ऐतिहासिक मतदान: पश्चिम बंगाल में 91.78% वोटिंग पर CJI ने कहा — लोकतंत्र हुआ मजबूत
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में पहले चरण के चुनाव में 91.78 प्रतिशत ऐतिहासिक मतदान दर्ज होने पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी प्रसन्नता व्यक्त की है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने इसे देश की लोकतांत्रिक परंपरा के लिए एक सकारात्मक और उत्साहजनक संकेत करार दिया। यह आंकड़ा 2011 में बने पिछले रिकॉर्ड 84.72 प्रतिशत को भी पीछे छोड़ गया है।
सीजेआई की ऐतिहासिक टिप्पणी
एक अदालती सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि भारत के एक नागरिक के रूप में इतना अधिक मतदान प्रतिशत देखकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं, तो लोकतंत्र की जड़ें और गहरी होती हैं।
जस्टिस बागची ने भी इस अवसर पर संतोष जाहिर करते हुए कहा कि पहले चरण के दौरान कोई बड़ी हिंसक घटना सामने नहीं आई, जो अत्यंत सुखद और राहत देने वाली बात है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक संघर्ष में आम नागरिकों को नुकसान नहीं उठाना चाहिए।
सॉलिसिटर जनरल ने बताया ऐतिहासिक
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मतदान को ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि 92 फीसदी से अधिक मतदान जनता का लोकतंत्र में अटूट विश्वास दर्शाता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि केंद्रीय सुरक्षा बलों ने चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण बनाए रखने में सराहनीय भूमिका निभाई।
उन्होंने माना कि कुछ छिटपुट घटनाएं हुईं, लेकिन समग्र रूप से मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रहा।
महिला मतदाताओं ने रचा नया इतिहास
इस चुनाव में महिला मतदाताओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। महिलाओं का मतदान प्रतिशत 92.69% रहा, जबकि पुरुष मतदाताओं का प्रतिशत 90.92% दर्ज किया गया। यह राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक जागरूकता और सहभागिता के एक मजबूत रुझान को प्रतिबिंबित करता है।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल ऐतिहासिक रूप से देश के उन राज्यों में शामिल रहा है जहां मतदान प्रतिशत सर्वाधिक होता है। ऐसे में 2011 के रिकॉर्ड को भी तोड़ना इस चुनाव को और अधिक महत्वपूर्ण बना देता है।
ऐतिहासिक संदर्भ और व्यापक निहितार्थ
यह मतदान ऐसे समय में हुआ है जब देश के कई अन्य राज्यों में मतदान प्रतिशत में गिरावट की चिंता जताई जा रही है। पश्चिम बंगाल का यह आंकड़ा न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय लोकतंत्र के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च मतदान प्रतिशत चुनावी प्रक्रिया में जनता के भरोसे का प्रमाण है। साथ ही यह उन दलों के लिए भी संकेत है कि मतदाता अपनी राय व्यक्त करने के लिए पूरी तरह तैयार और सजग हैं।
आने वाले चरणों में भी इसी तरह के उत्साहजनक मतदान की उम्मीद जताई जा रही है। चुनाव आयोग और न्यायपालिका दोनों की नजरें अब शेष चरणों की शांतिपूर्ण संपन्नता पर टिकी हैं।