यूपी चुनाव 2027: अमेठी की चारों विधानसभा सीटों पर सियासी संग्राम तेज, कांग्रेस-सपा-भाजपा में त्रिकोणीय जंग
सारांश
मुख्य बातें
अमेठी में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। कांग्रेस का ऐतिहासिक गढ़ माने जाने वाले इस जिले की चारों विधानसभा सीटों — तिलोई, जगदीशपुर, गौरीगंज और अमेठी — पर भारतीय जनता पार्टी (BJP), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच कड़ी टक्कर की आहट मिल रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत और विधानसभा स्तर पर बदलते समीकरणों ने इस क्षेत्र को 2027 के सबसे निर्णायक युद्धक्षेत्रों में से एक बना दिया है।
अमेठी जिले की भौगोलिक और प्रशासनिक पहचान
अमेठी जिला उत्तर प्रदेश का 72वाँ जिला है, जिसका गठन 1 जुलाई 2010 को सुल्तानपुर जिले की तहसीलों — अमेठी, गौरीगंज और मुसाफिरखाना — तथा रायबरेली की तहसील तिलोई को मिलाकर हुआ था। पूर्व में इसका नाम छत्रपति शाहू जी महाराज नगर था, जिसे बाद में बदलकर अमेठी किया गया।
यह जिला अयोध्या मंडल के अंतर्गत आता है और 26 डिग्री 9 मिनट उत्तर अक्षांश तथा 81 डिग्री 49 मिनट पूर्व देशांतर पर समुद्र तल से 101 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। जिले का कुल क्षेत्रफल 2,329.11 वर्ग किलोमीटर है और जनसंख्या 18,67,678 है।
2011 की जनगणना के अनुसार जिले की साक्षरता दर 72.16 फीसदी है — पुरुष साक्षरता 83.85 फीसदी और महिला साक्षरता 60.64 फीसदी। प्रशासनिक रूप से जिले में 1,000 ग्राम और 13 विकास खंड हैं। जिला मुख्यालय गौरीगंज रेल और सड़क मार्ग से लखनऊ, रायबरेली और प्रतापगढ़ से जुड़ा है।
चार विधानसभा सीटें और उनकी स्थिति
अमेठी लोकसभा संसदीय क्षेत्र (क्रम संख्या 37) के अंतर्गत आने वाली चार विधानसभा सीटें हैं — तिलोई (178), जगदीशपुर सुरक्षित (184), गौरीगंज (185) और अमेठी (186)।
2022 के विधानसभा चुनाव में अमेठी सदर सीट पर सपा के महाराजी प्रजापति ने भाजपा के संजय सिंह को हराया था — सपा को 88,217 वोट और भाजपा को 70,121 वोट मिले थे। तिलोई से मयंकेश्वर शरण सिंह विधायक हैं। जगदीशपुर से भाजपा के सुरेश पासी विधायक हैं।
गौरीगंज की स्थिति सबसे दिलचस्प है — सपा के राकेश प्रताप सिंह ने 2022 में यहाँ जीत दर्ज की थी, लेकिन बाद में उन्होंने सपा छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। यह दलबदल 2027 के समीकरणों को और जटिल बना देता है।
2024 लोकसभा चुनाव का असर
राष्ट्रीय स्तर पर अमेठी की पहचान बदलने वाला क्षण 2024 के लोकसभा चुनाव में आया, जब कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा ने भाजपा की स्मृति ईरानी को चुनावी शिकस्त दी। कांग्रेस को 5,39,228 वोट मिले, जबकि भाजपा को 3,72,032 वोट। यह जीत कांग्रेस के लिए एक मनोबल बढ़ाने वाला संकेत थी, जिसने 2027 की तैयारियों में नई ऊर्जा भरी है।
गौरतलब है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के मतदाता व्यवहार में अक्सर अंतर देखा जाता है। 2024 में कांग्रेस की बड़ी लोकसभा जीत के बावजूद, 2022 की विधानसभा में जिले की दो सीटें भाजपा के पास थीं — यह विरोधाभास बताता है कि जमीन पर लड़ाई अभी भी खुली है।
2027 की रणनीतिक तैयारी
यह ऐसे समय में आया है जब सभी प्रमुख दल — BJP, कांग्रेस और सपा — प्रत्येक बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने में जुटे हैं। जगदीशपुर (सुरक्षित सीट) पर दलित मतदाताओं को लेकर खींचतान और तिलोई में स्थानीय जातिगत गणित निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। गौरीगंज में राकेश प्रताप सिंह का दलबदल सपा को वहाँ नई रणनीति अपनाने पर मजबूर करेगा।
2027 तक का समय राजनीतिक दलों के लिए कार्यकर्ता संगठन, प्रत्याशी चयन और स्थानीय मुद्दों को भुनाने के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा। अमेठी की चारों सीटों पर बनने वाला सियासी गणित आने वाले महीनों में और स्पष्ट होगा।