9 अगस्त 2026
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हरिद्वार भूमि खरीद घोटाला: धामी सरकार ने पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी को बर्खास्त किया, DM पर बड़ी शास्ति

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हरिद्वार भूमि खरीद घोटाला: धामी सरकार ने पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी को बर्खास्त किया, DM पर बड़ी शास्ति

सारांश

हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद घोटाले में धामी सरकार ने तीन अधिकारियों पर एक साथ कार्रवाई की — पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी बर्खास्त, तत्कालीन DM कर्मेंद्र सिंह पर मेजर पनिशमेंट, और SDM अजयवीर सिंह की तीन वेतनवृद्धियाँ रोकी गईं। राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ यह अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई मानी जा रही है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद घोटाले में 19 जून 2026 को कड़ी कार्रवाई की।
तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की गई।
तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह पर गंभीर लापरवाही के लिए दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) अधिरोपित करने का निर्णय।
तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह की तीन वेतनवृद्धियाँ रोकी गईं और परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने के निर्देश।
तीनों अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को भेजी जा रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद घोटाले में 19 जून 2026 को कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की है। इसके साथ ही तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह पर दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।

मुख्य कार्रवाई का विवरण

राज्य सरकार ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध अलग-अलग स्तरों पर दंडात्मक कदम उठाए हैं। तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को भेजी जा रही है। तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह को पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उन पर मेजर पनिशमेंट लगाने का निर्णय लिया गया है।

इसके अतिरिक्त, उस अवधि में कार्यरत तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के विरुद्ध परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने तथा उनकी तीन वेतनवृद्धियाँ रोकने के निर्देश दिए गए हैं। तीनों अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है।

घोटाले की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि जैसे ही हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण सामने आया, मुख्यमंत्री धामी ने तत्काल सख्त रुख अपनाया था। प्रारंभिक जाँच में अनियमितताओं के संकेत मिलते ही तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी सहित कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद विशेष जाँच और ऑडिट के माध्यम से पूरे प्रकरण की गहन पड़ताल कराई गई, जिसके निष्कर्षों के आधार पर यह अंतिम कार्रवाई की गई है।

मुख्यमंत्री का रुख

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वोपरि हैं तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी।

आम जनता और प्रशासन पर असर

धामी सरकार की इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के विरुद्ध अब तक की सबसे कड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आई है जब उत्तराखंड में नगर निकायों की भूमि-संबंधी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। इस कदम से राज्य के अन्य अधिकारियों को भी स्पष्ट संदेश मिला है कि जनधन और सार्वजनिक संपत्ति के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

आगे कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद बर्खास्तगी और दीर्घ शास्ति के आदेश प्रभावी होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि बर्खास्तगी और दीर्घ शास्ति की संस्तुतियाँ कार्मिक विभाग से गुजरकर कितनी तेज़ी से अंतिम आदेश बनती हैं। उत्तराखंड में नगर निकायों की भूमि-खरीद प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के मामले नए नहीं हैं, और पिछले कई वर्षों में निलंबन के बाद अधिकारियों की बहाली के उदाहरण भी सामने आते रहे हैं। जब तक आपराधिक मुकदमा दर्ज होकर न्यायालय तक न पहुँचे, केवल विभागीय दंड से जवाबदेही की पूरी तस्वीर नहीं बनती। 'जीरो टॉलरेंस' की नीति की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह कार्रवाई चुनावी चक्र से परे भी उतनी ही दृढ़ रहती है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद घोटाला क्या है?
यह हरिद्वार नगर निगम द्वारा की गई भूमि खरीद में कथित अनियमितताओं का मामला है, जिसमें प्रारंभिक जाँच में गड़बड़ियों के संकेत मिले थे। इसके बाद विशेष जाँच और ऑडिट कराया गया, जिसके निष्कर्षों के आधार पर अब तीन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है।
वरुण चौधरी के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है?
तत्कालीन नगर आयुक्त हरिद्वार वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की गई है। यह संस्तुति कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को भेजी जा रही है, जिसके बाद औपचारिक आदेश जारी होंगे।
तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह पर क्या दंड लगाया गया?
तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह को पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उन पर दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है। उनके विरुद्ध भी कार्मिक विभाग को संस्तुति भेजी जा रही है।
एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ क्या कदम उठाए गए?
तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के विरुद्ध परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने तथा उनकी तीन वेतनवृद्धियाँ रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
धामी सरकार ने इस मामले में पहले क्या कदम उठाए थे?
जब यह मामला सामने आया था, तब मुख्यमंत्री धामी ने तत्काल सख्त रुख अपनाते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी और पूर्व नगर आयुक्त सहित कई अधिकारियों को निलंबित किया था। इसके बाद विशेष जाँच और ऑडिट के माध्यम से पूरे प्रकरण की गहन पड़ताल कराई गई, जिसके निष्कर्षों के आधार पर अब अंतिम कार्रवाई की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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