योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर प्रहार: 'एक परिवार की कीमत चुकाता था पूरा यूपी', लोहिया संस्थान में नई मेडिकल सुविधाओं का लोकार्पण
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 सितंबर 2026 को लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के षष्ठम स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पहले एक व्यक्ति और एक परिवार की गलतियों की कीमत पूरे उत्तर प्रदेश को पहचान के संकट, कानून-व्यवस्था की अराजकता और भ्रष्टाचार के रूप में चुकानी पड़ती थी। उनकी यह टिप्पणी पूर्ववर्ती सरकार पर सीधा प्रहार मानी जा रही है। इस अवसर पर उन्होंने संस्थान में मुख्य चिकित्सा अंग प्रत्यारोपण यूनिट सहित कई अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का भी लोकार्पण किया।
पूर्ववर्ती सरकार पर हमला
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कृत्य एक व्यक्ति गलत करता था और कीमत पूरा प्रदेश चुकाने को मजबूर होता था। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज उत्तर प्रदेश पारदर्शिता और शुचिता के साथ आगे बढ़ रहा है, और प्रदेश के नागरिक अब गर्व से कह सकते हैं कि वे उत्तर प्रदेश के हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व सरकार ने गोरखपुर एम्स के लिए ऐसी भूमि उपलब्ध कराई थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट का स्थगन था, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वीकृत 17 मेडिकल कॉलेज बनाने से इनकार कर दिया था।
रोजगार और पारदर्शिता के दावे
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश में 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है और कोई भी यह नहीं कह सकता कि नियुक्ति में भेदभाव हुआ या लेनदेन हुआ। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 16 लाख सरकारी कर्मचारी हैं, जिनमें से 9.5 लाख वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भर्ती हुए हैं। यह युवा कार्यबल प्रदेश की प्रगति को नई गति दे रहा है।
लोहिया संस्थान में नई सुविधाओं का लोकार्पण
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर संस्थान में कई अत्याधुनिक सुविधाओं का उद्घाटन किया, जिनमें शामिल हैं — 40 बेड का इमरजेंसी वार्ड, मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में 100 मरीजों की क्षमता वाला वेटिंग हाल, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग में 4डी-सीटी सिम्युलेटर, पेट-सीटी मशीन, स्पेक्ट-सीटी मशीन, 1.5 टेस्ला एमआरआई तथा पीएमआर विभाग में नेविगेटेड आरटीएमएस मशीन। उन्होंने संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट का भी विमोचन किया। योगी ने बताया कि अंग प्रत्यारोपण यूनिट से किडनी ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा सूची कम करने में मदद मिलेगी और जल्द ही बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा भी शुरू होगी।
स्वास्थ्य अवसंरचना में विस्तार
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 में जहाँ प्रदेश में सरकारी और निजी मिलाकर केवल 41 मेडिकल कॉलेज थे, वहीं आज 85 मेडिकल कॉलेज और दो एम्स संचालित हैं। एमबीबीएस सीटें 4,690 से बढ़कर 13,600 से अधिक हो गई हैं और पीजी सीटें 3,564 से बढ़कर 5,067 पहुँच गई हैं। नर्सिंग कॉलेजों की संख्या 2 से बढ़कर 26 हो गई है और 33 निर्माणाधीन हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की संख्या 1,227 से बढ़कर 3,438 हो गई है। प्रदेश के सभी 75 जिलों में निःशुल्क डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है और 10 जिलों में वर्चुअल आईसीयू संचालित हो रहा है।
तकनीक और शोध पर जोर
मुख्यमंत्री योगी ने चिकित्सा संस्थानों से शोध, नवाचार और तकनीक को उपचार के साथ जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय मेडिकल डेटा का उपयोग पश्चिमी देश शोधपत्रों में करते हैं, जबकि भारत इसे संरक्षित नहीं कर पाता। IIT कानपुर के साथ मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, SGPGI में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा पार्क इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एआई चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकता है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने भी संस्थान की प्रगति की सराहना की। ब्रजेश पाठक ने उम्मीद जताई कि भविष्य में इस संस्थान से चिकित्सा क्षेत्र का नोबेल पुरस्कार भी आ सकता है। आने वाले समय में संस्थान में 1,010 बेड का नया अस्पताल और 350 बेड का ट्रॉमा सेंटर भी प्रस्तावित है।