वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाला: विजयेंद्र का कर्नाटक सरकार पर हमला, नागेंद्र के इस्तीफे की अटकलें तेज़
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की अटकलें बुधवार, 26 अगस्त को और तेज़ हो गईं, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने बेंगलुरु में पार्टी मुख्यालय से राज्य की कांग्रेस सरकार पर कड़े हमले बोले। विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं के पीछे केवल नागेंद्र नहीं, बल्कि 'बड़ी मछलियाँ और व्हेल' — यानी बड़े रसूखदार लोग — शामिल हैं।
मुख्य घटनाक्रम
बेंगलुरु स्थित BJP राज्य मुख्यालय 'जगन्नाथ भवन' में पत्रकारों से बात करते हुए विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को सीधी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि जाँच में नागेंद्र निर्दोष साबित होते हैं, तो उन्हें मुख्यमंत्री पद दिया जाए। विजयेंद्र ने यह भी आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट में नागेंद्र का नाम शामिल था।
विजयेंद्र ने कॉर्पोरेशन से जुड़े अधिकारी पी. चंद्रशेखर की मौत का भी उल्लेख किया, जिन्होंने शिवमोगा में आत्महत्या की थी। उनके अनुसार, चंद्रशेखर के सुसाइड नोट में कथित तौर पर उल्लेख था कि तत्कालीन प्रभारी मंत्री नागेंद्र के मौखिक निर्देशों पर तेलंगाना में फंड ट्रांसफर किया गया था। ये आरोप अभी जाँच के दायरे में हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
विजयेंद्र के प्रमुख आरोप
विजयेंद्र ने BJP की ओर से साफ़ कहा, 'कांग्रेस नेताओं ने दलितों के विकास के लिए आवंटित धन की लूट की है। ऐसे भ्रष्ट लोगों को किसी भी हाल में पद पर बने नहीं रहने दिया जाना चाहिए।' उन्होंने मंत्रिमंडल से नागेंद्र को तत्काल हटाने की माँग दोहराई और कहा कि BJP का आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक नागेंद्र इस्तीफ़ा नहीं देते।
उन्होंने सत्तारूढ़ दल को चेतावनी दी, 'हमारे संघर्ष को हल्के में न लें। जब हम सदन के अंदर लड़ रहे थे, तो हमें गुंडा कहा गया — क्या आप दलितों के लिए आवाज़ उठाने वाले BJP और जेडी(एस) नेताओं को भी गुंडा कह रहे हैं?'
कांग्रेस सरकार की स्थिति
नागेंद्र के इस्तीफे की संभावना पर पहले पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा था कि कांग्रेस के सभी नेता, मंत्री, विधायक और कार्यकर्ता पार्टी के 'अनुशासित सिपाही' हैं। हालाँकि, बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच नागेंद्र के कैबिनेट से हटने की अटकलें थमी नहीं हैं। गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में उभरा है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पहले से कई मोर्चों पर विपक्ष के निशाने पर है।
आम जनता और दलित समुदाय पर असर
विजयेंद्र ने स्पष्ट किया कि BJP का यह संघर्ष व्यक्तिगत नहीं, बल्कि दलित और आदिवासी समुदायों के हितों की रक्षा के लिए है। उनके शब्दों में, 'हमारा मकसद नागेंद्र की छवि खराब करना नहीं है — हमारा मकसद दलित समुदाय को न्याय दिलाना है। पैसा वापस आना चाहिए और उसका उपयोग समुदाय के विकास के लिए होना चाहिए।' कथित घोटाले में अनुसूचित जनजाति कल्याण के लिए आवंटित धनराशि के दुरुपयोग के आरोप हैं, जो सीधे तौर पर वंचित वर्गों की विकास योजनाओं को प्रभावित करते हैं।
विधान परिषद चुनाव की तैयारी
विजयेंद्र ने यह भी बताया कि BJP ने आगामी विधान परिषद चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। अक्टूबर-नवंबर में होने वाले दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र, पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनावों की रणनीति पर विधायकों की विशेष बैठक बुलाई गई। वर्तमान में तीनों सीटों पर BJP के विधान परिषद सदस्य हैं और पार्टी इन्हें बरकरार रखने की कोशिश में है।
वाल्मीकि कॉर्पोरेशन मामले में जाँच एजेंसियों की कार्रवाई और नागेंद्र के भविष्य पर निर्णय आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति की दिशा तय करेगा।