मारुति सुजुकी ने मानेसर में चालू किया 300 KW ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर प्लांट, FY31 तक उत्सर्जन आधा करने का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
मारुति सुजुकी इंडिया ने 24 सितंबर 2026 को हरियाणा के मानेसर विनिर्माण संयंत्र में 300 किलोवाट क्षमता वाले ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर प्लांट को औपचारिक रूप से चालू कर दिया। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी ने इसे विनिर्माण प्रक्रियाओं में कार्बन उत्सर्जन घटाने और स्वच्छ ऊर्जा को औद्योगिक उपयोग में लाने की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया है।
प्लांट कैसे काम करेगा
कंपनी के अनुसार, यह पायलट परियोजना नवीकरणीय ऊर्जा — विशेष रूप से मानेसर संयंत्र में पहले से स्थापित सौर ऊर्जा प्रणाली — के माध्यम से ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करेगी। छुट्टियों और कम उत्पादन वाले दिनों में जब सौर ऊर्जा का पूरा उपयोग नहीं हो पाता, उस अतिरिक्त बिजली को इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के ज़रिए हाइड्रोजन में बदला जाएगा।
इस प्रकार उत्पादित हाइड्रोजन को संग्रहित कर प्राकृतिक गैस के साथ मिश्रित करके विनिर्माण गतिविधियों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। यह व्यवस्था एक साथ दो समस्याओं का समाधान करती है — सौर ऊर्जा की बर्बादी रोकना और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाना।
व्यापक विस्तार की योजना
मारुति सुजुकी का कहना है कि मानेसर का यह प्लांट एक लर्निंग प्लेटफॉर्म की भूमिका निभाएगा। इससे अर्जित तकनीकी अनुभव को हरियाणा और गुजरात स्थित अन्य विनिर्माण इकाइयों में ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक के व्यापक उपयोग के लिए आधार बनाया जाएगा।
गौरतलब है कि यह पहल केंद्र सरकार के राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप है, जो भारत को वैश्विक स्तर पर ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाने की परिकल्पना रखता है।
सीईओ ताकेउची का बयान
मारुति सुजुकी इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिसाशी ताकेउची ने कहा कि कंपनी ने अपने उत्पादों के साथ-साथ विनिर्माण प्रक्रियाओं के लिए भी मल्टी-पाथवे रणनीति अपनाई है। उन्होंने बताया कि कंपनी ग्रीन हाइड्रोजन के अतिरिक्त सौर ऊर्जा, बायोगैस और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में भी निवेश कर रही है।
ताकेउची ने कहा कि भारत तेज़ी से वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है और भविष्य में प्रतिस्पर्धात्मकता केवल लागत और गुणवत्ता से नहीं, बल्कि कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता से भी तय होगी। उनके अनुसार कंपनी अभी से ऐसी क्षमताएँ विकसित कर रही है जो भविष्य में कम-कार्बन और ऊर्जा-दक्ष विनिर्माण इकोसिस्टम बनाने में सहायक होंगी।
उत्सर्जन कटौती का लक्ष्य
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उसने अपने विनिर्माण परिचालनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। वित्त वर्ष 2030-31 तक उत्सर्जन को वर्तमान 6.15 लाख टन से घटाकर 2.66 लाख टन तक लाने का लक्ष्य है — यानी लगभग 57% की कमी।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऑटोमोटिव उद्योग पर कार्बन-तटस्थ विनिर्माण की ओर बढ़ने का दबाव तेज़ी से बढ़ रहा है और यूरोपीय आपूर्ति श्रृंखला मानक भारतीय उत्पादकों के लिए भी अप्रत्यक्ष बाधाएँ बन रहे हैं। मानेसर का यह प्लांट उस दिशा में पहला ठोस परिचालन कदम है।