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मेघालय: वीपीपी ने दानाकग्रे में भूमि पट्टे के मुद्दे पर सीएम कॉनराड को घेरा

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मेघालय: वीपीपी ने दानाकग्रे में भूमि पट्टे के मुद्दे पर सीएम कॉनराड को घेरा

सारांश

वीपीपी ने दानाकग्रे में भूमि पट्टे जारी करने के विवाद में मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा की आलोचना की। यह मामला पारंपरिक भूमि अधिकारों के उल्लंघन और न्यायालय की अवमानना का है। जानें क्या है पूरा विवाद।

मुख्य बातें

पारंपरिक भूमि अधिकारों का उल्लंघन मामले में गंभीरता से लिया गया है।
मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा पर वीपीपी का आरोप।
गांव समुदाय की पहचान और संस्कृति से जुड़ा मामला।

शिलांग, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वॉइस ऑफ द पीपल पार्टी (वीपीपी) ने पश्चिम गारो हिल्स के दानाकग्रे में भूमि पट्टे जारी करने के विवादास्पद मामले में मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा की तीखी आलोचना की है। इसमें पारंपरिक भूमि अधिकारों के उल्लंघन और संभावित अदालत की अवमानना का आरोप लगाया गया है।

दानाकग्रे अखिंग के नोकमा द्वारा मुख्यमंत्री, पश्चिम गारो हिल्स के उपायुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने के बाद पार्टी ने यह प्रतिक्रिया दी है। वीपीपी प्रवक्ता ए. डब्ल्यू. रानी ने मुख्यमंत्री और सरकारी अधिकारियों पर न्यायिक प्रक्रियाओं की अवहेलना करने का आरोप लगाया और कहा कि मामला मेघालय उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद भूमि पट्टे जारी किए गए।

ए. डब्ल्यू. रानी ने यह भी कहा कि स्थगन आदेश न होने पर भी सरकार को न्यायालय के अंतिम निर्णय का इंतजार करना चाहिए था। इससे न्यायालय की अवमानना का गंभीर मामला बनता है। वीपीपी ने यह तर्क दिया कि सरकार की कार्रवाई गारो समुदाय में भूमि स्वामित्व और प्रथागत शासन की नींव रखने वाली पारंपरिक नोकनाशिप और अखिंग प्रणाली को कमजोर करती है।

रानी ने सरकार की कार्रवाई में पारदर्शिता पर सवाल उठाए और उस प्रक्रिया को लेकर कई चिंताएं व्यक्त कीं, जिसके तहत कथित तौर पर जमीन को सरकारी जमीन घोषित किया गया था।

पार्टी द्वारा उठाए गए सवालों में शामिल हैं: अगर जमीन सरकारी संपत्ति है तो इसे कब और कैसे अधिग्रहित किया गया? क्या जमीन के असली मालिकों को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013, या उससे पहले के 1894 के अधिनियम के तहत मुआवजा दिया गया? क्या यह कदम प्रशासनिक निर्णय था या राजनीतिक रूप से प्रेरित, खासकर जीएचएडीसी चुनावों के नजदीक आने के मद्देनजर?

वीपीपी का कहना है कि इस क्षेत्र में जमीन पहचान, संस्कृति और सामुदायिक शासन से गहराई से जुड़ी हुई है, विशेषकर संविधान की छठी अनुसूची के तहत आने वाले क्षेत्रों में। ए. डब्ल्यू. रानी ने कहा कि जमीन केवल एक आर्थिक संपत्ति नहीं है। यह हमारी पहचान और विरासत का प्रतीक है। छठी अनुसूची के तहत आने वाले क्षेत्रों में सरकार पारंपरिक भूमि स्वामित्व प्रणालियों का सम्मान किए बिना मनमाने ढंग से कार्रवाई नहीं कर सकती।

पार्टी ने यह भी कहा कि वह इस मामले से जुड़े तथ्यों की पुष्टि के लिए पारंपरिक नेताओं के साथ मिलकर काम करेगी।

अब इस मामले में एफआईआर दर्ज होने और मेघालय उच्च न्यायालय में कार्यवाही होने के कारण विवाद ने राज्य में राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है, और सरकार को यह स्पष्ट करने के लिए दबाव का सामना करना पड़ रहा है कि सामुदायिक भूमि के रूप में वर्णित भूमि को कथित तौर पर सरकारी भूमि के रूप में कैसे माना जाने लगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह मेघालय के गारो समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक शासन प्रणालियों से भी जुड़ा हुआ है। राजनीतिक दबाव और न्यायिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन गंभीर चिंता का विषय है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीपीपी ने मुख्यमंत्री पर कौन सा आरोप लगाया है?
वीपीपी ने मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा पर पारंपरिक भूमि अधिकारों के उल्लंघन और न्यायालय की अवमानना का आरोप लगाया है।
दानाकग्रे में भूमि पट्टे जारी करने का विवाद क्यों है?
यह विवाद इसलिए है क्योंकि भूमि पट्टे जारी करने के मामले में पारंपरिक प्रक्रियाओं का सम्मान नहीं किया गया और यह मेघालय उच्च न्यायालय में विचाराधीन था।
वीपीपी की दलीलें क्या हैं?
वीपीपी का तर्क है कि सरकार की कार्रवाई गारो समुदाय की पारंपरिक भूमि स्वामित्व प्रणालियों को कमजोर कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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