MCX CEO प्रवीणा राय: कमोडिटी बाजार 'विकसित भारत' की नींव, जोखिम प्रबंधन जागरूकता अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) की प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रवीणा राय ने 30 जुलाई 2026 को मुंबई में आयोजित ग्लोबल कमोडिटी कॉन्क्लेव 2026 के दौरान कहा कि भारत का कमोडिटी बाजार निरंतर विस्तार की राह पर है और 'विकसित भारत' के दीर्घकालिक लक्ष्य को साकार करने में इसकी केंद्रीय भूमिका होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी नीतियों और नियामक संस्थाओं का ध्यान अब कमोडिटी बाजार को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और जोखिम प्रबंधन के दृष्टिकोण से सक्षम बनाने पर केंद्रित है।
कॉन्क्लेव का उद्देश्य और स्वरूप
प्रवीणा राय ने बताया कि इस कॉन्क्लेव का मूल उद्देश्य फिजिकल और फाइनेंशियल कमोडिटी बाजार के सभी प्रतिभागियों को एक साझा मंच पर लाना है। उन्होंने कहा कि कमोडिटी बाजार की बुनियादी जानकारी तो उद्योग जगत में मौजूद है, परंतु इसका प्रभावी और रणनीतिक उपयोग कैसे किया जाए — इस बारे में व्यापक जागरूकता अभी भी अपेक्षित स्तर से कम है।
उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि उद्योगों और संस्थागत निवेशकों को कमोडिटी डेरिवेटिव्स के माध्यम से मूल्य उतार-चढ़ाव से सुरक्षा और संकट काल में बेहतर जोखिम प्रबंधन के तरीके समझाना इस आयोजन की प्राथमिकता है। कॉन्क्लेव में विश्व के प्रमुख एक्सचेंजों के प्रतिनिधि, अर्थशास्त्री, विश्लेषक, ब्रोकर, नियामक, नीति-निर्माता और शिक्षाविद भाग ले रहे हैं।
रिटेल निवेशकों के लिए विशेष सत्र
प्रवीणा राय ने बताया कि कॉन्क्लेव के तीसरे दिन आधे दिन का एक विशेष सत्र विशेष रूप से रिटेल निवेशकों के लिए आयोजित किया गया है। इस सत्र में नए निवेशकों को सोना-चांदी, धातु और ऊर्जा जैसे कमोडिटी वर्गों के बाजार रुझानों को समझने, कमोडिटी डेरिवेटिव्स में निवेश की शुरुआत करने, तथा वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं और भारतीय आर्थिक परिस्थितियों के बाजार पर प्रभाव का विश्लेषण करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
भारत की वैश्विक कमोडिटी बाजार में संभावनाएँ
कमोडिटी पार्टिसिपेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CPAI) के वैकल्पिक अध्यक्ष अजय गर्ग ने कहा कि भारत का लक्ष्य वैश्विक कमोडिटी बाजार में 'प्राइस सेटर' की भूमिका निभाना है और देश इस दिशा में तेज़ गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी से पूर्व देश में लगभग 4 करोड़ डीमैट खाते थे, जो अब बढ़कर 23 करोड़ से अधिक हो चुके हैं — यह भारतीय निवेशकों की बढ़ती वित्तीय भागीदारी का सशक्त प्रमाण है।
गर्ग ने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर कमोडिटी बाजार का आकार इक्विटी बाजार से भी बड़ा है, जबकि भारत में यह अभी इक्विटी बाजार के लगभग दसवें हिस्से के बराबर है। उन्होंने कहा कि भारत खाद्यान्न और सोना-चांदी जैसी प्रमुख कमोडिटीज का बड़े पैमाने पर आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में भारत की भूमिका विस्तार के लिए पर्याप्त संभावनाएँ मौजूद हैं।
आगे की राह: अगले तीन से पाँच वर्ष निर्णायक
अजय गर्ग ने विश्वास व्यक्त किया कि अगले तीन से पाँच वर्षों में भारत का कमोडिटी बाजार वर्तमान की तुलना में कहीं अधिक सक्रिय और सुदृढ़ होगा। उन्होंने कहा कि नए उत्पादों की उपलब्धता, निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और जागरूकता अभियान मिलकर भारत को वैश्विक कमोडिटी परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में स्थापित करेंगे। यह कॉन्क्लेव केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि भविष्य की ठोस कार्ययोजना तैयार करने का अवसर भी है।