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उत्तराखंड मदरसा अनुदान बंद पर पुनर्विचार हो, राम मंदिर चढ़ावा मामले में CBI-न्यायिक जांच हो: सीमा मलिक

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उत्तराखंड मदरसा अनुदान बंद पर पुनर्विचार हो, राम मंदिर चढ़ावा मामले में CBI-न्यायिक जांच हो: सीमा मलिक

सारांश

NCP (शरद पवार गुट) नेता सीमा मलिक ने एक साथ कई मोर्चों पर सरकार को घेरा — उत्तराखंड मदरसा अनुदान बंद को संविधान-विरोधी बताया, राम मंदिर चढ़ावा मामले में सुप्रीम कोर्ट निगरानी में CBI जांच की मांग की, और वियतनाम हादसे में 15 भारतीयों की मौत पर शोक जताया।

मुख्य बातें

सीमा मलिक (NCP, शरद पवार गुट) ने 11 जुलाई को कई राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्र सरकार से सवाल किए।
उत्तराखंड सरकार के मदरसा अनुदान बंद करने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग; संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 का हवाला दिया।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद में सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में CBI और न्यायिक जांच की मांग।
वियतनाम नाव हादसे में 15 भारतीयों की मौत पर शोक; जांच के बाद कारण स्पष्ट होने की उम्मीद।
असम बहुविवाह नीति पर कहा — बुराई का विरोध, लेकिन एकतरफा कार्रवाई उचित नहीं।
आतंकवाद पर PM मोदी के न्यूजीलैंड बयान का समर्थन; राष्ट्रीय सुरक्षा पर दलगत राजनीति से ऊपर उठने की अपील।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की नेता सीमा मलिक ने 11 जुलाई को कई राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी — जिसमें उत्तराखंड सरकार का मदरसा अनुदान समाप्त करने का निर्णय, अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद, वियतनाम नाव हादसा, असम की बहुविवाह नीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का न्यूजीलैंड दौरा शामिल रहे। उन्होंने केंद्र और भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर कई तीखे सवाल उठाए।

वियतनाम नाव हादसे पर संवेदना

वियतनाम में भारतीय पर्यटकों को ले जा रही नाव के पलटने से 15 भारतीयों की मौत पर मलिक ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जो लोग अपने परिजनों के साथ पर्यटन पर गए थे, उनके साथ ऐसी त्रासदी अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने बचाव अभियान के सफल होने की उम्मीद जताई और कहा कि हादसे के कारणों की पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी।

उत्तराखंड मदरसा अनुदान: संविधान का हवाला

उत्तराखंड कैबिनेट द्वारा मदरसों को सरकारी अनुदान बंद करने के फैसले पर मलिक ने कहा कि सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 का हवाला देते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों को अपने शैक्षणिक संस्थान स्थापित और संचालित करने का संवैधानिक अधिकार है।

उनके अनुसार, इस फैसले का सबसे अधिक असर गरीब बच्चों की शिक्षा पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में अल्पसंख्यक समुदाय को मुख्यधारा में लाना चाहती है तो शिक्षा के अवसर बढ़ाने चाहिए, न कि सीमित करने चाहिए। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के फैसले समाज में ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा देते हैं।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद: CBI और न्यायिक जांच की मांग

अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में मलिक ने कहा कि यह घटना करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट है। मंदिर के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी द्वारा इसे कलंक बताए जाने के बाद उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोषाध्यक्ष स्वयं वित्तीय प्रक्रियाओं से अनभिज्ञ थे, तो उनकी जिम्मेदारी क्या थी।

मलिक ने मांग की कि इस मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त या वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक और CBI जांच के माध्यम से होनी चाहिए। उनके अनुसार, केवल कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी और कुछ लोगों के इस्तीफे से पूरे मामले का सच सामने नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि SIT जांच को लेकर लोगों में संतोष नहीं है और नई जांच समिति की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

असम बहुविवाह नीति और मौलाना के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया

असम सरकार द्वारा बहुविवाह करने वालों को सरकारी सुविधाओं से वंचित करने के फैसले पर मलिक ने कहा कि बहुविवाह जैसी सामाजिक बुराई का समर्थन कोई नहीं करता, लेकिन किसी एक समुदाय को निशाना बनाकर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में किसी भी कुप्रथा को सभी समुदायों के संदर्भ में समान दृष्टि से देखा जाना चाहिए।

मौलाना साजिद रशदी के उस विवादित बयान पर — जिसमें देर से विवाह को दुष्कर्म की घटनाओं से जोड़ा गया था — मलिक ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह गलत और गैर-जिम्मेदाराना बयान है। उनके अनुसार, लड़कियों की शादी तभी होनी चाहिए जब वे शिक्षित, परिपक्व और अपने निर्णय लेने में सक्षम हों।

आतंकवाद पर मोदी के न्यूजीलैंड बयान का समर्थन

प्रधानमंत्री मोदी के न्यूजीलैंड दौरे के दौरान आतंकवाद के विरुद्ध दोनों देशों के मिलकर काम करने के बयान पर मलिक ने समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सभी दलों को सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए और किसी भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग का स्वागत किया जाना चाहिए। यह बयान इस बात का संकेत है कि विपक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार के साथ एकजुट रहने को तैयार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रश्न है। उत्तराखंड मदरसा फैसले पर संवैधानिक तर्क सही दिशा में है, लेकिन विपक्ष को यह भी स्पष्ट करना होगा कि वह मदरसा शिक्षा सुधार के साथ-साथ अनुदान की जवाबदेही पर क्या रुख रखता है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीमा मलिक ने उत्तराखंड मदरसा अनुदान बंद पर क्या कहा?
सीमा मलिक ने उत्तराखंड सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 का हवाला देते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों को अपने शैक्षणिक संस्थान संचालित करने का अधिकार है और इस फैसले से गरीब बच्चों की शिक्षा सबसे अधिक प्रभावित होगी।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद में सीमा मलिक ने किस जांच की मांग की?
सीमा मलिक ने मांग की कि इस मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त या वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक और CBI जांच के जरिए हो। उनके अनुसार SIT जांच से जनता संतुष्ट नहीं है और केवल कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी से पूरा सच सामने नहीं आएगा।
वियतनाम नाव हादसे पर NCP नेता का क्या रुख रहा?
सीमा मलिक ने वियतनाम में 15 भारतीय पर्यटकों की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने बचाव अभियान के सफल होने की उम्मीद जताते हुए कहा कि हादसे के कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।
असम की बहुविवाह नीति पर सीमा मलिक का क्या कहना है?
मलिक ने कहा कि बहुविवाह जैसी सामाजिक बुराई का कोई समर्थन नहीं करता, लेकिन किसी एक समुदाय को निशाना बनाकर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुधार के प्रयास सभी समुदायों के लिए समान रूप से और बिना भेदभाव के होने चाहिए।
PM मोदी के न्यूजीलैंड दौरे पर विपक्ष का क्या रुख रहा?
सीमा मलिक ने आतंकवाद के विरुद्ध भारत-न्यूजीलैंड सहयोग के PM मोदी के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर सभी दलों को राजनीतिक मतभेद भुलाकर सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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