राष्ट्र के प्रतीकों का अपमान बर्दाश्त नहीं, बस्तर का दर्द समझें विपक्ष: छत्तीसगढ़ उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 17 अगस्त 2026 को कांग्रेस और विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है, और विपक्षी नेताओं को नक्सलवाद का वास्तविक दर्द समझने के लिए बस्तर जाकर पीड़ितों से मिलना चाहिए। उन्होंने वंदे मातरम विवाद, बस्तर तिरंगा यात्रा, 'दिमागी नक्सल' टिप्पणी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई संगठनात्मक नियुक्तियों सहित कई मुद्दों पर अपनी राय रखी।
बस्तर में तिरंगा यात्रा: बदलाव का प्रतीक
विजय शर्मा ने कहा कि एक समय था जब बस्तर में तिरंगा फहराने पर हत्याएं तक हो जाती थीं और कई गांवों में संविधान का पूर्ण पालन नहीं होता था। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों ने दृढ़ संकल्प के साथ बस्तर के कोने-कोने तक संविधान लागू करने की दिशा में काम किया है।
इस बार 15 अगस्त को बस्तर के सभी स्थानों और संस्थानों में तिरंगा फहराया गया। शर्मा के अनुसार, बस्तर तिरंगा यात्रा का उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं था, बल्कि यह संदेश देना था कि अब कोई किसी को तिरंगा फहराने से नहीं रोक सकता। यात्रा के दौरान लोगों को तिरंगे भी वितरित किए गए और 'हर घर तिरंगा' तथा 'घर-घर तिरंगा' का संदेश बस्तर के हर हिस्से तक पहुंचाने की कोशिश की गई।
वंदे मातरम विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया
वंदे मातरम को लेकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर BJP की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर शर्मा ने कहा कि राष्ट्र से जुड़े प्रतीकों का अपमान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस के एक नेता के उस कथित बयान का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि बड़े नेताओं के मना करने के बावजूद उन्होंने पूरा वंदे मातरम गाया।
शर्मा ने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ओर से इस पर आपत्ति जताई जा रही थी। उनके अनुसार, किसी की व्यक्तिगत रुचि या अरुचि अलग विषय हो सकता है, लेकिन राष्ट्रीय महत्व के विषयों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है — विशेष रूप से बड़े संवैधानिक और राजनीतिक पदों पर बैठे लोगों का।
नक्सलवाद और 'दिमागी नक्सल' टिप्पणी का बचाव
कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम की 'दिमागी नक्सल' संबंधी टिप्पणी के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का बचाव करते हुए शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने किसी राजनीतिक दल को निशाना बनाकर यह बात नहीं कही थी। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद केवल एक राजनीतिक शब्द नहीं है — यह वह हिंसा है जो लोगों की ज़िंदगी बर्बाद करती है और देश को अस्थिर करने की कोशिश करती है।
शर्मा ने बताया कि बस्तर में नक्सल हिंसा के कारण बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों के जवानों ने जान गंवाई है और आदिवासी समुदाय को भी हिंसा का सामना करना पड़ा है। उन्होंने शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं की हत्या, तिरंगा फहराने वालों को निशाना बनाए जाने और झीरम घाटी जैसी घटना का विशेष उल्लेख किया — जिसमें छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कई बड़े नेताओं की जान गई थी।
उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह वोट बैंक की राजनीति के लिए प्रधानमंत्री के बयान को अलग तरीके से पेश कर रहा है। शर्मा ने सलाह दी कि विपक्षी नेता बस्तर जाकर उन लोगों से मिलें जिन्होंने नक्सली हिंसा और IED विस्फोटों में अपने अंग गंवाए हैं। उनके अनुसार, अगर नेता पीड़ितों का दर्द नहीं समझेंगे तो जनता समय आने पर उन्हें इसका जवाब देगी।
आरएसएस पंजीकरण विवाद पर पलटवार
कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर दिए गए बयान पर शर्मा ने सवाल उठाया कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों तथा लोगों के आपसी मेल-जोल को किस तरह पंजीकरण से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने कांग्रेस पर मूल मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश का आरोप लगाया और कहा कि राजनीतिक दलों को भारत की मूल समस्याओं और देश की सुरक्षा से जुड़े विषयों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
BJP की नई संगठनात्मक टीम पर विश्वास
भाजपा की नई संगठनात्मक नियुक्तियों पर शर्मा ने कहा कि नई टीम में अनुभव और नए अवसरों का अच्छा संतुलन दिखाई देता है। उन्होंने नितिन नवीन के साथ काम करने के अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि वह उनकी कार्यशैली और संगठन चलाने की क्षमता को भली-भांति जानते हैं। शर्मा ने विश्वास जताया कि भाजपा की नई टीम आने वाले समय में पार्टी के लिए महत्वपूर्ण परिणाम देगी।
यह ऐसे समय में आया है जब छत्तीसगढ़ में नक्सल-विरोधी अभियान तेज हो रहे हैं और बस्तर में सरकार की पहुंच बढ़ाने के प्रयास जारी हैं — शर्मा के बयान इसी व्यापक राजनीतिक संदेश का हिस्सा माने जा रहे हैं।