पंचदारला हेरिटेज साइट के पास माइनिंग पर वाईएसआरसीपी का राज्यसभा में हंगामा, केंद्र से तत्काल दखल की मांग
सारांश
मुख्य बातें
वाईएसआरसीपी नेता वाईवी. सुब्बा रेड्डी ने 14 अगस्त 2026 को राज्यसभा में आंध्र प्रदेश के पंचदारला हेरिटेज क्षेत्र के निकट जारी माइनिंग गतिविधियों का मुद्दा उठाया और केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने संरक्षित बौद्ध स्थल, प्राचीन धर्मलिंगेश्वर स्वामी मंदिर और पाँच पवित्र प्राकृतिक जल धाराओं की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।
मुख्य घटनाक्रम
मिनरल्स अमेंडमेंट बिल, 2026 पर चर्चा के दौरान सुब्बा रेड्डी ने सदन का ध्यान पंचदारला में हो रही माइनिंग गतिविधियों की ओर खींचा। उन्होंने बताया कि पंचदारला की सांस्कृतिक पहचान मंदिर परिसर से निकलने वाली पाँच प्राकृतिक जल धाराओं से गहराई से जुड़ी है, जो अब खनन के कारण खतरे में हैं।
सुब्बा रेड्डी ने माँग की कि जब तक इलाके का तत्काल निरीक्षण, पर्यावरणीय प्रभाव का व्यापक आकलन और जल धाराओं का वैज्ञानिक हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन पूरा न हो जाए, तब तक सभी माइनिंग गतिविधियाँ और संबंधित योजनाएँ तत्काल प्रभाव से रोकी जाएँ। उन्होंने कानूनी एवं पर्यावरणीय मंजूरियों की जाँच की भी माँग की।
अन्य वाईएसआरसीपी नेताओं की भूमिका
इससे पहले वाईएसआरसीपी सांसद गोला बाबूराव, अराकू सांसद गुम्मा तनुजा रानी, पूर्व मंत्री गुडीवाड़ा अमरनाथ और अन्य नेताओं ने केंद्रीय मंत्रियों को माइनिंग के मुद्दे पर शिकायतें सौंपी थीं।
बाबूराव ने आरोप लगाया कि राज्य में गठबंधन सरकार के नेता प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं और पुराने विशाखापत्तनम जिले में पहाड़ियों व मंदिरों के आसपास के इलाकों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है।
जाँच और आधिकारिक आश्वासन
तनुजा रानी ने बताया कि केंद्रीय खान मंत्री जी. किशन रेड्डी और केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को स्थिति से अवगत कराया गया था। उन्होंने आश्वासन दिया था कि एक केंद्रीय टीम माइनिंग गतिविधियों की जाँच करेगी और रिपोर्ट के आधार पर 10 दिनों के भीतर कार्रवाई शुरू की जाएगी।
आधिकारिक जाँच में यह भी सामने आया है कि माइनिंग और ब्लास्टिंग से उत्पन्न कंपन का असर पवित्र जल धाराओं पर पड़ रहा है। इसके अलावा, स्वीकृत माइनिंग योजना से अधिक — कथित तौर पर लगभग दो लाख टन अतिरिक्त बजरी — निकाली जा चुकी है।
खनन नीति पर व्यापक बहस
सुब्बा रेड्डी ने मिनरल्स अमेंडमेंट बिल पर बोलते हुए कहा कि खनिज संपदा जनता की है और इसके प्रबंधन में पूर्ण पारदर्शिता अनिवार्य है। उन्होंने तर्क दिया कि आर्थिक विकास के लिए माइनिंग का स्पष्ट ढाँचा जरूरी है, लेकिन इससे राज्य के राजस्व, स्थानीय आजीविका या पर्यावरण संरक्षण से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
उन्होंने यह भी आगाह किया कि अधिकारों का राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीकरण जमीनी स्तर पर अवैध और पर्यावरण-विरोधी माइनिंग के खिलाफ कार्रवाई को कमजोर नहीं करना चाहिए। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में विरासत स्थलों के निकट खनन गतिविधियों को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञ और संरक्षणवादी चिंता जता रहे हैं।
सीबीआई जाँच की माँग
पूर्व मंत्री गुडीवाड़ा अमरनाथ ने अनाकापल्ली सांसद सी.एम. की भूमिका की सीबीआई जाँच की माँग की। यह माँग माइनिंग विवाद को राजनीतिक आयाम देती है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे के और तीखे होने के संकेत देती है।