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यूपी 2027 चुनाव: लखनऊ की 9 विधानसभा सीटों पर भाजपा का दबदबा, सपा को दो सीटों से उम्मीद

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यूपी 2027 चुनाव: लखनऊ की 9 विधानसभा सीटों पर भाजपा का दबदबा, सपा को दो सीटों से उम्मीद

सारांश

नवाबों के शहर लखनऊ में 2027 का चुनावी दंगल गरमाने लगा है। 9 में से 7 सीटें थामे भाजपा के लिए यह दुर्ग बरकरार रखने की परीक्षा है, तो सपा के लिए अपनी 2 सीटें बचाते हुए आगे बढ़ने की चुनौती — और राजधानी का रुझान पूरे यूपी की सियासत की दिशा तय करेगा।

मुख्य बातें

लखनऊ में कुल 9 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से 7 पर भाजपा और 2 पर समाजवादी पार्टी का कब्ज़ा है ( 2022 चुनाव के अनुसार)।
लखनऊ और मोहनलाल गंज — दोनों लोकसभा सीटें भी भाजपा के पास हैं; क्रमशः राजनाथ सिंह और कौशल किशोर सांसद हैं।
भाजपा के 7 विधायक : जय देवी (मलिहाबाद), योगेश शुक्ला (बख्शी का तालाब), राजेश्वर सिंह (सरोजनी नगर), डॉ.
नीरज बोरा (लखनऊ उत्तर), आशुतोष टंडन गोपाल (लखनऊ पूर्व), बृजेश पाठक (लखनऊ कैंट), अमरेश कुमार (मोहनलाल गंज)।
सपा के 2 विधायक : अरमान खान (लखनऊ पश्चिम) और रविदास मेहरोत्रा (लखनऊ मध्य)।
लखनऊ जिले की कुल आबादी लगभग 45,89,838 और क्षेत्रफल 2,528 वर्ग किमी ; 5 तहसीलें , 8 ब्लॉक , 961 गाँव ।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ — नवाबों की तहज़ीब और आधुनिक सियासत का संगम — 2027 विधानसभा चुनाव में एक बार फिर राजनीतिक दलों के लिए निर्णायक रणभूमि बनने जा रहा है। 2022 के चुनाव में 9 में से 7 सीटें जीतकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लखनऊ को अपना अभेद्य दुर्ग बना लिया, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) केवल 2 सीटों पर सिमटकर रह गई।

लखनऊ का भौगोलिक और सामाजिक परिचय

लखनऊ जिले का कुल क्षेत्रफल 2,528 वर्ग किमी है और यहाँ की कुल आबादी लगभग 45,89,838 है। प्रशासनिक दृष्टि से जिले में 5 तहसीलें, 8 ब्लॉक और 961 गाँव हैं। हिंदी और उर्दू यहाँ की प्रमुख भाषाएँ हैं, और तेज़ी से बढ़ता शहरीकरण तथा ग्रामीण क्षेत्रों का समन्वय लखनऊ की पहचान को अनूठा बनाता है।

ऐतिहासिक रूप से अवध की राजधानी रहा लखनऊ, शिया नवाबों के संरक्षण में शिष्टाचार, कविता, संगीत और अवधी व्यंजनों के लिए पूरे उपमहाद्वीप में जाना जाता है। मुगल और इंडो-यूरोपीय वास्तुकला के संयोजन से सजा यह शहर अब शॉपिंग मॉल, मेट्रो रेल और आधुनिक आवासीय परिसरों के साथ एक समृद्ध महानगर बन चुका है।

सियासी समीकरण: भाजपा का अभेद्य दुर्ग

लखनऊ जिले में दो लोकसभा सीटें हैं। लखनऊ संसदीय क्षेत्र से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मोहनलाल गंज सीट से कौशल किशोर — दोनों भाजपा सांसद हैं। विधानसभा स्तर पर भी भाजपा का वर्चस्व कायम है।

2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर जीतने वाले विधायकों में — मलिहाबाद से जय देवी, बख्शी का तालाब से योगेश शुक्ला, सरोजनी नगर से राजेश्वर सिंह, लखनऊ उत्तर से डॉ. नीरज बोरा, लखनऊ पूर्व से आशुतोष टंडन गोपाल, लखनऊ कैंट से बृजेश पाठक और मोहनलाल गंज से अमरेश कुमार शामिल हैं। वहीं, लखनऊ पश्चिम से अरमान खान और लखनऊ मध्य से रविदास मेहरोत्रा समाजवादी पार्टी के विधायक हैं।

2027 की चुनौती: सीटें बढ़ाने की होड़

यह ऐसे समय में आया है जब 2027 विधानसभा चुनाव के लिए सभी प्रमुख दलों में एक-एक सीट को लेकर जोड़-तोड़ तेज़ हो गई है। भाजपा जहाँ अपनी 7 सीटों को बरकरार रखने और आदर्श रूप से शेष 2 भी हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं सपा को लखनऊ पश्चिम और लखनऊ मध्य की अपनी दोनों सीटें बचाने के साथ-साथ विस्तार की चुनौती है। गौरतलब है कि केंद्र की सत्ता की चाबी माने जाने वाले यूपी में राजधानी लखनऊ का राजनीतिक रुझान पूरे प्रदेश की नब्ज़ बताता है।

कनेक्टिविटी और आधारभूत ढाँचा

कनेक्टिविटी के लिहाज़ से लखनऊ उत्तर भारत का एक प्रमुख केंद्र है। चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (अमौसी) शहर के केंद्र से लगभग 15 किमी दूर स्थित है, जहाँ से दिल्ली, मुंबई, पटना, रांची और वाराणसी के लिए नियमित उड़ानें संचालित होती हैं। रेल मार्ग में चारबाग स्टेशन उत्तरी और पूर्वोत्तर रेलवे नेटवर्क का बड़ा जंक्शन है। सड़क मार्ग से लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग 24, 25 और 28 के चौराहे पर है — दिल्ली 497 किमी, कानपुर 79 किमी और प्रयागराज 225 किमी की दूरी पर।

क्या होगा आगे

2027 के चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं, लखनऊ की 9 विधानसभा सीटें राजनीतिक दलों की प्राथमिकता सूची में ऊपर होंगी। भाजपा का प्रयास अपने जनाधार को और मज़बूत करना होगा, जबकि सपा के लिए लखनऊ में पैठ बढ़ाना अस्तित्व की लड़ाई जैसी होगी। अन्य दलों की भूमिका वोट विभाजन में निर्णायक साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 2022 में यह सफलता काफी हद तक योगी सरकार की कानून-व्यवस्था छवि और सपा की संगठनात्मक कमज़ोरी पर टिकी थी — दोनों परिस्थितियाँ 2027 तक बदल सकती हैं। लखनऊ पश्चिम और मध्य में सपा की उपस्थिति बताती है कि शहरी मुस्लिम और पिछड़े वर्ग के वोट अभी भी विभाजित हैं, जो गणित को तरल रखता है। असली सवाल यह है कि क्या सपा शहरी सीटों पर अपनी पहचान बनाने में सक्षम होगी, या भाजपा विकास के नए मुद्दों पर एकजुटता बनाए रखेगी। लखनऊ की राजनीतिक दिशा पूरे यूपी के चुनावी मिजाज़ की थर्मामीटर रही है — 2027 में यह शहर एक बार फिर राष्ट्रीय नज़रों में होगा।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ में कितनी विधानसभा सीटें हैं और 2022 में किसने जीतीं?
लखनऊ जिले में कुल 9 विधानसभा सीटें हैं। 2022 विधानसभा चुनाव में 7 सीटें भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने और 2 सीटें — लखनऊ पश्चिम व लखनऊ मध्य — समाजवादी पार्टी (सपा) ने जीती थीं।
लखनऊ की लोकसभा सीटों पर कौन सांसद हैं?
लखनऊ जिले में दो लोकसभा सीटें हैं। लखनऊ संसदीय क्षेत्र से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मोहनलाल गंज सीट से कौशल किशोर सांसद हैं — दोनों भाजपा से हैं।
2027 यूपी चुनाव में लखनऊ क्यों अहम है?
माना जाता है कि केंद्र की सत्ता की चाबी उत्तर प्रदेश में है और लखनऊ उसकी राजधानी होने के नाते राजनीतिक दलों के लिए प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों दृष्टि से निर्णायक है। 9 विधानसभा सीटों का यह जिला पूरे प्रदेश के चुनावी मिजाज़ का संकेत देता है।
लखनऊ में भाजपा के 2022 के विधायक कौन-कौन हैं?
2022 में भाजपा के टिकट पर जीते सात विधायक हैं — जय देवी (मलिहाबाद), योगेश शुक्ला (बख्शी का तालाब), राजेश्वर सिंह (सरोजनी नगर), डॉ. नीरज बोरा (लखनऊ उत्तर), आशुतोष टंडन गोपाल (लखनऊ पूर्व), बृजेश पाठक (लखनऊ कैंट) और अमरेश कुमार (मोहनलाल गंज)।
लखनऊ की कुल आबादी और भौगोलिक विस्तार कितना है?
लखनऊ जिले का कुल क्षेत्रफल 2,528 वर्ग किमी है और यहाँ की कुल आबादी लगभग 45,89,838 है। प्रशासनिक रूप से जिले में 5 तहसीलें, 8 ब्लॉक और 961 गाँव शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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