प्रो. निरंजन कुमार: विदेशी ताकतें 'डीप स्टेट' से भारत को अस्थिर कर रही हैं, मॉक पार्लियामेंट में उठी आवाज़
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में 30 अक्टूबर 2026 को आयोजित मॉक पार्लियामेंट के अवसर पर वरिष्ठ प्रोफेसर निरंजन कुमार ने कहा कि विदेशी ताकतें भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था को रोकने की साजिश रच रही हैं और 'डीप स्टेट' के ज़रिये देश को अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ऐसे माहौल में जनता को जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है।
मॉक पार्लियामेंट का आयोजन और उद्देश्य
एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में युवाओं ने देश के राजनेताओं के प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया और संसदीय प्रक्रियाओं का अनुभव किया। प्रो. निरंजन कुमार ने कहा कि मॉक पार्लियामेंट एक सराहनीय आयोजन है और देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों में यह परंपरा पहले से चली आ रही है। उनके अनुसार, इस मंच का उपयोग लोकतंत्र की जटिलताओं और उसकी चुनौतियों से आम जनता को परिचित कराने के लिए किया जाना चाहिए।
विदेशी ताकतों और 'डीप स्टेट' पर गंभीर आरोप
प्रो. कुमार ने अपने बयान में कहा कि जो देश पिछले 60 वर्षों से आर्थिक रूप से पिछड़ता रहा, वह अब लगातार प्रगति कर रहा है — और यही बात कुछ विदेशी ताकतों को स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि 'डीप स्टेट' के माध्यम से भारत की सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता को कमज़ोर करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मॉक पार्लियामेंट जैसे मंचों पर इन विषयों पर खुली चर्चा होनी चाहिए ताकि नागरिक सचेत रहें।
एसआईआर और मतदाता सूची की शुद्धता
प्रो. निरंजन कुमार ने विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया का समर्थन करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र को पवित्र बनाए रखने का एक अनिवार्य उपाय है। इसके ज़रिये डुप्लीकेट, मृत या स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में फर्जी मतदान का एक लंबा इतिहास रहा है, और इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान देने की ज़रूरत है। उनके अनुसार, विदेशी नागरिकों और गैर-ज़िम्मेदार व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से हटाने का विरोध करना समझ से परे है।
चुनाव आयोग और विपक्ष पर टिप्पणी
प्रो. कुमार ने कहा कि भारत की चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग (ECI) से दुनिया के कई देश सीख रहे हैं, फिर भी कुछ लोग अपने ही संस्थानों पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमला केवल एक बहाना है — असली निशाना मोदी सरकार है। विपक्ष द्वारा आयोजित मॉक पार्लियामेंट के बारे में उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष सकारात्मक कार्य करे तो जनता उसका भी स्वागत करेगी, परंतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपशब्दों का प्रयोग और एसआईआर पर जनता को गुमराह करना ज़िम्मेदाराना आचरण नहीं है।
आगे की राह: जागरूकता और संवाद
प्रो. निरंजन कुमार ने अंत में कहा कि मॉक पार्लियामेंट जैसे आयोजनों का मूल उद्देश्य जनता को शिक्षित और एकजुट करना होना चाहिए। उन्होंने आह्वान किया कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर नागरिक को अपनी भूमिका समझनी होगी। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब मतदाता सूची शुद्धिकरण और संसदीय आचरण जैसे मुद्दे राष्ट्रीय बहस के केंद्र में हैं।