17 अगस्त 2026
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उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने CUTN दीक्षांत समारोह में कहा: ज्ञान के साथ आजीवन सीखना भी ज़रूरी

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उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने CUTN दीक्षांत समारोह में कहा: ज्ञान के साथ आजीवन सीखना भी ज़रूरी

सारांश

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने CUTN के 11वें दीक्षांत समारोह में स्पष्ट संदेश दिया — डिग्री मंज़िल नहीं, शुरुआत है। 1,103 स्नातकों में 616 महिलाएँ और 50 में से 37 स्वर्ण पदक महिलाओं के नाम — यह आँकड़ा खुद एक बड़ी कहानी कह रहा है।

मुख्य बातें

राधाकृष्णन ने 17 अगस्त 2026 को तिरुवरूर में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ तमिलनाडु के 11वें दीक्षांत समारोह में शिरकत की।
कुल 1,103 छात्रों को डिग्रियाँ दी गईं, जिनमें 616 महिलाएँ और 50 स्वर्ण पदक विजेता शामिल थे।
50 में से 37 स्वर्ण पदक महिला छात्रों ने हासिल किए — उच्च शिक्षा में महिला उत्कृष्टता का प्रमाण।
उपराष्ट्रपति ने शिक्षा को अंकों से नहीं, बल्कि स्वतंत्र चिंतन और आजीवन सीखने की क्षमता से मापने पर ज़ोर दिया।
'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक' का समर्थन करते हुए परीक्षा शुचिता की अनिवार्यता पर बल दिया।
छात्रों से 'ड्रग्स को ना कहें' की अपील की और नशे के विरुद्ध सामूहिक जिम्मेदारी का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 17 अगस्त 2026 को तिरुवरूर स्थित सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ तमिलनाडु (CUTN) के 11वें दीक्षांत समारोह में शिरकत की और 1,103 स्नातक छात्रों को डिग्रियाँ प्रदान किए जाने के अवसर पर उन्हें संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा का असली पैमाना परीक्षा के अंक नहीं, बल्कि स्वतंत्र चिंतन, संवाद और आजीवन सीखते रहने की क्षमता है।

दीक्षांत समारोह का संदेश

राधाकृष्णन ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्ति का उत्सव नहीं है — यह शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति, ज्ञान की खोज और उस समर्पण व हिम्मत का जश्न है जिसने छात्रों को इस मुकाम तक पहुँचाया। उन्होंने स्नातकों के माता-पिता और शिक्षकों की भी सराहना की, जिन्होंने अपने बच्चों और शिष्यों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अनेक सुख-सुविधाओं का त्याग किया।

उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे 'ज्ञान के उपभोक्ता नहीं, निर्माता बनें; नकलची नहीं, इनोवेटर बनें; और अनुयायी नहीं, नेता बनें।'

तिरुवरूर की सांस्कृतिक विरासत

उपराष्ट्रपति ने तिरुवरूर के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह पवित्र नगर, जहाँ भव्य त्यागराज मंदिर स्थित है, सदियों से आध्यात्मिकता, विद्वता और कलात्मक उत्कृष्टता का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि इस भूमि ने संतों, विद्वानों और कर्नाटक संगीत की महान त्रिमूर्ति को जन्म दिया है। उनके अनुसार, सच्ची महानता तभी प्रकट होती है जब संस्कृति, शिक्षा और मूल्य एक साथ पल्लवित होते हैं।

उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

राधाकृष्णन ने पिछले 12 वर्षों में उच्च शिक्षा के व्यापक विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि देशभर के दीक्षांत समारोहों में वे प्रायः पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाओं को डिग्री और पदक लेते देखते हैं। इस समारोह में भी यह प्रवृत्ति स्पष्ट दिखी — 1,103 स्नातकों में से 616 महिलाएँ थीं, और 50 स्वर्ण पदकों में से 37 महिलाओं ने हासिल किए। उन्होंने इसे एक स्वागत योग्य और उत्साहजनक बदलाव बताया।

परीक्षा में अनुचित साधनों पर कड़ा रुख

हाल ही में संसद द्वारा पारित 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक' का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने परीक्षाओं की शुचिता और निष्पक्षता बनाए रखने की अनिवार्यता पर ज़ोर दिया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि झारखंड के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान वहाँ की सरकार ने भी ऐसा ही विधेयक पारित किया था और उन्होंने तत्काल उस पर हस्ताक्षर कर उसे कानून का रूप दिया था। उन्होंने कहा, 'अच्छे लोगों के हितों की रक्षा के लिए समाज के बुरे तत्वों को दंड मिलना आवश्यक है।'

नशे के खिलाफ युवाओं से अपील

उपराष्ट्रपति ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से नशीले पदार्थों के कारोबारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नशे की लत न केवल व्यक्ति की जिंदगी तबाह करती है, बल्कि परिवार और समाज को भी गहरी क्षति पहुँचाती है। उन्होंने छात्रों से 'ड्रग्स को ना कहें' की अपील दोहराई और उन्हें अपने मित्रों को भी इससे दूर रखने के लिए प्रेरित करने को कहा।

समारोह में तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, लोकसभा सदस्य (नागापट्टिनम) वी. सेल्वराज, कुलाधिपति प्रो. जी. पद्मनाभन और कुलपति वरिष्ठ प्रो. सुलोचना शेखर सहित संकाय सदस्य, अभिभावक और छात्र उपस्थित रहे। उपराष्ट्रपति ने समापन में सभी स्नातकों के सफल, संतुष्ट और स्वस्थ जीवन की कामना की और यह आशा व्यक्त की कि वे समाज में सार्थक परिवर्तन लाने का संतोष अनुभव करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो उपराष्ट्रपति का 'अंकों से नहीं, क्षमता से मापो' वाला आग्रह उसी दिशा में एक नीतिगत संकेत है। महिलाओं के 37 में से 50 स्वर्ण पदक जीतने का आँकड़ा उत्साहजनक है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह शैक्षणिक उत्कृष्टता रोज़गार और नेतृत्व में भी परिलक्षित हो रही है — जहाँ लैंगिक अंतराल अभी भी गहरा है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CUTN का 11वाँ दीक्षांत समारोह कब और कहाँ आयोजित हुआ?
सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ तमिलनाडु (CUTN) का 11वाँ दीक्षांत समारोह 17 अगस्त 2026 को तमिलनाडु के तिरुवरूर में आयोजित हुआ। इसमें उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस दीक्षांत समारोह में कितने छात्रों को डिग्रियाँ मिलीं और महिलाओं का प्रदर्शन कैसा रहा?
कुल 1,103 छात्रों को डिग्रियाँ प्रदान की गईं, जिनमें 616 महिलाएँ थीं। 50 स्वर्ण पदकों में से 37 महिला छात्रों ने जीते, जो उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती उत्कृष्टता को दर्शाता है।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने शिक्षा की परिभाषा पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि शिक्षा को केवल परीक्षाओं या अंकों से नहीं मापा जा सकता। इसे स्वतंत्र रूप से सोचने, प्रभावी ढंग से संवाद करने, सहयोग करने और जीवनभर सीखते रहने की क्षमता से मापा जाना चाहिए।
सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक पर उपराष्ट्रपति का क्या रुख रहा?
उपराष्ट्रपति ने संसद द्वारा पारित 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक' का समर्थन किया और परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाने की ज़रूरत पर बल दिया। उन्होंने बताया कि झारखंड के राज्यपाल रहते हुए उन्होंने ऐसे ही एक विधेयक पर तत्काल हस्ताक्षर कर उसे कानून बनाया था।
उपराष्ट्रपति ने नशे की समस्या पर छात्रों से क्या अपील की?
उन्होंने छात्रों से 'ड्रग्स को ना कहें' की अपील की और उन्हें अपने मित्रों को भी नशे से दूर रखने के लिए प्रेरित करने को कहा। साथ ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से नशे के कारोबारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का आग्रह किया।
राष्ट्र प्रेस
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