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पीएम पोषण योजना: यूपी के सरकारी स्कूलों में कक्षा 1-8 के बच्चों को रोज़ 700 कैलोरी, कुपोषण पर योगी सरकार का सीधा प्रहार

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पीएम पोषण योजना: यूपी के सरकारी स्कूलों में कक्षा 1-8 के बच्चों को रोज़ 700 कैलोरी, कुपोषण पर योगी सरकार का सीधा प्रहार

सारांश

यूपी के सरकारी स्कूलों में पीएम पोषण योजना अब सिर्फ थाली भरने का कार्यक्रम नहीं — यह कुपोषण के खिलाफ योगी सरकार की नीतिगत लड़ाई है। प्राथमिक स्तर पर 450 और उच्च प्राथमिक स्तर पर 700 कैलोरी के मानक के साथ, लाखों बच्चों की उपस्थिति और शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार दर्ज किया जा रहा है।

मुख्य बातें

पीएम पोषण योजना के तहत उत्तर प्रदेश के राजकीय, परिषदीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक के लाखों बच्चों को प्रतिदिन पोषणयुक्त भोजन दिया जा रहा है।
प्राथमिक स्तर के बच्चों को न्यूनतम 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन प्रतिदिन सुनिश्चित किया जा रहा है।
उच्च प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए यह मानक 700 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन प्रतिदिन निर्धारित है।
साप्ताहिक मेन्यू में दाल, हरी सब्जियाँ, सोयाबीन, दूध और मौसमी फल शामिल हैं।
बेहतर पोषण से बच्चों की विद्यालय उपस्थिति और शैक्षणिक प्रदर्शन में सकारात्मक सुधार देखा जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पीएम पोषण योजना के ज़रिए राजकीय, परिषदीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ने वाले लाखों बच्चों को प्रतिदिन संतुलित और पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध करा रही है। 2 जून 2026 को जारी सरकारी जानकारी के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य महज़ मध्याह्न भोजन परोसना नहीं, बल्कि बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास को पोषण की बुनियाद पर खड़ा करना है।

पोषण मानक: कितनी कैलोरी, कितना प्रोटीन

एक अधिकारी ने बताया कि प्राथमिक स्तर (कक्षा 1-5) के बच्चों को प्रतिदिन न्यूनतम 450 कैलोरी ऊर्जा और 12 ग्राम प्रोटीन सुनिश्चित किया जा रहा है। वहीं उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6-8) के विद्यार्थियों के लिए यह मानक 700 कैलोरी ऊर्जा और 20 ग्राम प्रोटीन प्रतिदिन निर्धारित है। ये मानक बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता, मानसिक एकाग्रता और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक बताए जा रहे हैं।

थाली में क्या-क्या: विविध और मौसमी खाद्य पदार्थ

सरकार ने भोजन को अधिक संतुलित बनाने के लिए साप्ताहिक विविधता का मॉडल अपनाया है। सप्ताह के अलग-अलग दिनों में बच्चों को दाल, हरी सब्जियाँ, सोयाबीन युक्त भोजन, दूध और मौसमी फल परोसे जा रहे हैं। इस व्यवस्था से बच्चों को कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन, आयरन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व नियमित रूप से मिल रहे हैं।

शैक्षणिक प्रदर्शन पर असर

अधिकारियों के अनुसार, बेहतर पोषण उपलब्ध होने से विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति और शैक्षणिक प्रदर्शन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। गौरतलब है कि पोषण और शिक्षा की गुणवत्ता के बीच सीधा संबंध शोध में भी स्थापित किया जा चुका है — भूखे या कुपोषित बच्चे की सीखने की क्षमता सीमित हो जाती है।

कुपोषण उन्मूलन की दिशा में बड़ा कदम

उत्तर प्रदेश ऐतिहासिक रूप से देश के उन राज्यों में रहा है जहाँ बाल कुपोषण की दर चिंताजनक रही है। इस पृष्ठभूमि में योगी सरकार द्वारा पीएम पोषण योजना को केवल भोजन वितरण से आगे ले जाकर स्वास्थ्य संवर्धन का माध्यम बनाना एक नीतिगत बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का कहना है कि विकसित और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की नींव स्वस्थ, शिक्षित और सक्षम बच्चों पर ही टिकी है।

आगे की राह

योगी सरकार का लक्ष्य कुपोषण मुक्त उत्तर प्रदेश के संकल्प को ज़मीन पर उतारना है। शिक्षा और पोषण को एक साथ जोड़ने की यह रणनीति आने वाले वर्षों में प्रदेश के मानव संसाधन विकास की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन की एकरूपता का है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में जहाँ लाखों स्कूल दूरदराज़ के इलाकों में हैं, वहाँ हर थाली में तय पोषण पहुँचाना कागज़ी मानकों से कहीं कठिन है। सरकारी दावों को तब विश्वसनीयता मिलेगी जब स्वतंत्र तृतीय-पक्ष ऑडिट और ज़िला-स्तरीय कुपोषण डेटा सार्वजनिक किए जाएँ। शिक्षा और पोषण को जोड़ने की सोच सही दिशा में है, पर पारदर्शी निगरानी तंत्र के बिना यह अभियान आँकड़ों की लड़ाई बनकर रह सकता है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम पोषण योजना उत्तर प्रदेश में कैसे काम करती है?
पीएम पोषण योजना के तहत यूपी के राजकीय, परिषदीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को प्रतिदिन संतुलित और पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराया जाता है। यह योजना केंद्र सरकार की मध्याह्न भोजन कार्यक्रम की उत्तराधिकारी है और राज्य सरकार इसे स्वास्थ्य संवर्धन के व्यापक उद्देश्य से संचालित कर रही है।
यूपी के सरकारी स्कूलों में बच्चों को कितनी कैलोरी और प्रोटीन मिलता है?
अधिकारियों के अनुसार, प्राथमिक स्तर (कक्षा 1-5) के बच्चों को प्रतिदिन न्यूनतम 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन दिया जाता है। उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6-8) के विद्यार्थियों के लिए यह मानक 700 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन प्रतिदिन निर्धारित है।
स्कूलों में बच्चों की थाली में कौन-से खाद्य पदार्थ शामिल हैं?
सप्ताह के अलग-अलग दिनों में बच्चों को दाल, हरी सब्जियाँ, सोयाबीन युक्त भोजन, दूध और मौसमी फल उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे बच्चों को कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन, आयरन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व नियमित रूप से प्राप्त होते हैं।
पीएम पोषण योजना से बच्चों की पढ़ाई पर क्या असर पड़ रहा है?
अधिकारियों के अनुसार, बेहतर पोषण मिलने से बच्चों की विद्यालय उपस्थिति और शैक्षणिक प्रदर्शन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। पोषण से बच्चों की सीखने की क्षमता, मानसिक एकाग्रता और रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी सुधार बताया जा रहा है।
योगी सरकार का कुपोषण मुक्त उत्तर प्रदेश का लक्ष्य क्या है?
योगी सरकार का लक्ष्य पीएम पोषण योजना को महज़ भोजन वितरण कार्यक्रम से आगे ले जाकर कुपोषण उन्मूलन का प्रभावी माध्यम बनाना है। शिक्षा और पोषण को एक साथ जोड़कर सरकार स्वस्थ, सक्षम और आत्मविश्वासी नई पीढ़ी तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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