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योगी सरकार की हॉट कुक्ड मील योजना: उत्तर प्रदेश के 32.88 लाख बच्चों को मिल रहा गर्म पौष्टिक भोजन

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योगी सरकार की हॉट कुक्ड मील योजना: उत्तर प्रदेश के 32.88 लाख बच्चों को मिल रहा गर्म पौष्टिक भोजन

सारांश

उत्तर प्रदेश की हॉट कुक्ड मील योजना सिर्फ भोजन परोसने की योजना नहीं — यह 32.88 लाख बच्चों की पोषण आदतें बदलने की कोशिश है। 1.89 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों पर गुणवत्ता जाँच और साप्ताहिक मेन्यू के साथ यह योजना बाल कुपोषण से लड़ाई में राज्य का सबसे बड़ा ज़मीनी दांव है।

मुख्य बातें

32.88 लाख बच्चों को उत्तर प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों पर हॉट कुक्ड मील योजना का लाभ मिल रहा है।
योजना 1.45 लाख को-लोकेटेड और 0.44 लाख नॉन-को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों पर संचालित है।
प्रत्येक बच्चे के लिए प्रतिदिन 70 ग्राम खाद्यान्न से ताजा और गर्म भोजन तैयार किया जाता है।
भोजन परोसने से पहले कम से कम दो वयस्क रोस्टर के आधार पर गुणवत्ता और स्वाद की जाँच करते हैं।
अपर मुख्य सचिव लीना जौहरी ने स्वच्छता और सुरक्षित भोजन वितरण पर विशेष जोर देने की पुष्टि की।

उत्तर प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों पर 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों की थाली अब केवल सूखे राशन तक सीमित नहीं रही। सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण-2.0 की दिशा-निर्देशों के अंतर्गत संचालित हॉट कुक्ड मील योजना के माध्यम से प्रदेश के लगभग 32.88 लाख बच्चों को प्रतिदिन ताजा, गर्म और पोषण से भरपूर भोजन परोसा जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में चलाई जा रही इस व्यवस्था ने प्रदेश में बाल पोषण की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है।

योजना का दायरा और लाभार्थी

प्रदेश में 1.45 लाख को-लोकेटेड और 0.44 लाख नॉन-को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों पर यह योजना सक्रिय है। प्रत्येक लाभार्थी बच्चे के लिए प्रतिदिन 70 ग्राम खाद्यान्न से भोजन तैयार किया जाता है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा निर्धारित साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार बच्चों को अलग-अलग दिन रोटी-सब्जी, चावल-दाल और मौसमी सब्जियों से तैयार तहरी सहित विविध पौष्टिक भोजन दिया जाता है। गौरतलब है कि इस पहल का उद्देश्य न केवल तात्कालिक पोषण सुनिश्चित करना है, बल्कि बच्चों में कम उम्र से ही संतुलित आहार की आदत विकसित करना भी है।

गुणवत्ता और स्वच्छता की व्यवस्था

योजना के तहत भोजन परोसने से पहले गुणवत्ता और स्वच्छता की जाँच अनिवार्य की गई है। कोटेदार से प्राप्त होने वाला खाद्यान्न उत्तम गुणवत्ता का होना आवश्यक है। भोजन बनाने से पूर्व अनाज की अच्छी तरह सफाई की जाती है और हरी सब्जियों को दो से तीन बार पानी से धोया जाता है। इसके अतिरिक्त, भोजन परोसने से पहले रोस्टर के आधार पर कम से कम दो वयस्क — जैसे शिक्षक, रसोइया या माता समिति के सदस्य — भोजन के स्वाद और गुणवत्ता की जाँच करते हैं।

को-लोकेटेड और नॉन-को-लोकेटेड केंद्रों की व्यवस्था

को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों पर भोजन प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संचालित पीएम पोषण योजना की रसोई एवं संसाधनों का उपयोग कर तैयार किया जाता है। वहीं, नॉन-को-लोकेटेड केंद्रों पर स्थानीय निकायों अथवा ग्राम पंचायतों द्वारा उपलब्ध कराए गए बर्तनों, गैस चूल्हे आदि की सहायता से भोजन बनाया जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में बाल कुपोषण से निपटने के लिए विभिन्न राज्य अपने-अपने मॉडल आज़मा रहे हैं।

अधिकारियों का बयान

अपर मुख्य सचिव (महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग) लीना जौहरी ने बताया कि हॉट कुक्ड मील योजना के तहत नियमित रूप से करीब 32.88 लाख बच्चों को गर्म और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था में भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और बच्चों तक सुरक्षित तरीके से भोजन पहुँचाने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

आगे की राह

इस योजना की नियमित निगरानी और मेन्यू की विविधता इसे अन्य राज्यों की समान पहलों से अलग बनाती है। बाल पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, गर्म भोजन की उपलब्धता आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने में भी सहायक होती है। आने वाले समय में इस योजना के विस्तार और डिजिटल निगरानी तंत्र के जुड़ने से इसकी पहुँच और प्रभावशीलता और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी ज़मीनी क्रियान्वयन है — विशेषकर 0.44 लाख नॉन-को-लोकेटेड केंद्रों पर जहाँ बुनियादी ढाँचा पीएम पोषण की रसोई जैसा नहीं है। रोस्टर-आधारित गुणवत्ता जाँच की व्यवस्था सराहनीय है, परंतु इसकी नियमितता और जवाबदेही का कोई स्वतंत्र सत्यापन तंत्र अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। बाल कुपोषण के आँकड़े राज्य में अभी भी चिंताजनक हैं — इसलिए यह देखना ज़रूरी होगा कि क्या यह योजना केवल उपस्थिति बढ़ाती है या पोषण संकेतकों में वास्तविक सुधार भी लाती है।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हॉट कुक्ड मील योजना क्या है और यह उत्तर प्रदेश में कैसे काम करती है?
हॉट कुक्ड मील योजना सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण-2.0 की गाइडलाइन के तहत संचालित एक पोषण कार्यक्रम है, जिसके अंतर्गत 3 से 6 वर्ष के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रतिदिन ताजा और गर्म भोजन दिया जाता है। उत्तर प्रदेश में यह 1.89 लाख से अधिक केंद्रों पर लागू है।
उत्तर प्रदेश में कितने बच्चे इस योजना का लाभ उठा रहे हैं?
उत्तर प्रदेश में लगभग 32.88 लाख बच्चे हॉट कुक्ड मील योजना का लाभ ले रहे हैं। ये बच्चे 1.45 लाख को-लोकेटेड और 0.44 लाख नॉन-को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत हैं।
बच्चों को प्रतिदिन किस तरह का भोजन दिया जाता है?
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार बच्चों को रोटी-सब्जी, चावल-दाल और मौसमी सब्जियों की तहरी सहित विविध पौष्टिक भोजन दिया जाता है। प्रत्येक बच्चे के लिए प्रतिदिन 70 ग्राम खाद्यान्न से भोजन तैयार किया जाता है।
भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता कैसे सुनिश्चित की जाती है?
भोजन परोसने से पहले रोस्टर के आधार पर कम से कम दो वयस्क — शिक्षक, रसोइया या माता समिति के सदस्य — स्वाद और गुणवत्ता की जाँच करते हैं। इसके अलावा, हरी सब्जियों को दो से तीन बार पानी से धोने और अनाज की सफाई की व्यवस्था अनिवार्य है।
को-लोकेटेड और नॉन-को-लोकेटेड केंद्रों में भोजन तैयार करने की व्यवस्था में क्या अंतर है?
को-लोकेटेड केंद्रों पर पीएम पोषण योजना की रसोई और संसाधनों का उपयोग किया जाता है, जबकि नॉन-को-लोकेटेड केंद्रों पर स्थानीय निकायों या ग्राम पंचायतों द्वारा उपलब्ध कराए गए बर्तन और गैस चूल्हे की मदद से भोजन तैयार होता है।
राष्ट्र प्रेस
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