अमेरिकन्स फर्स्ट इमिग्रेशन एक्ट: ग्रीन कार्ड सिस्टम बदलेगा, लाखों भारतीय प्रोफेशनल्स पर बड़ा खतरा
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सीनेट में 25 सितंबर 2026 को अलबामा के रिपब्लिकन सीनेटर टॉमी टबरविले ने 'अमेरिकन्स फर्स्ट इमिग्रेशन एक्ट' पेश किया, जो रोज़गार-आधारित ग्रीन कार्ड की मौजूदा श्रेणी-व्यवस्था को समाप्त कर उसकी जगह पॉइंट्स-बेस्ड सिस्टम लाने का प्रस्ताव करता है। यह बिल अगर कानून बनता है, तो अमेरिका में वर्षों से ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा में खड़े हज़ारों भारतीय प्रोफेशनल्स की पहले से मंजूर याचिकाएं भी अमान्य हो सकती हैं।
बिल का मुख्य प्रस्ताव क्या है
बिल के पूरे पाठ के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने के बाद रोज़गार-आधारित ग्रीन कार्ड के लिए पहले से लंबित कई याचिकाएं 'खारिज, नामंजूर या अमान्य' की जा सकती हैं। जिनकी याचिकाएं नई व्यवस्था लागू होने की तिथि से पहले मंजूर हो चुकी होंगी, उन्हें मौजूदा श्रेणी के तहत तब तक वीज़ा मिल सकेगा, जब तक उस वित्त वर्ष का सालाना वीज़ा कोटा समाप्त नहीं हो जाता — उसके बाद उस श्रेणी में कोई नया वीज़ा जारी नहीं किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत पूरी दुनिया के लिए प्रतिवर्ष 1,92,000 पॉइंट्स-बेस्ड इमिग्रेंट वीज़ा देने का प्रावधान होगा। हालांकि, यह संख्या पिछले वित्त वर्ष में उन प्रवासियों की संख्या के आधार पर और घटाई जा सकती है जिन्हें हिरासत में नहीं लिया गया था या अनिवार्य हिरासत से छोड़ा गया था।
पात्रता की शर्तें और पॉइंट्स सिस्टम
बिल के अनुसार, आवेदक के पास अमेरिका में वास्तविक और पक्की नौकरी का ऑफर होना अनिवार्य होगा और उसे न्यूनतम 16 पॉइंट्स हासिल करने होंगे। आवेदक की आयु 18 से 51 वर्ष के बीच होनी चाहिए और अंग्रेज़ी भाषा परीक्षा में पाँचवें डेसाइल या उससे ऊपर का स्कोर आवश्यक होगा।
वेतन, शैक्षणिक योग्यता, अंग्रेज़ी दक्षता, सैन्य सेवा और असाधारण उपलब्धि के आधार पर पॉइंट्स दिए जाएंगे — और सर्वाधिक स्कोर वाले आवेदकों को प्राथमिकता मिलेगी। जिनके पास योग्य अमेरिकी डिग्री नहीं है, उनके लिए नौकरी का वेतन संबंधित राज्य की मीडियन सैलरी का कम से कम 200 प्रतिशत होना ज़रूरी होगा। योग्य अमेरिकी डिग्रीधारकों के लिए यह सीमा 150 प्रतिशत निर्धारित की गई है।
भारतीय प्रोफेशनल्स पर सीधा असर
यह प्रावधान विशेष रूप से भारतीय आवेदकों के लिए गंभीर है, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीयों की रोज़गार-आधारित याचिकाएं पहले से मंजूर हो चुकी हैं लेकिन वे ग्रीन कार्ड के लंबे बैकलॉग के कारण वर्षों — कुछ मामलों में दशकों — से अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं।
गौरतलब है कि भारत के लिए रोज़गार-आधारित ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा-अवधि अन्य देशों की तुलना में कहीं अधिक लंबी रही है, और यह बिल उस पूरी प्रतीक्षा-कतार को पुनर्गठित — या शून्य — कर सकता है।
अन्य प्रमुख प्रावधान
बिल में 'डाइवर्सिटी वीज़ा लॉटरी' को पूरी तरह समाप्त करने का प्रस्ताव है। परिवार-आधारित ग्रीन कार्ड को सीमित कर मुख्यतः पति या पत्नी और नाबालिग बच्चों तक रखने का प्रावधान है — अमेरिकी नागरिकों के माता-पिता, भाई-बहनों और वयस्क बच्चों के लिए मौजूदा रास्ते बंद हो जाएंगे।
कंपनियों के लिए नियम यह होगा कि किसी विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से पहले अमेरिकी उम्मीदवारों की भर्ती का प्रयास अनिवार्य होगा। यदि कोई अमेरिकी उम्मीदवार विदेशी उम्मीदवार के बराबर या अधिक योग्य है, तो कंपनी को पहले उसे नौकरी का प्रस्ताव देना होगा। इसके अलावा, दस्तावेज दाखिल करने से 90 दिन पहले तक उसी पद पर कार्यरत कर्मचारियों की छंटनी पर रोक रहेगी।
पॉइंट्स-बेस्ड ग्रीन कार्ड शुरुआत में दो वर्ष की शर्तों के साथ दिया जाएगा। यदि मुख्य आवेदक सरकारी कल्याण सहायता लेता है, किसी विशेष अपराध में दोषी ठहरता है या ज़रूरी नौकरी बनाए रखने में असफल रहता है, तो उसके साथ-साथ उसके जीवनसाथी और बच्चों का स्टेटस भी समाप्त किया जा सकता है।
शिक्षा के क्षेत्र में बिल यह प्रावधान करता है कि जो प्रवासी अमेरिका के स्थायी निवासी नहीं हैं, उन्हें अमेरिकी कॉलेजों में कम से कम उतनी ट्यूशन फीस देनी होगी जितनी उस राज्य से बाहर के अमेरिकी छात्रों से ली जाती है। इस नियम का उल्लंघन करने वाले संस्थान पाँच वर्ष तक अंतरराष्ट्रीय छात्रों को दाखिला देने का अधिकार खो सकते हैं।
सीनेटर टबरविले का तर्क
सीनेटर टबरविले ने बिल पेश करते हुए कहा कि मौजूदा इमिग्रेशन व्यवस्था इस बात का सही आकलन नहीं करती कि किस तरह के लोगों को देश में आने दिया जा रहा है और यह 'लगभग सभी के लिए खुली व्यवस्था' बन गई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका आना एक विशेष अवसर है और यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि हर आने वाला व्यक्ति कानूनों का पालन करे और समाज में योगदान देने के लिए तैयार हो।
यह बिल ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में इमिग्रेशन नीतियों पर राजनीतिक बहस चरम पर है और H-1B वीज़ा तथा ग्रीन कार्ड बैकलॉग पर कई विधायी प्रयास पहले भी विफल हो चुके हैं। आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह बिल सीनेट में कितना समर्थन जुटा पाता है और भारतीय-अमेरिकी समुदाय एवं टेक उद्योग इसके विरोध में किस तरह सक्रिय होते हैं।