7 नवंबर 2026
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वारिस पठान का किरीट सोमैया पर पलटवार: मुस्लिम आबादी पर बहस को बताया नफरत की राजनीति

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वारिस पठान का किरीट सोमैया पर पलटवार: मुस्लिम आबादी पर बहस को बताया नफरत की राजनीति

सारांश

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने BJP नेता किरीट सोमैया के जनसांख्यिकीय पत्र को नफरत फैलाने की कोशिश बताया और सरकारी आँकड़ों से साबित किया कि मुस्लिम TFR 1992 के 4.4 से घटकर 2019-21 में 2.3 हो गई। साथ ही, बाबरी मस्जिद मुद्दे पर कांग्रेस को भी कठघरे में खड़ा किया।

मुख्य बातें

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने 7 नवंबर को BJP नेता किरीट सोमैया के जनसांख्यिकीय पत्र की कड़ी आलोचना की।
सरकारी आँकड़ों के अनुसार मुस्लिम समुदाय की टीएफआर 1992 में 4.4 से घटकर 2019-21 में 2.3 हो गई है।
पठान ने 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस को देश के लिए काला दिन बताया और इसमें कांग्रेस की भूमिका को भी जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने RSS प्रमुख मोहन भागवत के अधिक बच्चे पैदा करने संबंधी बयान का हवाला देते हुए दोहरे मापदंड का आरोप लगाया।
अमेरिकी सीनेट में अब्दुल अल-सैयद के निर्वाचन को पठान ने ऐतिहासिक जीत बताया।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने 7 नवंबर को मुंबई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता किरीट सोमैया द्वारा जनसांख्यिकीय बदलाव के मुद्दे पर मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र की कड़ी आलोचना की। पठान ने मुसलमानों की आबादी और प्रजनन दर को लेकर उठाए जा रहे सवालों को समाज में नफरत फैलाने और मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने की सुनियोजित कोशिश करार दिया।

मुख्य घटनाक्रम

पठान ने कहा कि जब कोई अधिक बच्चे पैदा करने की इच्छा रखता है तो उसे किसी का अधिकार नहीं है कि वह उस पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सोमैया जैसे नेता जनसंख्या से जुड़े आँकड़ों और तथ्यों की जानकारी रखे बिना बयान देते हैं, जिसका एकमात्र उद्देश्य राजनीतिक ध्रुवीकरण है।

गौरतलब है कि यह बयानबाज़ी ऐसे समय में आई है जब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियाँ तेज़ हैं और जनसांख्यिकीय मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गए हैं।

सरकारी आँकड़ों का हवाला

पठान ने सरकारी आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि मुस्लिम समुदाय की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) लगातार घट रही है। आँकड़ों के अनुसार, 1992 में मुस्लिम समुदाय की टीएफआर 4.4 थी, जो 2015-16 में घटकर 2.6 और 2019-21 के दौरान 2.3 रह गई।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ये उनके निजी दावे नहीं, बल्कि सरकार के अपने आँकड़े हैं। पठान ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के तीन-चार बच्चे पैदा करने संबंधी बयान का भी उल्लेख करते हुए पूछा कि उस समय ये सवाल क्यों नहीं उठाए गए।

बाबरी मस्जिद और कांग्रेस पर निशाना

पठान ने सोनिया गांधी की बाबरी मस्जिद विध्वंस संबंधी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए 6 दिसंबर 1992 को देश और लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का मानना है कि बाबरी मस्जिद को एक षड्यंत्र के तहत गिराया गया था।

उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) को भी इस घटनाक्रम में बराबर का जिम्मेदार ठहराया। पठान ने सवाल किया कि कांग्रेस ने मस्जिद के पुनर्निर्माण को लेकर जो संकल्प लिया था, उस दिशा में व्यावहारिक रूप से क्या कदम उठाए गए — और उनका जवाब था कि कुछ भी नहीं।

मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक जागरूकता

पठान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने लंबे समय तक धर्मनिरपेक्षता के नाम पर मुसलमानों के वोट हासिल किए, लेकिन सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करने की दिशा में कोई ठोस काम नहीं हुआ। उन्होंने विभिन्न सरकारी समितियों की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय की पिछड़ी स्थिति आँकड़ों में भी दर्ज है।

उन्होंने कहा कि भारत का मुस्लिम समुदाय अब राजनीतिक रूप से पहले से अधिक जागरूक हो चुका है और वह यह समझता है कि दशकों के शासन में उसके साथ क्या हुआ।

अब्दुल अल-सैयद की जीत पर प्रतिक्रिया

पठान ने अमेरिकी सीनेट में अब्दुल अल-सैयद के निर्वाचन को ऐतिहासिक जीत बताते हुए खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जिस 'अब्दुल' नाम का इस्तेमाल अक्सर नकारात्मक संदर्भ में किया जाता है, उसी नाम का व्यक्ति अमेरिका की सीनेट तक पहुँचा है। पठान ने कहा कि अल-सैयद गरीबों की आवाज बनेंगे और न्याय की लड़ाई लड़ेंगे।

यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व और पहचान की राजनीति को लेकर बहस तेज़ है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो तथ्यात्मक रूप से सही हैं — लेकिन यह भी उतना ही सच है कि AIMIM का अपना राजनीतिक हित इस बहस को जीवित रखने में है। कांग्रेस पर निशाना साधना पठान की रणनीतिक ज़रूरत है, क्योंकि AIMIM उसी मतदाता आधार के लिए प्रतिस्पर्धा करती है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि इस पूरी बहस में न तो सोमैया ने और न ही पठान ने मुस्लिम समुदाय के वास्तविक सामाजिक-आर्थिक सवालों — शिक्षा, रोज़गार, प्रतिनिधित्व — को केंद्र में रखा।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वारिस पठान ने किरीट सोमैया के पत्र पर क्या आपत्ति जताई?
वारिस पठान ने कहा कि मुसलमानों की आबादी और प्रजनन दर को लेकर उठाए जा रहे सवाल समाज में नफरत फैलाने और मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने की कोशिश हैं। उनका कहना था कि सोमैया जैसे नेता सरकारी आँकड़ों को देखे बिना बयानबाज़ी करते हैं।
मुस्लिम समुदाय की प्रजनन दर (TFR) के सरकारी आँकड़े क्या कहते हैं?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार मुस्लिम समुदाय की कुल प्रजनन दर 1992 में 4.4 थी, जो 2015-16 में घटकर 2.6 और 2019-21 में 2.3 रह गई। पठान ने इन्हीं आँकड़ों का हवाला देते हुए जनसांख्यिकीय बहस को भ्रामक बताया।
वारिस पठान ने बाबरी मस्जिद मुद्दे पर कांग्रेस को क्यों जिम्मेदार ठहराया?
पठान ने कहा कि 6 दिसंबर 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस के पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कांग्रेस ने मस्जिद पुनर्निर्माण को लेकर जो संकल्प लिया था, उस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
अब्दुल अल-सैयद कौन हैं और पठान ने उनकी जीत पर क्या कहा?
अब्दुल अल-सैयद अमेरिकी सीनेट के लिए चुने गए हैं। वारिस पठान ने इसे ऐतिहासिक जीत बताया और कहा कि जिस 'अब्दुल' नाम का नकारात्मक इस्तेमाल होता रहा है, उसी नाम का व्यक्ति अमेरिका की सीनेट तक पहुँचा है।
इस विवाद का महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर हो सकता है?
यह बयानबाज़ी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में हुई है, जहाँ जनसांख्यिकीय और सांप्रदायिक मुद्दे मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की बहसें चुनावी ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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