यूपी में किसान ऋण रिश्वत मामला: सीबीआई अदालत ने दो पूर्व बैंक अधिकारियों समेत तीन को 4-5 साल की सजा सुनाई
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ स्थित सीबीआई की विशेष भ्रष्टाचार निरोधक अदालत ने 26 अगस्त 2025 को उत्तर प्रदेश में किसान क्रेडिट कार्ड ऋण से जुड़े रिश्वतखोरी के दो अलग-अलग मामलों में दो पूर्व बैंक अधिकारियों समेत तीन दोषियों को चार से पाँच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोनों मामलों में आरोपियों को रंगे हाथ रिश्वत लेते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गिरफ्तार किया था।
पहला मामला: सुल्तानपुर, बड़ौदा यूपी ग्रामीण बैंक
12 मार्च 2018 को दर्ज इस मामले में सुल्तानपुर जिले की बड़ौदा यूपी ग्रामीण बैंक की हरिहरपुर शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक राकेश चंद्र ठाकुर पर आरोप था कि उन्होंने ₹4.25 लाख के किसान क्रेडिट कार्ड ऋण की पहली किस्त जारी करने के बदले शिकायतकर्ता किसान से ₹6,000 की रिश्वत माँगी थी।
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने जाल बिछाया और राकेश चंद्र ठाकुर को ₹6,000 की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। जाँच पूरी होने पर 10 मई 2018 को आरोपपत्र दाखिल किया गया और 21 दिसंबर 2020 को अदालत ने आरोप तय किए।
अदालत ने राकेश चंद्र ठाकुर को पाँच वर्ष के कठोर कारावास और ₹25,000 जुर्माने की सजा सुनाई।
दूसरा मामला: महाराजगंज, पूर्वांचल बैंक
11 अगस्त 2016 को दर्ज इस मामले में महाराजगंज जिले की पूर्वांचल बैंक की परतावल बाजार शाखा के तत्कालीन सहायक प्रबंधक रवि कुमार गुप्ता पर आरोप था कि उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड ऋण स्वीकृत करने के लिए शिकायतकर्ता से ₹15,000 रिश्वत माँगी थी।
जाँच में पाया गया कि रवि कुमार गुप्ता ने एक निजी व्यक्ति इंद्रजीत सिंह उर्फ बाबू साहेब के माध्यम से शिकायतकर्ता से ₹10,000 की रिश्वत स्वीकार की। सीबीआई ने दोनों आरोपियों को रिश्वत लेते समय रंगे हाथ पकड़ा।
अदालत ने रवि कुमार गुप्ता और इंद्रजीत सिंह दोनों को चार-चार वर्ष के कठोर कारावास और ₹40,000-₹40,000 जुर्माने की सजा सुनाई।
सीबीआई की प्रतिक्रिया
सीबीआई ने कहा कि दोनों मामलों में जाँच के दौरान पर्याप्त साक्ष्य एकत्र किए गए, जिनके आधार पर अदालत ने तीनों दोषियों को सजा सुनाई। यह फैसला ग्रामीण बैंकिंग क्षेत्र में भ्रष्टाचार के विरुद्ध एजेंसी की कार्रवाई की एक और कड़ी है।
आम जनता और किसानों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में बिचौलियों और भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा अवरोध की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। गौरतलब है कि किसान क्रेडिट कार्ड योजना केंद्र सरकार की प्रमुख कृषि ऋण योजना है, और इसमें रिश्वतखोरी सीधे उन किसानों को प्रभावित करती है जो समय पर ऋण न मिलने से फसल चक्र में पिछड़ जाते हैं।
दोनों मामलों में सजा से यह संदेश जाता है कि लंबे समय तक चली जाँच और मुकदमे के बाद भी सीबीआई की अदालतें दोषसिद्धि सुनिश्चित कर सकती हैं। आगे इन दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है।