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क्या 86 प्रतिशत भारतीयों के लिए ज्वेलरी सबसे अहम संपत्ति है?

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क्या 86 प्रतिशत भारतीयों के लिए ज्वेलरी सबसे अहम संपत्ति है?

सारांश

भारत में 86 प्रतिशत लोग सोने और आभूषणों को संपत्ति बनाने का उत्तम साधन मानते हैं। नई पीढ़ी का झुकाव हल्के और रोज पहनने वाले गहनों की ओर है, जो फैशन और निवेश दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। जानें ज्वेलरी मार्केट के बदलते रुख के बारे में।

मुख्य बातें

86 प्रतिशत भारतीय ज्वेलरी को संपत्ति बनाने का साधन मानते हैं।
नई पीढ़ी हल्के और रोज पहनने वाले गहनों की ओर बढ़ रही है।
ज्वेलरी अब केवल शादी के लिए नहीं, बल्कि फैशन और पहचान का हिस्सा है।
पुरुष और 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोग अधिकतर निवेश के लिए गहने खरीदते हैं।
ऑनलाइन खरीदारी का असर बढ़ रहा है, लेकिन लोग दुकानों पर खरीदारी को अधिक भरोसेमंद मानते हैं।

नई दिल्ली, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत में लगभग 86 प्रतिशत लोग सोने और आभूषणों को संपत्ति बनाने का एक अच्छा साधन मानते हैं। यह आंकड़ा लगभग म्यूचुअल फंड और शेयरों जैसे बाजार से जुड़े निवेश विकल्पों के बराबर है, जिन्हें 87 प्रतिशत लोग पसंद करते हैं।

यह स्पष्ट है कि गहनों की अहमियत आज भी बहुत अधिक है। बुधवार को जारी डेलॉइट इंडिया की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

डेलॉइट इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ज्वेलरी मार्केट तेजी से बदल रहा है। अब लोग आभूषणों को केवल शादी या परंपरा से नहीं जोड़ते, बल्कि इसे अपनी पहचान, जीवनशैली और रोजमर्रा के पहनावे का हिस्सा भी मानते हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 56 प्रतिशत लोग ज्वेलरी को निवेश और फैशन, दोनों के रूप में देखते हैं। वहीं, 28 प्रतिशत लोग केवल निवेश के रूप में गहने खरीदते हैं। इससे पता चलता है कि आभूषणों की भूमिका अब केवल सेविंग्स तक सीमित नहीं रह गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, पुरुष और 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोग आभूषणों को अधिकतर निवेश के रूप में खरीदते हैं। वहीं, युवा वर्ग गहनों में स्टाइल, अपने हिसाब से डिजाइन और विभिन्न प्रकार से पहनने की सुविधा को ज्यादा महत्व देता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जेनज़ी और युवा पीढ़ी तेजी से हल्के और रोज पहनने वाले गहनों की ओर बढ़ रही है। 51 प्रतिशत जेनज़ी को चांदी और 34 प्रतिशत को प्लेटिनम वाली ज्वेलरी पसंद है। करीब 49 प्रतिशत लोग हल्के और सादे गहनों को भारी और ज्यादा सजावटी गहनों से ज्यादा पसंद करते हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 45 प्रतिशत जेनज़ी और युवा सिल्वर की ज्वेलरी में निवेश करना पसंद करते हैं। इसकी वजह है अच्छा डिजाइन, कम कीमत और आसानी से खरीदना। अब चांदी को सोने के साथ रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए भी चुना जा रहा है।

डेलॉइट इंडिया के अनुसार, पहले भारत में लगभग 70 प्रतिशत गहने शादियों के लिए खरीदे जाते थे, लेकिन अब यह समीकरण बदल रहा है। युवा जन्मदिन और सालगिरह (38 प्रतिशत), रोजाना और ऑफिस में पहनने वाले परिधान (32 प्रतिशत) और पदोन्नति व पढ़ाई जैसी करियर संबंधी उपलब्धियों के लिए आभूषण खरीदते हैं।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि 49 प्रतिशत लोग अंगूठियां, चेन और कान की बालियां जैसे गहनों को निजी और गैर-धार्मिक मौकों के लिए पसंद करते हैं, जो पारंपरिक भारी गहनों से ज्यादा हैं।

हालांकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का असर बढ़ रहा है, लेकिन गहनों के मामले में लोग अब भी दुकान पर जाकर उसे खरीदना ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में आभूषण उद्योग की तरक्की के लिए बेहतर कामकाज, सही योजना और भरोसे पर ध्यान देना सबसे जरूरी होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह हमारी संस्कृति और पहचान का भी हिस्सा है। युवाओं का हल्के और रोजमर्रा के गहनों की ओर बढ़ना दर्शाता है कि वे फैशन और निवेश को एक साथ देख रहे हैं।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में ज्वेलरी की अहमियत क्या है?
भारत में ज्वेलरी को संपत्ति बनाने का एक महत्वपूर्ण साधन माना जाता है, जिसमें 86 प्रतिशत लोग रुचि रखते हैं।
नई पीढ़ी किस प्रकार के गहनों को पसंद करती है?
नई पीढ़ी हल्के और रोज पहनने वाले गहनों को पसंद करती है, जिसमें चांदी और प्लेटिनम शामिल हैं।
क्या ज्वेलरी केवल शादी के लिए खरीदी जाती है?
नहीं, अब ज्वेलरी को जन्मदिन, सालगिरह और करियर संबंधी उपलब्धियों के लिए भी खरीदा जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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