वारिस पठान का किरीट सोमैया पर पलटवार: मुस्लिम आबादी पर बहस को बताया नफरत की राजनीति
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने 7 नवंबर को मुंबई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता किरीट सोमैया द्वारा जनसांख्यिकीय बदलाव के मुद्दे पर मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र की कड़ी आलोचना की। पठान ने मुसलमानों की आबादी और प्रजनन दर को लेकर उठाए जा रहे सवालों को समाज में नफरत फैलाने और मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने की सुनियोजित कोशिश करार दिया।
मुख्य घटनाक्रम
पठान ने कहा कि जब कोई अधिक बच्चे पैदा करने की इच्छा रखता है तो उसे किसी का अधिकार नहीं है कि वह उस पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सोमैया जैसे नेता जनसंख्या से जुड़े आँकड़ों और तथ्यों की जानकारी रखे बिना बयान देते हैं, जिसका एकमात्र उद्देश्य राजनीतिक ध्रुवीकरण है।
गौरतलब है कि यह बयानबाज़ी ऐसे समय में आई है जब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियाँ तेज़ हैं और जनसांख्यिकीय मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गए हैं।
सरकारी आँकड़ों का हवाला
पठान ने सरकारी आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि मुस्लिम समुदाय की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) लगातार घट रही है। आँकड़ों के अनुसार, 1992 में मुस्लिम समुदाय की टीएफआर 4.4 थी, जो 2015-16 में घटकर 2.6 और 2019-21 के दौरान 2.3 रह गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ये उनके निजी दावे नहीं, बल्कि सरकार के अपने आँकड़े हैं। पठान ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के तीन-चार बच्चे पैदा करने संबंधी बयान का भी उल्लेख करते हुए पूछा कि उस समय ये सवाल क्यों नहीं उठाए गए।
बाबरी मस्जिद और कांग्रेस पर निशाना
पठान ने सोनिया गांधी की बाबरी मस्जिद विध्वंस संबंधी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए 6 दिसंबर 1992 को देश और लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का मानना है कि बाबरी मस्जिद को एक षड्यंत्र के तहत गिराया गया था।
उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) को भी इस घटनाक्रम में बराबर का जिम्मेदार ठहराया। पठान ने सवाल किया कि कांग्रेस ने मस्जिद के पुनर्निर्माण को लेकर जो संकल्प लिया था, उस दिशा में व्यावहारिक रूप से क्या कदम उठाए गए — और उनका जवाब था कि कुछ भी नहीं।
मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक जागरूकता
पठान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने लंबे समय तक धर्मनिरपेक्षता के नाम पर मुसलमानों के वोट हासिल किए, लेकिन सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करने की दिशा में कोई ठोस काम नहीं हुआ। उन्होंने विभिन्न सरकारी समितियों की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय की पिछड़ी स्थिति आँकड़ों में भी दर्ज है।
उन्होंने कहा कि भारत का मुस्लिम समुदाय अब राजनीतिक रूप से पहले से अधिक जागरूक हो चुका है और वह यह समझता है कि दशकों के शासन में उसके साथ क्या हुआ।
अब्दुल अल-सैयद की जीत पर प्रतिक्रिया
पठान ने अमेरिकी सीनेट में अब्दुल अल-सैयद के निर्वाचन को ऐतिहासिक जीत बताते हुए खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जिस 'अब्दुल' नाम का इस्तेमाल अक्सर नकारात्मक संदर्भ में किया जाता है, उसी नाम का व्यक्ति अमेरिका की सीनेट तक पहुँचा है। पठान ने कहा कि अल-सैयद गरीबों की आवाज बनेंगे और न्याय की लड़ाई लड़ेंगे।
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व और पहचान की राजनीति को लेकर बहस तेज़ है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और तेज़ होने की संभावना है।