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योगी सरकार की संत कबीर टेक्सटाइल पार्क योजना: 5 जिलों में 326 एकड़ पर बनेंगे आधुनिक अपैरल हब

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योगी सरकार की संत कबीर टेक्सटाइल पार्क योजना: 5 जिलों में 326 एकड़ पर बनेंगे आधुनिक अपैरल हब

सारांश

योगी सरकार की संत कबीर टेक्सटाइल पार्क योजना सिर्फ घोषणा नहीं — 326 एकड़ भूमि हस्तांतरित, मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली, और वाराणसी की प्री-फ़िज़िबिलिटी रिपोर्ट भी तैयार। पाँच जिलों में PPP मॉडल से बनने वाले ये पार्क यूपी को देश का नया टेक्सटाइल हब बनाने की दिशा में ठोस कदम हैं।

मुख्य बातें

योगी सरकार ने वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संत कबीर नगर और बिजनौर में पाँच टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क विकसित करने की योजना बनाई है।
कुल 326 एकड़ से अधिक भूमि चिह्नित; सभी भूमि पार्सलों के हस्तांतरण को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी है।
सभी परियोजनाएँ PPP (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल पर स्थापित होंगी।
NITRA द्वारा वाराणसी पार्क की प्री-फ़िज़िबिलिटी रिपोर्ट प्रस्तुत; शेष चार की संशोधित रिपोर्ट तैयार हो रही है।
वाराणसी के रामना पार्क के लिए 132 केवी उपकेंद्र और सड़क निर्माण की कार्यवाही प्रगति पर।
योजना का लक्ष्य स्थानीय स्तर पर हज़ारों रोज़गार सृजित करना और यूपी की एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को बल देना।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की औद्योगिक नीति के तहत संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना राज्य के पाँच जिलों में तेज़ी से आकार ले रही है, जिसके लिए 326 एकड़ से अधिक भूमि चिह्नित की जा चुकी है और मंत्रिमंडल की मंजूरी भी मिल चुकी है। यह योजना उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख टेक्सटाइल एवं परिधान विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

किन जिलों में और कितनी भूमि पर बनेंगे पार्क

योजना के अंतर्गत वाराणसी के रामना में 75 एकड़, अमरोहा में 79.825 एकड़, बरेली के बहेड़ी में 79.580 एकड़, संत कबीर नगर के मगहर में 39.490 एकड़ और बिजनौर के नगीना में 52.910 एकड़ भूमि पर पार्क विकसित किए जाएंगे। सभी पाँचों परियोजनाएँ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर स्थापित होंगी। सभी भूमि पार्सलों के हस्तांतरण को मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिल चुकी है।

क्रियान्वयन की स्थिति

परियोजना के क्रियान्वयन के लिए प्राधिकरण गठन की अधिसूचना जारी की जा चुकी है और भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। राष्ट्रीय वस्त्र अनुसंधान संस्था (NITRA) द्वारा वाराणसी पार्क की प्री-फ़िज़िबिलिटी रिपोर्ट प्रस्तुत की जा चुकी है, जबकि शेष चार पार्कों की संशोधित प्री-फ़िज़िबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। उद्योग जगत के सुझावों को शामिल कर इन रिपोर्टों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

वाराणसी के रामना पार्क के लिए संपर्क मार्ग निर्माण की निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद अनुबंध की कार्यवाही प्रगति पर है। बिजली आपूर्ति के लिए 132 केवी उपकेंद्र, ट्रांसमिशन लाइन और 33 केवी विद्युत अवसंरचना की रूपरेखा भी तैयार कर ली गई है।

पर्यावरणीय अनुपालन और मास्टर डेवलपर चयन

योगी सरकार पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप इन परियोजनाओं को विकसित करने पर विशेष ज़ोर दे रही है। पर्यावरण स्वीकृति, भूजल उपयोग और वन विभाग की अनापत्ति से संबंधित प्रक्रियाएँ जारी हैं। गौरतलब है कि शेष चार पार्कों के लिए मास्टर डेवलपर के चयन हेतु PPP आधारित निविदा दस्तावेज़ तैयार किए जा रहे हैं।

रोज़गार और आर्थिक लक्ष्य

राज्य सरकार का मानना है कि यह योजना उत्तर प्रदेश को टेक्सटाइल निर्माण, रेडीमेड गारमेंट्स, तकनीकी वस्त्र और निर्यात के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगी। स्थानीय स्तर पर रोज़गार के हज़ारों अवसर सृजित होने की उम्मीद है और इससे प्रदेश के एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को भी बल मिलेगा। उद्योगों से मिले सकारात्मक प्रतिसाद के बाद सरकार को इन परियोजनाओं में बड़े निवेश की अपेक्षा है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों की पसंदीदा राज्यों की सूची में तेज़ी से उभरा है। संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना के सफल क्रियान्वयन पर ही यह तय होगा कि राज्य टेक्सटाइल क्षेत्र में तमिलनाडु और गुजरात जैसे परंपरागत केंद्रों को कड़ी चुनौती दे पाता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा PPP मॉडल के तहत मास्टर डेवलपर के चयन और निजी निवेश की वास्तविक आमद से होगी। उत्तर प्रदेश में पहले भी बड़े औद्योगिक पार्कों की घोषणाएँ हुई हैं जो क्रियान्वयन की धीमी गति के कारण वर्षों तक कागज़ पर ही रहीं। रोज़गार सृजन के दावों को तब तक सत्यापित नहीं किया जा सकता जब तक पार्कों में वास्तविक उत्पादन शुरू न हो और स्वतंत्र आकलन न हो। तमिलनाडु और गुजरात के स्थापित टेक्सटाइल केंद्रों से प्रतिस्पर्धा में यूपी की सफलता निवेशकों को मिलने वाली सुविधाओं की गुणवत्ता और समयबद्ध डिलीवरी पर निर्भर करेगी।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना क्या है?
यह उत्तर प्रदेश सरकार की एक औद्योगिक पहल है जिसके तहत राज्य के पाँच जिलों — वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संत कबीर नगर और बिजनौर — में 326 एकड़ से अधिक भूमि पर आधुनिक टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क PPP मॉडल पर विकसित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य यूपी को देश के प्रमुख टेक्सटाइल विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
इन पार्कों के लिए कितनी और कहाँ भूमि आवंटित की गई है?
वाराणसी के रामना में 75 एकड़, अमरोहा में 79.825 एकड़, बरेली के बहेड़ी में 79.580 एकड़, संत कबीर नगर के मगहर में 39.490 एकड़ और बिजनौर के नगीना में 52.910 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। सभी भूमि पार्सलों के हस्तांतरण को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी है।
वाराणसी टेक्सटाइल पार्क की तैयारी कहाँ तक पहुँची है?
NITRA द्वारा वाराणसी के रामना पार्क की प्री-फ़िज़िबिलिटी रिपोर्ट प्रस्तुत की जा चुकी है। संपर्क मार्ग निर्माण की निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद अनुबंध की कार्यवाही प्रगति पर है और 132 केवी उपकेंद्र सहित विद्युत अवसंरचना की रूपरेखा तैयार की जा चुकी है।
इस योजना से रोज़गार और अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?
राज्य सरकार के अनुसार इन पार्कों से स्थानीय स्तर पर हज़ारों रोज़गार के अवसर सृजित होंगे और यूपी की एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को बल मिलेगा। टेक्सटाइल निर्माण, रेडीमेड गारमेंट्स, तकनीकी वस्त्र और निर्यात क्षेत्र में निवेश आकर्षित करना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है।
शेष चार पार्कों के लिए आगे क्या प्रक्रिया होगी?
शेष चार पार्कों की संशोधित प्री-फ़िज़िबिलिटी रिपोर्ट उद्योग जगत के सुझावों को शामिल कर तैयार की जा रही है। मास्टर डेवलपर के चयन के लिए PPP आधारित निविदा दस्तावेज़ भी तैयार किए जा रहे हैं, और पर्यावरण स्वीकृति तथा वन विभाग की अनापत्ति से संबंधित प्रक्रियाएँ जारी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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