय निवासियों और पर्यटकों की भी है।
दक्षिण कोरिया पहली बार यूनेस्को विश्व धरोहर बैठक की मेज़बानी क्यों कर रहा है?
दक्षिण कोरिया 1988 में यूनेस्को विश्व धरोहर सम्मेलन का सदस्य बना था। इस वर्ष बुसान में आयोजित 48वाँ सत्र पहला अवसर है जब दक्षिण कोरिया इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक की मेज़बानी कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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