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यूपी एटीएस ने कानपुर से अंकित शंखवार को किया गिरफ्तार, लैपटॉप में मिलीं 5 लाख फर्जी ई-मेल आईडी

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यूपी एटीएस ने कानपुर से अंकित शंखवार को किया गिरफ्तार, लैपटॉप में मिलीं 5 लाख फर्जी ई-मेल आईडी

सारांश

कानपुर से गिरफ्तार 24 वर्षीय अंकित शंखवार के लैपटॉप में 5 लाख फर्जी ई-मेल आईडी मिली हैं। आरोप है कि वह पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत कई देशों को ये आईडी क्रिप्टोकरेंसी के बदले बेचता था — और इन्हीं से स्कूलों, मुंबई मेयर कार्यालय व दिलजीत दोसांझ के शो को बम धमकियाँ दी गईं।

मुख्य बातें

यूपी एटीएस ने कानपुर नगर से 24 वर्षीय अंकित शंखवार को गिरफ्तार किया।
बरामद लैपटॉप में करीब 5 लाख फर्जी ई-मेल आईडी , पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन डेटा मिला।
आरोपी ने बांग्लादेशी नागरिक अलामीन इस्लाम को फर्जी आईडी बेचकर 6,000 यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी ली।
नोएडा-दिल्ली-गुरुग्राम के स्कूलों, मुंबई मेयर कार्यालय ( 23 अक्टूबर 2026 ) और गायक दिलजीत दोसांझ के शो को बम धमकियाँ इन्हीं आईडी से भेजी गईं।
धमकियों में खालिस्तान नेशनल आर्मी और बब्बर खालसा के नाम का कथित इस्तेमाल किया गया।
आरोपी वर्ष 2021 से सक्रिय था; पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्किये, मिस्र से संपर्क की पुष्टि।

उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (यूपी एटीएस) ने कानपुर नगर से 24 वर्षीय अंकित शंखवार को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह वर्ष 2021 से फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर उन्हें पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्किये और मिस्र सहित अन्य देशों में बैठे लोगों को क्रिप्टोकरेंसी के बदले बेच रहा था। गिरफ्तारी के दौरान बरामद लैपटॉप में करीब 5 लाख फर्जी ई-मेल आईडी मिली हैं, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर नोएडा, दिल्ली-एनसीआर, गुरुग्राम और मुंबई में स्कूलों व महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को बम धमकियाँ भेजने में किया गया था।

मुख्य घटनाक्रम

एटीएस के अनुसार, आरोपी अंकित शंखवार वाई-फाई और प्रॉक्सी नेटवर्क का उपयोग कर अपनी डिजिटल पहचान छिपाता था और फेसबुक से जुड़े सोशल मीडिया ग्रुप्स के ज़रिए फर्जी ई-मेल आईडी बेचता था। उसके लैपटॉप की एक्सेल फाइलों में करीब 5 लाख ई-मेल आईडी के साथ-साथ उनके पासवर्ड, रिकवरी ई-मेल और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन से जुड़ी जानकारी भी दर्ज थी।

जाँच में सामने आया है कि आरोपी ने बांग्लादेशी नागरिक अलामीन इस्लाम को फर्जी ई-मेल आईडी उपलब्ध कराई थीं और इसके बदले बाइनेंस क्रिप्टो वॉलेट के माध्यम से 6,000 यूएसडीटी का भुगतान लिया था। मोबाइल में विभिन्न देशों के नंबरों से व्हाट्सऐप संवाद और बड़े पैमाने पर यूएसडीटी लेन-देन के साक्ष्य भी मिले हैं।

धमकियों की विस्तृत श्रृंखला

एटीएस के मुताबिक, इन फर्जी आईडी से भेजे गए धमकी भरे ई-मेल में खालिस्तान नेशनल आर्मी और बब्बर खालसा के नाम का इस्तेमाल किया गया था। धमकी पाने वालों में दिल्ली-एनसीआर में पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ के प्रस्तावित शो को निशाना बनाने का दावा और एक प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता के आवास पर बम विस्फोट की धमकी शामिल थी।

12 अक्टूबर 2026 को नोएडा के स्कूलों और अन्य प्रतिष्ठानों को भेजे गए धमकी भरे ई-मेल से संबंधित आईडी भी जाँच में सामने आई। इसके अतिरिक्त 23 अक्टूबर 2026 को मुंबई के मेयर कार्यालय को बम विस्फोट की धमकी देने में इस्तेमाल हुई एक और ई-मेल आईडी भी आरोपी के पास मिली।

अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा

पूछताछ में पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्किये, मिस्र और अन्य देशों के व्यक्तियों एवं समूहों से आरोपी के संपर्क का पता चला है। एटीएस के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर 2021 से यह गतिविधि चला रहा था — यानी लगभग पाँच वर्षों तक वह फर्जी डिजिटल पहचान का कारोबार करता रहा।

गौरतलब है कि यह मामला उस व्यापक पैटर्न की कड़ी है जिसमें भारत-विरोधी तत्व देश के बाहर से फर्जी डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर सांप्रदायिक भय और सुरक्षा अलर्ट फैलाने की कोशिश करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए भुगतान लेने की पद्धति ऐसे नेटवर्क की पहचान को और जटिल बनाती है।

कानूनी कार्रवाई और आगे की जाँच

इस मामले में लखनऊ एटीएस थाने में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर पुलिस कस्टडी रिमांड माँगने की प्रक्रिया जारी है। एटीएस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों और साजिश के बाकी सूत्रों तक पहुँचने में जुटी है।

जाँच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, इस गिरफ्तारी से कई और लोगों की संलिप्तता उजागर होने की संभावना है। आने वाले दिनों में कस्टडी रिमांड के दौरान पूछताछ से नेटवर्क की पूरी परत-दर-परत जानकारी सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यानी सुरक्षा एजेंसियाँ लगभग पाँच वर्षों तक इस नेटवर्क को नहीं पकड़ पाईं। असली सवाल यह है कि 5 लाख आईडी में से कितनी अभी भी सक्रिय हाथों में हैं और क्या एटीएस उनतक पहुँचने में कामयाब होगी — या यह गिरफ्तारी सिर्फ नेटवर्क की एक कड़ी पकड़ने तक सीमित रहेगी।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी एटीएस ने अंकित शंखवार को किस आरोप में गिरफ्तार किया?
यूपी एटीएस ने अंकित शंखवार को फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर पाकिस्तान, बांग्लादेश सहित विदेशी व्यक्तियों व समूहों को बेचने और उन आईडी के ज़रिए स्कूलों व प्रतिष्ठानों को बम धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार किया। वह क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से भुगतान लेता था।
आरोपी के लैपटॉप में क्या मिला?
एटीएस के अनुसार लैपटॉप की एक्सेल फाइलों में करीब 5 लाख फर्जी ई-मेल आईडी मिलीं, जिनके साथ पासवर्ड, रिकवरी ई-मेल और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन की जानकारी भी दर्ज थी। मोबाइल में विभिन्न देशों के नंबरों से व्हाट्सऐप संवाद और यूएसडीटी लेन-देन के साक्ष्य भी पाए गए।
किन-किन जगहों को बम धमकियाँ दी गई थीं?
इन फर्जी आईडी से नोएडा, दिल्ली-एनसीआर और गुरुग्राम के स्कूलों, मुंबई के मेयर कार्यालय (23 अक्टूबर 2026), गायक दिलजीत दोसांझ के दिल्ली-एनसीआर में प्रस्तावित शो और एक प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता के आवास को धमकियाँ दी गई थीं। धमकियों में खालिस्तान नेशनल आर्मी और बब्बर खालसा का नाम लिया गया था।
आरोपी को भुगतान कैसे मिलता था?
आरोपी अंकित शंखवार बाइनेंस क्रिप्टो वॉलेट के ज़रिए यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान लेता था। बांग्लादेशी नागरिक अलामीन इस्लाम से उसे 6,000 यूएसडीटी का भुगतान मिला था जिसके साक्ष्य व्हाट्सऐप संवाद में मिले हैं।
इस मामले में आगे क्या होगा?
लखनऊ एटीएस थाने में मुकदमा दर्ज कर दिया गया है और आरोपी को न्यायालय में पेश कर पुलिस कस्टडी रिमांड माँगी जा रही है। एटीएस नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की पहचान करने में जुटी है।
राष्ट्र प्रेस
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