शमी के बचपन के कोच का खुलासा: न्यूजीलैंड सीरीज से बाहर होने के बाद टेस्ट वापसी की उम्मीद छोड़ चुके थे
सारांश
मुख्य बातें
मोहम्मद शमी के बचपन के कोच बदरुद्दीन सिद्दीकी ने 7 नवंबर को खुलासा किया कि न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए नहीं चुने जाने के बाद शमी ने टेस्ट क्रिकेट में वापसी की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी और संन्यास का मन बना लिया था। परिवार और कोच की बार-बार की मनुहार के बावजूद शमी इस फैसले पर अडिग रहे।
संन्यास की घोषणा और करियर का सफर
मोहम्मद शमी ने शुक्रवार की रात अपने टेस्ट करियर को विराम दे दिया। ठीक 13 साल पहले ईडन गार्डन्स में वेस्टइंडीज के खिलाफ उन्होंने इस फॉर्मेट में पदार्पण किया था। अपने टेस्ट करियर का समापन उन्होंने 64 मैचों में 229 विकेट और 27.71 के औसत के साथ किया, जिसमें 6 बार एक पारी में पाँच या अधिक विकेट शामिल हैं। वह भारत के लिए सर्वाधिक टेस्ट विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में 12वें और तेज गेंदबाजों में छठे स्थान पर हैं।
कोच सिद्दीकी का खुलासा
सिद्दीकी ने बताया कि पिछले एक साल से शमी मानसिक रूप से काफी परेशान थे। उन्होंने कहा, 'यह सब काफी समय से चल रहा था। मैंने उन्हें ऐसा करने से रोका था और थोड़ा और इंतजार करने को कहा था। पिछले एक साल से वह काफी परेशान चल रहे थे। जाहिर है, जब आपको खेलने और प्रदर्शन करने का मौका न मिले, तो कोई भी खिलाड़ी परेशान हो ही जाएगा।'
सिद्दीकी ने यह भी बताया कि भुवनेश्वर कुमार की राष्ट्रीय टी20 टीम में वापसी से उन्हें उम्मीद जगी थी कि शायद शमी को भी न्यूजीलैंड सीरीज में मौका मिल जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा, 'मुझे लगा था कि जब भुवनेश्वर कुमार को टी20 टीम में वापस बुलाया गया, तो शायद शमी को भी न्यूजीलैंड सीरीज, वनडे या टेस्ट सीरीज में मौका मिल जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, अब मैं क्या कह सकता हूं?'
चोट से वापसी और फिर उपेक्षा
मार्च 2025 में दुबई में चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ जीत के बाद से शमी किसी भी फॉर्मेट में भारत के लिए नहीं खेले थे। 2023 के घरेलू वनडे वर्ल्ड कप के बाद घुटने की चोट और 'अकिलीस टेंडन' के ऑपरेशन के कारण वह लंबे समय तक क्रिकेट से दूर रहे। जनवरी में इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की थी।
गौरतलब है कि इस दौरान शमी ने रणजी ट्रॉफी में बंगाल के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हुए 4-5 विकेट लिए और टीम को जीत दिलाई। सिद्दीकी को यह समझ नहीं आया कि इतने अच्छे प्रदर्शन के बावजूद शमी को 'अनफिट' कैसे माना जा सकता है।
सिद्दीकी की चयन प्रक्रिया पर आपत्ति
सिद्दीकी ने कहा, 'जब शमी जैसा खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहा हो, तब आप कहते हैं कि वह अनफिट है। उसने रणजी ट्रॉफी खेली और 20 ओवर गेंदबाजी की — तो वह अनफिट कैसे हो सकता है?' उन्होंने ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ सीनियर तेज गेंदबाजों पर भरोसा जताया जाता है, जबकि भारत में ऐसा नहीं हो रहा।
सिद्दीकी ने यह भी कहा कि युवा गेंदबाजों को जसप्रीत बुमराह और शमी जैसे अनुभवी गेंदबाजों के साथ खेलने से जो व्यावहारिक सीख मिलती है, वह कोई कोच नहीं दे सकता। उनके अनुसार, 'मेरे हिसाब से, अगर वह अभी से खेलते, तो दो साल और टेस्ट क्रिकेट खेल सकते थे।'
आगे का रास्ता
शमी के संन्यास से भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण में एक अनुभवी स्तंभ की कमी महसूस होगी, खासकर आगामी इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया दौरों पर। सिद्दीकी ने कहा कि शमी ने उनके सामने कभी खुलकर निराशा जाहिर नहीं की और हमेशा की तरह बच्चों के साथ प्रैक्टिस करते रहे — यह उनके अनुशासन और जज्बे की मिसाल है। भारतीय तेज गेंदबाजी के भविष्य पर अब यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या चयन प्रक्रिया में अनुभव को उचित तरजीह दी जा रही है।