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यूपी में किसान ऋण रिश्वत मामला: सीबीआई अदालत ने दो पूर्व बैंक अधिकारियों समेत तीन को 4-5 साल की सजा सुनाई

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यूपी में किसान ऋण रिश्वत मामला: सीबीआई अदालत ने दो पूर्व बैंक अधिकारियों समेत तीन को 4-5 साल की सजा सुनाई

सारांश

उत्तर प्रदेश में किसान ऋण रिश्वत के दो मामलों में सीबीआई अदालत ने तीन दोषियों को सजा सुनाई — एक शाखा प्रबंधक को पाँच साल और दो अन्य को चार-चार साल। रंगे हाथ गिरफ्तारी से लेकर सजा तक की यह कार्रवाई ग्रामीण बैंकिंग भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश देती है।

मुख्य बातें

लखनऊ की सीबीआई विशेष अदालत ने 25 अगस्त 2025 को दो अलग-अलग किसान ऋण रिश्वत मामलों में फैसला सुनाया।
राकेश चंद्र ठाकुर (बड़ौदा यूपी ग्रामीण बैंक, सुल्तानपुर) को ₹6,000 रिश्वत के लिए 5 वर्ष कठोर कारावास और ₹25,000 जुर्माना।
रवि कुमार गुप्ता (पूर्वांचल बैंक, महाराजगंज) और इंद्रजीत सिंह को ₹10,000 रिश्वत के लिए 4-4 वर्ष कठोर कारावास और ₹40,000-₹40,000 जुर्माना।
दोनों मामलों में आरोपियों को सीबीआई ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।
मामले 2016 और 2018 में दर्ज हुए थे; दोनों में किसान क्रेडिट कार्ड ऋण के लिए रिश्वत माँगी गई थी।

लखनऊ स्थित सीबीआई की विशेष भ्रष्टाचार निरोधक अदालत ने 26 अगस्त 2025 को उत्तर प्रदेश में किसान क्रेडिट कार्ड ऋण से जुड़े रिश्वतखोरी के दो अलग-अलग मामलों में दो पूर्व बैंक अधिकारियों समेत तीन दोषियों को चार से पाँच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोनों मामलों में आरोपियों को रंगे हाथ रिश्वत लेते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गिरफ्तार किया था।

पहला मामला: सुल्तानपुर, बड़ौदा यूपी ग्रामीण बैंक

12 मार्च 2018 को दर्ज इस मामले में सुल्तानपुर जिले की बड़ौदा यूपी ग्रामीण बैंक की हरिहरपुर शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक राकेश चंद्र ठाकुर पर आरोप था कि उन्होंने ₹4.25 लाख के किसान क्रेडिट कार्ड ऋण की पहली किस्त जारी करने के बदले शिकायतकर्ता किसान से ₹6,000 की रिश्वत माँगी थी।

शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने जाल बिछाया और राकेश चंद्र ठाकुर को ₹6,000 की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। जाँच पूरी होने पर 10 मई 2018 को आरोपपत्र दाखिल किया गया और 21 दिसंबर 2020 को अदालत ने आरोप तय किए।

अदालत ने राकेश चंद्र ठाकुर को पाँच वर्ष के कठोर कारावास और ₹25,000 जुर्माने की सजा सुनाई।

दूसरा मामला: महाराजगंज, पूर्वांचल बैंक

11 अगस्त 2016 को दर्ज इस मामले में महाराजगंज जिले की पूर्वांचल बैंक की परतावल बाजार शाखा के तत्कालीन सहायक प्रबंधक रवि कुमार गुप्ता पर आरोप था कि उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड ऋण स्वीकृत करने के लिए शिकायतकर्ता से ₹15,000 रिश्वत माँगी थी।

जाँच में पाया गया कि रवि कुमार गुप्ता ने एक निजी व्यक्ति इंद्रजीत सिंह उर्फ बाबू साहेब के माध्यम से शिकायतकर्ता से ₹10,000 की रिश्वत स्वीकार की। सीबीआई ने दोनों आरोपियों को रिश्वत लेते समय रंगे हाथ पकड़ा।

अदालत ने रवि कुमार गुप्ता और इंद्रजीत सिंह दोनों को चार-चार वर्ष के कठोर कारावास और ₹40,000-₹40,000 जुर्माने की सजा सुनाई।

सीबीआई की प्रतिक्रिया

सीबीआई ने कहा कि दोनों मामलों में जाँच के दौरान पर्याप्त साक्ष्य एकत्र किए गए, जिनके आधार पर अदालत ने तीनों दोषियों को सजा सुनाई। यह फैसला ग्रामीण बैंकिंग क्षेत्र में भ्रष्टाचार के विरुद्ध एजेंसी की कार्रवाई की एक और कड़ी है।

आम जनता और किसानों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में बिचौलियों और भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा अवरोध की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। गौरतलब है कि किसान क्रेडिट कार्ड योजना केंद्र सरकार की प्रमुख कृषि ऋण योजना है, और इसमें रिश्वतखोरी सीधे उन किसानों को प्रभावित करती है जो समय पर ऋण न मिलने से फसल चक्र में पिछड़ जाते हैं।

दोनों मामलों में सजा से यह संदेश जाता है कि लंबे समय तक चली जाँच और मुकदमे के बाद भी सीबीआई की अदालतें दोषसिद्धि सुनिश्चित कर सकती हैं। आगे इन दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी उजागर करता है कि न्याय की प्रक्रिया कितनी लंबी है — 2016 और 2018 में दर्ज मामलों में 2025 तक सजा मिलना लगभग एक दशक की देरी को दर्शाता है। किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाएँ तभी प्रभावी होती हैं जब ऋण वितरण की अंतिम कड़ी भ्रष्टाचार-मुक्त हो, और रंगे हाथ गिरफ्तारी के बावजूद इतने लंबे मुकदमे यह सवाल उठाते हैं कि क्या मौजूदा तंत्र पर्याप्त निवारक है। ग्रामीण बैंकिंग में भ्रष्टाचार की यह छिटपुट सजाएँ तब तक असरदार नहीं होंगी जब तक त्वरित न्याय और नियमित आंतरिक लेखापरीक्षा को प्राथमिकता न दी जाए।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी किसान ऋण रिश्वत मामले में किसे और कितनी सजा मिली?
सीबीआई की विशेष अदालत ने तीन दोषियों को सजा सुनाई — बड़ौदा यूपी ग्रामीण बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक राकेश चंद्र ठाकुर को पाँच वर्ष कठोर कारावास और ₹25,000 जुर्माना, जबकि पूर्वांचल बैंक के पूर्व सहायक प्रबंधक रवि कुमार गुप्ता और निजी व्यक्ति इंद्रजीत सिंह को चार-चार वर्ष कठोर कारावास और ₹40,000-₹40,000 जुर्माना।
इन मामलों में रिश्वत की माँग किस लिए की गई थी?
दोनों मामलों में किसान क्रेडिट कार्ड ऋण से संबंधित सेवाओं के लिए रिश्वत माँगी गई थी। पहले मामले में ₹4.25 लाख के ऋण की पहली किस्त जारी करने के लिए ₹6,000 और दूसरे मामले में ऋण स्वीकृत करने के लिए ₹15,000 की माँग की गई थी, जिसमें ₹10,000 वास्तव में लिए गए।
सीबीआई ने इन आरोपियों को कैसे पकड़ा?
दोनों मामलों में सीबीआई ने शिकायत मिलने के बाद जाल बिछाया और आरोपियों को रिश्वत की राशि स्वीकार करते समय रंगे हाथ गिरफ्तार किया। यह साक्ष्य अदालत में दोषसिद्धि का आधार बना।
ये मामले कब दर्ज हुए और फैसला आने में इतना समय क्यों लगा?
पहला मामला 11 अगस्त 2016 और दूसरा 12 मार्च 2018 को दर्ज हुआ था। जाँच, आरोपपत्र दाखिल करने और आरोप तय करने की प्रक्रिया में वर्षों लगे — दूसरे मामले में आरोप 21 दिसंबर 2020 को तय हुए। दोनों मामलों में अंतिम फैसला 25 अगस्त 2025 को आया।
किसान क्रेडिट कार्ड ऋण में रिश्वत से किसान कैसे प्रभावित होते हैं?
किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत किसानों को समय पर और सस्ती दर पर ऋण मिलना चाहिए, लेकिन रिश्वतखोरी से ऋण वितरण में देरी होती है और किसान फसल चक्र में पिछड़ जाते हैं। इससे सीधे उन छोटे और सीमांत किसानों को नुकसान होता है जो बुवाई या कटाई के समय नकदी की किल्लत से जूझते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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