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एम्स रायपुर दीक्षांत समारोह: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने 689 स्नातकों से माँगा राष्ट्रसेवा का संकल्प

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एम्स रायपुर दीक्षांत समारोह: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने 689 स्नातकों से माँगा राष्ट्रसेवा का संकल्प

सारांश

एम्स रायपुर का तीसरा दीक्षांत समारोह महज़ एक रस्म नहीं था — उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने 689 नए चिकित्सकों को याद दिलाया कि उनकी डिग्री एक अमानत है, ज़िम्मेदारी है। किडनी प्रत्यारोपण में 95% सफलता दर और हृदय प्रत्यारोपण की मंज़ूरी के साथ, एम्स रायपुर मध्य भारत की स्वास्थ्य तस्वीर बदल रहा है।

मुख्य बातें

राधाकृष्णन ने 2 सितंबर 2026 को एम्स रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह में भाग लिया।
कुल 689 विद्यार्थियों को डिग्रियाँ प्रदान की गईं — 376 छात्राएँ और 313 छात्र ।
2014 के बाद उच्च शिक्षा में महिला नामांकन में 42.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
एम्स रायपुर ने राज्य का पहला किडनी प्रत्यारोपण किया; गुर्दा प्रत्यारोपण में 95 प्रतिशत से अधिक सफलता दर।
हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम को मंज़ूरी मिली — उन्नत चिकित्सा सेवाओं की दिशा में नया कदम।
एम्स रायपुर की स्थापना वर्ष 2012 में हुई थी; यह छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों का प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य केंद्र बन चुका है।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 2 सितंबर 2026 को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह में भाग लिया और स्नातक चिकित्सकों से पूर्ण समर्पण तथा ईमानदारी के साथ देशसेवा का आह्वान किया। इस समारोह में कुल 689 विद्यार्थियों को डिग्रियाँ प्रदान की गईं, जिनमें 376 छात्राएँ और 313 छात्र शामिल थे।

उपराष्ट्रपति का संदेश: डिग्री नहीं, ज़िम्मेदारी

समारोह को संबोधित करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि एक नई ज़िम्मेदारी की शुरुआत है। उन्होंने स्नातकों को स्मरण कराया कि उनकी डिग्री केवल व्यक्तिगत सफलता का प्रतीक नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन और स्वास्थ्य की अमानत है।

उन्होंने कहा, 'आज आप अपनी डिग्रियाँ प्राप्त कर रहे हैं और कल आपको भारत के लोगों के स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन जैसी बहुमूल्य ज़िम्मेदारी सौंपी जाएगी। आपको पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ सेवा करनी है।' उन्होंने छात्रों से नशे से दूर रहने और तकनीक का उपयोग समावेशी विकास के लिए करने की भी अपील की।

एम्स रायपुर की उपलब्धियाँ और क्षेत्रीय भूमिका

वर्ष 2012 में स्थापित एम्स रायपुर ने मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि अल्प समय में ही यह संस्थान छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों के लिए एक प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य केंद्र बन गया है, जो ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक उन्नत चिकित्सा सेवाएँ पहुँचा रहा है।

राधाकृष्णन ने संस्थान की चिकित्सा उपलब्धियों की सराहना करते हुए राज्य के पहले किडनी प्रत्यारोपण, गुर्दा प्रत्यारोपण में 95 प्रतिशत से अधिक सफलता दर तथा कॉर्निया और कान प्रत्यारोपण जैसी उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम को मिली मंज़ूरी उन्नत चिकित्सा सेवाओं की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

छत्तीसगढ़ का परिवर्तन: भय से प्रगति की ओर

उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर को छत्तीसगढ़ के व्यापक परिवर्तन का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य कभी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, कमज़ोर संपर्क व्यवस्था और वामपंथी उग्रवाद की चुनौतियों से जूझता था, जहाँ दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में सड़कें, स्कूल और अस्पतालों का गंभीर अभाव था।

उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विकास और समृद्धि के नए दौर की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा, 'दशकों पुराना नक्सली खतरा समाप्त हो चुका है और जो क्षेत्र कभी हिंसा के लिए जाने जाते थे, वे अब सड़क, स्कूल, अस्पताल, बेहतर संपर्क, निवेश और अवसरों के लिए पहचाने जा रहे हैं।'

महिला शिक्षा और विकसित भारत का लक्ष्य

राधाकृष्णन ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि संतुलित विकास इसकी आधारशिला है। उन्होंने 2014 के बाद उच्च शिक्षा में महिला नामांकन में 42.2 प्रतिशत की वृद्धि को प्रगति का महत्वपूर्ण संकेत बताया। इस वर्ष के दीक्षांत समारोह में भी छात्राओं की संख्या (376) छात्रों (313) से अधिक रही, जो इसी प्रवृत्ति की पुष्टि करती है।

समारोह के अंत में उपराष्ट्रपति ने मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और प्रमाण पत्र प्रदान किए। उन्होंने अपने संबोधन का समापन इन शब्दों से किया: 'आपका ज्ञान लोगों को स्वास्थ्य दे, आपका शोध नवाचार लेकर आए और आपकी सेवा दूसरों को प्रेरित करे।' यह संदेश आने वाले वर्षों में एम्स रायपुर के स्नातकों के लिए एक मार्गदर्शक सूत्र बनेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु असली प्रश्न यह है कि एम्स रायपुर जैसे संस्थानों के स्नातक ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कितने समय तक सेवा देते हैं — आँकड़े बताते हैं कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों के अधिकांश स्नातक शहरी केंद्रों की ओर पलायन कर जाते हैं। किडनी प्रत्यारोपण में 95% सफलता दर और हृदय प्रत्यारोपण की मंज़ूरी निस्संदेह उपलब्धियाँ हैं, लेकिन ये सेवाएँ अभी भी उन्हीं तक पहुँच पाती हैं जो रायपुर तक आ सकते हैं। 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की कसौटी यह होगी कि क्या ये संस्थान अपने स्नातकों को अंतिम पंक्ति तक ले जाने की व्यवस्था बना पाते हैं — केवल प्रेरणादायक भाषणों से नहीं, बल्कि ठोस नीतिगत प्रोत्साहनों से।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एम्स रायपुर का तीसरा दीक्षांत समारोह कब और कहाँ हुआ?
एम्स रायपुर का तीसरा दीक्षांत समारोह 2 सितंबर 2026 को रायपुर, छत्तीसगढ़ में आयोजित हुआ। इसमें उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि थे और कुल 689 विद्यार्थियों को डिग्रियाँ प्रदान की गईं।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने एम्स रायपुर के छात्रों को क्या संदेश दिया?
उपराष्ट्रपति ने छात्रों से कहा कि उनकी डिग्री केवल शैक्षणिक सफलता नहीं, बल्कि लोगों के जीवन और स्वास्थ्य की ज़िम्मेदारी है। उन्होंने पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ राष्ट्रसेवा करने, नशे से दूर रहने और तकनीक का उपयोग समावेशी विकास के लिए करने का आह्वान किया।
एम्स रायपुर की प्रमुख चिकित्सा उपलब्धियाँ क्या हैं?
एम्स रायपुर ने छत्तीसगढ़ का पहला किडनी प्रत्यारोपण किया है और गुर्दा प्रत्यारोपण में 95 प्रतिशत से अधिक सफलता दर हासिल की है। इसके अलावा कॉर्निया और कान प्रत्यारोपण की सुविधा भी उपलब्ध है, तथा हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम को भी मंज़ूरी मिल चुकी है।
एम्स रायपुर की स्थापना कब हुई और यह किन राज्यों की सेवा करता है?
एम्स रायपुर की स्थापना वर्ष 2012 में हुई थी। यह संस्थान छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों के लिए प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में कार्य करता है और ग्रामीण तथा आदिवासी क्षेत्रों तक उन्नत चिकित्सा सेवाएँ पहुँचाता है।
इस दीक्षांत समारोह में छात्राओं की भागीदारी कैसी रही?
इस वर्ष के दीक्षांत समारोह में 689 स्नातकों में से 376 छात्राएँ और 313 छात्र थे, यानी छात्राओं की संख्या अधिक रही। उपराष्ट्रपति ने बताया कि 2014 के बाद से उच्च शिक्षा में महिला नामांकन में 42.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
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