यूएनजीए 81वें सत्र से पहले वॉन डेर लेयेन और गुटेरेस की बैठक, यूएन सुधार व बहुपक्षीय सहयोग पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र से ठीक पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की और बहुपक्षीय सहयोग तथा नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को मज़बूत करने पर बल दिया। इस उच्च-स्तरीय बैठक में यूरोपीय परिषद की अध्यक्ष एवं ईयू की विदेश और सुरक्षा नीति की प्रमुख काजा कल्लास भी शामिल रहीं।
बैठक में क्या हुआ
वॉन डेर लेयेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'यूएनजीए के 81वें सत्र से पहले महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ बेहद सार्थक बैठक हुई। यूरोपीय संघ हमेशा बहुपक्षीय सहयोग और नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थन करता रहेगा। इसके केंद्र में एक ऐसा संयुक्त राष्ट्र होना चाहिए जिसमें समय की ज़रूरतों के अनुसार सुधार किए गए हों।'
उन्होंने महासचिव गुटेरेस के कार्यकाल के दौरान करीबी सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि यूक्रेन संकट से लेकर मध्य पूर्व और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों ने मिलकर काम किया है। उन्होंने यूएन-80 सुधारों को आगे बढ़ाने में गुटेरेस की भूमिका की भी प्रशंसा की।
यूएन सुधार पर ईयू का रुख
वॉन डेर लेयेन ने स्पष्ट किया कि लक्ष्य एक ऐसा संयुक्त राष्ट्र बनाना है जो आज की दुनिया की चुनौतियों के अनुरूप काम कर सके — अधिक प्रभावशाली, तेज़ और ज़मीनी स्तर पर ठोस समाधान देने में सक्षम। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बहुपक्षीय संस्थाओं की प्रासंगिकता और प्रभावशीलता को लेकर व्यापक बहस छिड़ी हुई है।
गौरतलब है कि यूरोपीय संघ (EU) लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र की संरचना में सुधार का पैरोकार रहा है, विशेष रूप से सुरक्षा परिषद की प्रतिनिधित्व क्षमता और त्वरित निर्णय-प्रक्रिया के संदर्भ में।
यूएनजीए हाई-लेवल वीक का कार्यक्रम
संयुक्त राष्ट्र महासभा का हाई-लेवल वीक 22 से 29 सितंबर 2026 तक चलेगा। आम बहस 22 से 26 सितंबर और पुनः 28 सितंबर को आयोजित होगी। इस दौरान विश्व के शीर्ष नेता और वरिष्ठ प्रतिनिधि वैश्विक शांति, सुरक्षा, आर्थिक चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन, महामारी-तैयारी और परमाणु निरस्त्रीकरण जैसे अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।
भारत की भागीदारी
भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर न्यूयॉर्क में यूएनजीए के 81वें सत्र के हाई-लेवल वीक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। उनकी भागीदारी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत वैश्विक दक्षिण (Global South) के प्रतिनिधि के रूप में संयुक्त राष्ट्र सुधार एजेंडे में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
व्यापक संदर्भ
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब यूक्रेन युद्ध, गाजा संघर्ष और जलवायु संकट जैसे बहुआयामी वैश्विक दबाव संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली की सीमाओं को उजागर कर रहे हैं। ईयू और यूएन नेतृत्व की इस मुलाकात को व्यापक कूटनीतिक तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। हाई-लेवल वीक से पहले इस तरह की बैठकें आगामी एजेंडे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं।