24 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कुपोषण के खिलाफ यूपी बना देश का मॉडल, 1.56 करोड़ लाभार्थियों को मिल रहा पौष्टिक आहार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कुपोषण के खिलाफ यूपी बना देश का मॉडल, 1.56 करोड़ लाभार्थियों को मिल रहा पौष्टिक आहार

सारांश

उत्तर प्रदेश कुपोषण के खिलाफ जंग में राष्ट्रीय मॉडल बन गया है — हर माह 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पौष्टिक आहार, स्टंटिंग दर में 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट, और 4,000 महिलाओं को रोजगार। तकनीक, पारदर्शिता और महिला सशक्तीकरण का यह संगम अब दूसरे राज्यों के लिए भी मिसाल है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बना जिसने पोषण 2.0 गाइडलाइन के तहत रेसिपी-आधारित पुष्टाहार व्यवस्था बड़े पैमाने पर लागू की।
हर माह 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पौष्टिक आहार पहुँचाया जा रहा है, जिनमें शिशु, गर्भवती महिलाएँ और धात्री माताएँ शामिल हैं।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार स्टंटिंग दर 2015-16 में 39.7% से घटकर 2019-21 में 31.5% हुई।
जीपीएस ट्रैकिंग , क्यूआर कोड और ओटीपी सत्यापन से हर पैकेट की डिजिटल निगरानी सुनिश्चित की जा रही है।
4,000 से अधिक महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उत्पादन इकाइयों में रोजगार पा रही हैं।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कुपोषण के विरुद्ध चलाई जा रही मुहिम अब राष्ट्रीय स्तर पर एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभरी है। महिला एवं बाल विकास विभाग तथा बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा संचालित टेक होम राशन योजना के अंतर्गत प्रदेश में हर महीने लगभग 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पौष्टिक आहार पहुँचाया जा रहा है। पोषण, तकनीक, पारदर्शिता और महिला सशक्तीकरण को एकीकृत करने वाली यह व्यवस्था देशभर में सराहना बटोर रही है।

योजना की संरचना और लाभार्थी

योगी सरकार ने भारत सरकार की सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 गाइडलाइन तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2023 के अनुरूप रेसिपी-आधारित अनुपूरक पुष्टाहार व्यवस्था लागू की है। आँकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बना है जिसने इस प्रणाली को बड़े पैमाने पर धरातल पर उतारा है। इस योजना के दायरे में छह माह से छह वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएँ, धात्री माताएँ और अतिकुपोषित बच्चे शामिल हैं।

स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आँकड़ों के अनुसार, 2015-16 की तुलना में 2019-21 के दौरान प्रदेश में बच्चों में स्टंटिंग (नाटेपन) की दर 39.7 प्रतिशत से घटकर 31.5 प्रतिशत पर आ गई। इसके अतिरिक्त अल्पवजन और दुबलेपन की समस्याओं में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई बड़े राज्य कुपोषण के आँकड़ों में अपेक्षित गिरावट दर्ज नहीं कर पाए हैं।

विशेष पोषण उत्पाद

विभिन्न आयु वर्गों की ज़रूरतों के अनुसार विशेष पोषण उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। शिशु अमृत, शिशु आहार, बाल पुष्टिकर और संपूर्ण मातृ आहार जैसे उत्पाद बच्चों और महिलाओं को संतुलित एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा रहे हैं। इसके साथ ही बच्चों के लिए आरोग्य पोषण, बाल संजीवनी और सक्षम पोषण जैसी ऊर्जायुक्त विशेष व्यवस्थाएँ भी की गई हैं।

तकनीक से पारदर्शिता

पूरी आपूर्ति श्रृंखला को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। जीपीएस ट्रैकिंग, क्यूआर कोड और ओटीपी आधारित सत्यापन प्रणाली के माध्यम से हर पैकेट की डिजिटल निगरानी की जा रही है। इससे वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हुई है और लाभार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण पोषण सामग्री समय पर पहुँच रही है।

महिला सशक्तीकरण और रोजगार

बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन की निदेशक हर्षिता माथुर ने कहा कि टेक होम राशन के उत्पादन और आपूर्ति की जिम्मेदारी मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों को सौंपी गई है। वर्तमान में प्रदेश की 4,000 से अधिक महिलाएँ इन उत्पादन इकाइयों से जुड़कर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त कर रही हैं। गौरतलब है कि इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है। आने वाले समय में इस मॉडल को और अधिक ज़िलों में विस्तार देने की योजना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये आँकड़े 2019-21 के हैं — यानी मौजूदा योजना के पूर्ण क्रियान्वयन से पहले के। असली परीक्षा तब होगी जब अगले राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आँकड़े सामने आएँगे। इसके अलावा, 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पहुँच का दावा तब और विश्वसनीय बनेगा जब स्वतंत्र तृतीय-पक्ष सत्यापन उपलब्ध हो। महिला स्वयं सहायता समूहों को उत्पादन की जिम्मेदारी देना एक सराहनीय कदम है, परंतु गुणवत्ता नियंत्रण और नियमित ऑडिट की व्यवस्था कितनी मजबूत है, यह सार्वजनिक दायरे में आना चाहिए।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश की टेक होम राशन योजना क्या है?
यह योगी सरकार द्वारा पोषण 2.0 गाइडलाइन के तहत चलाई जा रही योजना है, जिसमें हर माह 1.56 करोड़ लाभार्थियों — शिशुओं, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं — को घर पर पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाता है। उत्तर प्रदेश इस प्रणाली को बड़े पैमाने पर लागू करने वाला देश का पहला राज्य है।
यूपी में बच्चों की स्टंटिंग दर में कितना सुधार हुआ है?
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, 2015-16 में 39.7% रही स्टंटिंग दर 2019-21 में घटकर 31.5% हो गई। अल्पवजन और दुबलेपन की समस्याओं में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
इस योजना में तकनीक का उपयोग कैसे होता है?
पूरी आपूर्ति श्रृंखला में जीपीएस ट्रैकिंग, क्यूआर कोड और ओटीपी-आधारित सत्यापन प्रणाली लागू की गई है, जिससे हर पैकेट की डिजिटल निगरानी होती है। इससे वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
इस योजना से महिलाओं को क्या लाभ मिल रहा है?
टेक होम राशन के उत्पादन और आपूर्ति की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों को दी गई है। वर्तमान में 4,000 से अधिक महिलाएँ इन इकाइयों से जुड़कर रोजगार प्राप्त कर रही हैं।
इस योजना के तहत कौन-से पोषण उत्पाद बनाए जाते हैं?
योजना के अंतर्गत शिशु अमृत, शिशु आहार, बाल पुष्टिकर, संपूर्ण मातृ आहार, आरोग्य पोषण, बाल संजीवनी और सक्षम पोषण जैसे विशेष उत्पाद तैयार किए जाते हैं। ये उत्पाद विभिन्न आयु वर्गों और पोषण आवश्यकताओं के अनुसार अलग-अलग तैयार किए जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले