31 जुलाई 2026
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शहरी विकास मंत्रालय का पुनर्गठन: दो विभागों में बँटा, मनोहर लाल बोले — शहरी शासन होगा सशक्त

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शहरी विकास मंत्रालय का पुनर्गठन: दो विभागों में बँटा, मनोहर लाल बोले — शहरी शासन होगा सशक्त

सारांश

केंद्र सरकार ने आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय को दो स्वतंत्र विभागों — DCD और DUD — में विभाजित कर दिया है। मंत्री मनोहर लाल के अनुसार यह कदम तेज़ शहरीकरण की चुनौतियों से निपटने और 'विकसित भारत 2047' के विज़न को ज़मीन पर उतारने की दिशा में एक संरचनात्मक बदलाव है।

मुख्य बातें

आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय को 31 जुलाई को दो विभागों में पुनर्गठित किया गया — पूंजी विकास विभाग (DCD) और शहरी विकास विभाग (DUD) ।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक में यह जानकारी दी।
पुनर्गठन का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता , संस्थागत क्षमता और शहरी शासन को सशक्त बनाना है।
पूंजी विकास विभाग की सचिव डी.
थारा ने सतत शहरी विकास के रोडमैप पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
सांसद टोखन साहू ने इसे 'विकसित भारत 2047' के विज़न से जोड़ा।

केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य तथा विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने शुक्रवार, 31 जुलाई को नई दिल्ली में संसदीय परामर्शदात्री समिति की शहरी नियोजन पर आयोजित बैठक की अध्यक्षता की और घोषणा की कि शहरी प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय को अब दो स्वतंत्र विभागों में पुनर्गठित किया गया है। यह कदम तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण की चुनौतियों से निपटने और संस्थागत क्षमता को मज़बूत करने की दिशा में सरकार का ताज़ा प्रयास है।

पुनर्गठन में क्या बदला

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मंत्रालय के पुनर्गठन के तहत दो नए विभाग गठित किए गए हैं — पूंजी विकास विभाग (DCD) और शहरी विकास विभाग (DUD)। इस ढाँचे का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना, संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ करना और विविध शहरी ज़रूरतों पर अधिक केंद्रित तरीके से ध्यान देना है। गौरतलब है कि यह पहली बार है जब मंत्रालय को इस प्रकार के द्विभागीय ढाँचे में विभाजित किया गया है।

मंत्री का विज़न: रहने योग्य और आपदा-रोधी शहर

मनोहर लाल ने बैठक में स्पष्ट किया कि मंत्रालय की समस्त शहरी नियोजन पहलों का केंद्रीय लक्ष्य देश में रहने योग्य, आपदा-रोधी और नागरिक-केंद्रित शहरों का विकास करना है। उन्होंने कहा कि प्रभावी शहरी नियोजन, मज़बूत शहरी प्रशासन, जल सुरक्षा और निरंतर क्षमता निर्माण — ये सभी तत्व संतुलित शहरी विकास के लिए अपरिहार्य हैं।

मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि सरकार शहरी विकास के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपना रही है, जिसमें शहरी नियोजन, बुनियादी ढाँचे का विकास, बेहतर प्रशासन और गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक सेवाओं को एकीकृत किया जा रहा है। इन प्रयासों का अंतिम उद्देश्य ऐसे शहर विकसित करना है जो पर्यावरण के अनुकूल, आर्थिक रूप से सक्षम और आधुनिक तकनीक से लैस हों।

संसदीय समिति की भूमिका और सुझाव

बैठक में संसदीय परामर्शदात्री समिति के सदस्यों ने शहरी नियोजन और प्रशासन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। केंद्रीय मंत्री ने इन सुझावों का स्वागत किया और भरोसा दिलाया कि मंत्रालय की योजनाओं को और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँगे। पूंजी विकास विभाग की सचिव डी. थारा ने बैठक में मंत्रालय की शहरी नियोजन संबंधी पहलों और सतत शहरी विकास के रोडमैप पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

विकसित भारत 2047 से जुड़ाव

सांसद टोखन साहू ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के विज़न को साकार करने के लिए मंत्रालय देश भर में योजनाबद्ध, टिकाऊ और भविष्य की ज़रूरतों के अनुरूप शहरी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार कार्यरत है। यह पुनर्गठन उसी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

आगे की राह

नए द्विभागीय ढाँचे के तहत दोनों विभाग अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से कार्य करेंगे, जिससे नीति निर्माण और क्रियान्वयन में स्पष्टता आने की उम्मीद है। मंत्री ने संकेत दिया कि सहयोगात्मक नीति निर्माण और रचनात्मक संवाद इस पूरी प्रक्रिया की आधारशिला रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह संरचनात्मक बदलाव ज़मीनी स्तर पर शहरी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाएगा। भारत के शहर पहले से ही अनियोजित विस्तार, जल संकट और कमज़ोर बुनियादी ढाँचे की मार झेल रहे हैं — और इन समस्याओं की जड़ें विभागीय संरचना से कहीं गहरी हैं। 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य और ज़मीनी शहरी वास्तविकता के बीच की खाई को पाटने के लिए महज पुनर्गठन नहीं, बल्कि वित्तीय हस्तांतरण, स्थानीय निकायों को सशक्तिकरण और जवाबदेही तंत्र की भी ज़रूरत है — जिनका इस घोषणा में उल्लेख नहीं है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शहरी विकास मंत्रालय के पुनर्गठन में क्या बदला है?
आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय को अब दो स्वतंत्र विभागों — पूंजी विकास विभाग (DCD) और शहरी विकास विभाग (DUD) — में विभाजित किया गया है। यह बदलाव प्रशासनिक दक्षता और संस्थागत क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है।
यह पुनर्गठन कब और किसने घोषित किया?
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने 31 जुलाई को नई दिल्ली में संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह घोषणा की। बैठक का विषय शहरी नियोजन था।
DCD और DUD में क्या अंतर है?
आधिकारिक बयान के अनुसार पूंजी विकास विभाग (DCD) और शहरी विकास विभाग (DUD) दोनों अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से कार्य करेंगे। दोनों का साझा लक्ष्य रहने योग्य, आपदा-रोधी और नागरिक-केंद्रित शहरों का विकास करना है।
इस पुनर्गठन से आम नागरिकों को क्या फायदा होगा?
सरकार के अनुसार इस बदलाव से शहरी सेवाओं की गुणवत्ता, जल सुरक्षा और बुनियादी ढाँचे के विकास में सुधार आएगा। नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने और पर्यावरण के अनुकूल शहर विकसित करना इसका मुख्य लक्ष्य बताया गया है।
यह पुनर्गठन 'विकसित भारत 2047' से कैसे जुड़ा है?
सांसद टोखन साहू ने बैठक में कहा कि यह पुनर्गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के विज़न का हिस्सा है। इसके तहत देश भर में योजनाबद्ध, टिकाऊ और भविष्य की ज़रूरतों के अनुरूप शहरी विकास को बढ़ावा देने का लक्ष्य है।
राष्ट्र प्रेस
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