अमूल ने घी-मक्खन के दाम बढ़ाए: 1 किलो घी अब ₹680, नई कीमतें तत्काल लागू
सारांश
मुख्य बातें
अमूल ने 4 नवंबर 2026 को घी और मक्खन की कीमतों में ₹50 तक की बढ़ोतरी की घोषणा की, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। इस संशोधन के बाद 1 किलो अमूल घी (कार्टन) की कीमत ₹630 से बढ़कर ₹680 हो गई है। देश के सबसे बड़े सहकारी डेयरी ब्रांड का यह कदम ऐसे समय में आया है जब डेयरी उत्पादों की कीमतें पहले से ही आम उपभोक्ताओं पर दबाव बना रही हैं।
नई कीमतें: पूरा विवरण
अमूल प्योर घी 500 ग्राम पाउच की कीमत ₹20 बढ़कर ₹325 से ₹345 हो गई है। अमूल बटर 100 ग्राम पैकेट की कीमत ₹3 की बढ़ोतरी के साथ ₹63 से ₹66 हो गई है। अमूल बटर 500 ग्राम पैकेट अब ₹310 की जगह ₹325 में मिलेगा, यानी ₹15 की वृद्धि।
यह बढ़ोतरी घरेलू बजट पर सीधा असर डालेगी, खासकर उन परिवारों पर जो खाना पकाने में घी का नियमित उपयोग करते हैं।
कर्नाटक में नंदिनी दूध भी महंगा
इस महीने की शुरुआत में कर्नाटक में नंदिनी दूध की कीमतें ₹8 प्रति लीटर बढ़ाई गई हैं। साथ ही दही की कीमत ₹54 प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर ₹68 प्रति किलोग्राम कर दी गई है।
कर्नाटक सरकार और कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) का कहना है कि यह वृद्धि डेयरी किसानों को बेहतर आय सुनिश्चित करने के लिए जरूरी थी।
मुख्यमंत्री शिवकुमार का बचाव
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने नंदिनी मूल्य वृद्धि का बचाव करते हुए कहा कि यह फैसला किसानों और पशुओं की सुरक्षा के लिए अनिवार्य था। उन्होंने बताया कि राज्य में सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण दूध उत्पादन प्रभावित हो रहा है और पशु चारे की लागत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
शिवकुमार ने कहा, 'यदि किसानों की आय पर्याप्त नहीं होगी तो वे पशुओं के चारे पर खर्च कम करने को मजबूर होंगे, जिसका सीधा असर दुग्ध उत्पादन और पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ेगा।' उन्होंने यह भी बताया कि किसानों की ओर से ₹12 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की माँग थी, जबकि पड़ोसी राज्यों में दूध पहले से महंगा है।
आम जनता पर असर
डेयरी उत्पादों की यह बढ़ोतरी घरेलू रसोई बजट पर दोहरा दबाव डालती है — एक ओर अमूल के घी-मक्खन महंगे हुए हैं, दूसरी ओर कर्नाटक जैसे राज्यों में दूध और दही की कीमतें बढ़ी हैं। गौरतलब है कि डेयरी महंगाई पहले से ही खाद्य मुद्रास्फीति के प्रमुख कारकों में गिनी जाती रही है।
आगे चलकर यह देखना होगा कि अन्य डेयरी ब्रांड भी अमूल की राह पर चलते हैं या नहीं, और केंद्र सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कोई कदम उठाती है।