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जोन्नागिरी गोल्ड फील्ड्स: आंध्र प्रदेश में ₹405 करोड़ के निवेश से सोने का व्यावसायिक उत्पादन शुरू

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जोन्नागिरी गोल्ड फील्ड्स: आंध्र प्रदेश में ₹405 करोड़ के निवेश से सोने का व्यावसायिक उत्पादन शुरू

सारांश

आंध्र प्रदेश में ₹405 करोड़ के निवेश से जोन्नागिरी गोल्ड फील्ड्स में व्यावसायिक सोना उत्पादन शुरू हो गया है — देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के गोल्ड माइनिंग वेंचर से। मुख्यमंत्री नायडू ने 'सुवर्णगिरि' की ऐतिहासिक पहचान को पुनर्जीवित करने का संकल्प लेते हुए दूसरी यूनिट की आधारशिला भी रखी।

मुख्य बातें

चंद्रबाबू नायडू ने 24 जून 2026 को कुरनूल जिले के जोन्नागिरी में सोने की माइनिंग व प्रोसेसिंग परियोजना का उद्घाटन किया।
परियोजना में ₹405 करोड़ का निवेश; शुरुआती उत्पादन क्षमता 400 किलोग्राम प्रतिवर्ष, जो अंततः 2 टन तक पहुँचेगी।
राज्य सरकार को खनन से निकले सोने पर 4% रॉयल्टी मिलेगी; लगभग 700 लोगों को रोज़गार मिलने की उम्मीद।
परियोजना के लिए 1,500 एकड़ भूमि आवंटित; पहले चरण में 600 एकड़ पर कार्य शुरू।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जोन्नागिरी का नाम पुनः 'सुवर्णगिरि' रखा जाएगा और इसे मॉडल गाँव के रूप में विकसित किया जाएगा।
यह देश का सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का गोल्ड माइनिंग वेंचर बताया जा रहा है।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 24 जून 2026 को कुरनूल जिले के जोन्नागिरी में देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के गोल्ड माइनिंग वेंचर का उद्घाटन किया, जिससे आंध्र प्रदेश में पहली बार व्यावसायिक स्तर पर सोने का उत्पादन आरंभ हो गया। ₹405 करोड़ के निवेश से स्थापित यह परियोजना राज्य के खनन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पड़ाव है।

परियोजना का विस्तार और उत्पादन क्षमता

जियो मैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और डेक्कन गोल्ड माइन्स लिमिटेड द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित इस फैसिलिटी में शुरुआती चरण में सालाना 400 किलोग्राम सोने का उत्पादन होगा। राज्य सरकार के अनुसार, अगले वर्ष यह क्षमता बढ़कर 900 किलोग्राम हो जाएगी और अंततः 2 टन प्रतिवर्ष तक पहुँचने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री नायडू ने इस अवसर पर परियोजना की दूसरी यूनिट की आधारशिला भी रखी।

राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए कुल 1,500 एकड़ भूमि आवंटित की है, जिसमें पहले चरण में 600 एकड़ पर माइनिंग कार्य प्रारंभ हो चुका है। परियोजना से लगभग 700 लोगों के लिए रोज़गार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।

राजस्व और आर्थिक महत्व

राज्य सरकार को खदान से निकाले गए सोने की कीमत पर 4 प्रतिशत रॉयल्टी प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री नायडू ने इस संदर्भ में बताया कि भारत अभी 800 टन सोना आयात करता है और तेल के बाद यह देश का सबसे बड़ा आयात मद है। उन्होंने कहा, 'यहाँ हर साल एक टन सोने का उत्पादन होगा। इससे हमारे विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने में मदद मिलेगी और स्थानीय युवाओं के लिए बड़ी संख्या में रोज़गार के अवसर भी पैदा होंगे।'

ऐतिहासिक विरासत और 'सुवर्णगिरि' की वापसी

यह ऐसे समय में आया है जब रायलसीमा क्षेत्र को आर्थिक पुनरुद्धार की दरकार है। मुख्यमंत्री नायडू ने बताया कि जोन्नागिरी को प्राचीन काल में 'सुवर्णगिरि' के नाम से जाना जाता था और यह सम्राट अशोक की चार राजधानियों में से एक थी। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में स्थित अशोक के येर्रागुडी शिलालेख इस इलाके के समृद्ध अतीत की साक्षी देते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि श्री कृष्णदेवराय के शासनकाल में रायलसीमा रत्नों के व्यापार का प्रमुख केंद्र थी और राज्य को विश्वप्रसिद्ध कोहिनूर हीरा देने का गौरव प्राप्त है।

नायडू ने घोषणा की कि जोन्नागिरी गाँव का नाम पुनः 'सुवर्णगिरि' रखा जाएगा और इसे 'सुवर्णगिरि मॉडल गाँव' के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'हम रायलसीमा को रत्नला सीमा में बदलने का अपना वादा पूरा कर रहे हैं।'

महिला सशक्तिकरण और कौशल विकास

मुख्यमंत्री ने माइनिंग साइट पर स्थापित ट्रेनिंग सेंटर का भी दौरा किया, जहाँ महिलाओं और युवाओं को सिमुलेटर पर भारी वाहन चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने खनिज सामग्री ढोने वाले भारी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जियो-मैसूर के चेयरमैन प्रभाकरन और एमडी नवीन लाल चंद ने मुख्यमंत्री को उत्पादन प्रक्रिया के प्रत्येक चरण की विस्तृत जानकारी दी।

आगे की राह

परियोजना की दूसरी यूनिट की आधारशिला रखे जाने के साथ ही जोन्नागिरी गोल्ड फील्ड्स का विस्तार अगले चरण में प्रवेश कर चुका है। उत्पादन क्षमता के 2 टन प्रतिवर्ष तक पहुँचने पर यह परियोजना भारत के सोने के आयात पर निर्भरता कम करने में उल्लेखनीय योगदान दे सकती है। रायलसीमा के इस खनन केंद्र का भविष्य अब उस ऐतिहासिक विरासत की पुनर्स्थापना का प्रतीक बन रहा है, जिसे सदियों पहले 'सुवर्णगिरि' के नाम से पहचाना जाता था।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी उत्पादन लक्ष्यों की समयबद्ध पूर्ति होगी। ₹405 करोड़ का निवेश और 700 रोज़गार का आँकड़ा रायलसीमा जैसे पिछड़े क्षेत्र के लिए सकारात्मक है, पर भारत की सालाना 800 टन सोने की आयात ज़रूरत के सामने 2 टन की अधिकतम क्षमता बेहद सीमित है। परियोजना का दीर्घकालिक प्रभाव तभी सार्थक होगा जब दूसरी और आगामी यूनिटें समयसीमा में चालू हों और रॉयल्टी राजस्व स्थानीय विकास में पारदर्शी रूप से लगाया जाए।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जोन्नागिरी गोल्ड फील्ड्स परियोजना क्या है?
यह आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में ₹405 करोड़ के निवेश से स्थापित देश का सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का गोल्ड माइनिंग वेंचर है। इसे जियो मैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और डेक्कन गोल्ड माइन्स लिमिटेड ने मिलकर स्थापित किया है।
जोन्नागिरी में सोने का उत्पादन कितना होगा?
शुरुआती चरण में सालाना 400 किलोग्राम उत्पादन होगा, जो अगले वर्ष 900 किलोग्राम और अंततः 2 टन प्रतिवर्ष तक पहुँचने का लक्ष्य है। राज्य सरकार के अनुसार यह क्षमता विस्तार चरणबद्ध तरीके से होगा।
इस परियोजना से आंध्र प्रदेश को क्या फायदा होगा?
राज्य सरकार को खनन से निकाले गए सोने पर 4% रॉयल्टी मिलेगी और लगभग 700 लोगों को प्रत्यक्ष रोज़गार मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, सोने के घरेलू उत्पादन से विदेशी मुद्रा भंडार की बचत में भी सहायता मिलेगी।
जोन्नागिरी को 'सुवर्णगिरि' क्यों कहा जाता है?
प्राचीन काल में इस क्षेत्र को 'सुवर्णगिरि' के नाम से जाना जाता था और यह सम्राट अशोक की चार राजधानियों में से एक था। मुख्यमंत्री नायडू ने घोषणा की है कि गाँव का नाम पुनः 'सुवर्णगिरि' रखा जाएगा और इसे मॉडल गाँव के रूप में विकसित किया जाएगा।
परियोजना के लिए कितनी ज़मीन आवंटित की गई है?
राज्य सरकार ने कुल 1,500 एकड़ भूमि आवंटित की है, जिसमें पहले चरण में 600 एकड़ पर माइनिंग कार्य शुरू हो चुका है। शेष भूमि विस्तार चरणों के लिए आरक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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