30 जुलाई 2026
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MCX CEO प्रवीणा राय: कमोडिटी बाजार 'विकसित भारत' की नींव, जोखिम प्रबंधन जागरूकता अनिवार्य

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MCX CEO प्रवीणा राय: कमोडिटी बाजार 'विकसित भारत' की नींव, जोखिम प्रबंधन जागरूकता अनिवार्य

सारांश

ग्लोबल कमोडिटी कॉन्क्लेव 2026 में MCX CEO प्रवीणा राय का स्पष्ट संदेश — कमोडिटी बाजार 'विकसित भारत' की यात्रा का अनिवार्य हिस्सा है। डीमैट खाते 4 करोड़ से 23 करोड़ पार, फिर भी कमोडिटी बाजार इक्विटी का मात्र दसवाँ हिस्सा — यही अंतर अगले पाँच वर्षों की सबसे बड़ी संभावना भी है।

मुख्य बातें

MCX की CEO प्रवीणा राय ने 30 जुलाई 2026 को ग्लोबल कमोडिटी कॉन्क्लेव 2026 में कमोडिटी बाजार को 'विकसित भारत' के लक्ष्य का अहम स्तंभ बताया।
कॉन्क्लेव का लक्ष्य फिजिकल और फाइनेंशियल कमोडिटी बाजार के हितधारकों को एकजुट कर कमोडिटी डेरिवेटिव्स के माध्यम से जोखिम प्रबंधन की जागरूकता बढ़ाना।
कॉन्क्लेव के तीसरे दिन रिटेल निवेशकों के लिए विशेष सत्र — सोना-चांदी, धातु और ऊर्जा बाजार के रुझानों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण।
CPAI के अजय गर्ग के अनुसार, भारत में डीमैट खाते 4 करोड़ से बढ़कर 23 करोड़ से अधिक हो चुके हैं।
वैश्विक स्तर पर कमोडिटी बाजार इक्विटी बाजार से बड़ा, जबकि भारत में यह अभी इक्विटी का लगभग दसवाँ हिस्सा — विस्तार की व्यापक संभावना।
अजय गर्ग का अनुमान: अगले 3 से 5 वर्षों में भारत का कमोडिटी बाजार वैश्विक परिदृश्य में महत्वपूर्ण शक्ति बनेगा।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) की प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रवीणा राय ने 30 जुलाई 2026 को मुंबई में आयोजित ग्लोबल कमोडिटी कॉन्क्लेव 2026 के दौरान कहा कि भारत का कमोडिटी बाजार निरंतर विस्तार की राह पर है और 'विकसित भारत' के दीर्घकालिक लक्ष्य को साकार करने में इसकी केंद्रीय भूमिका होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी नीतियों और नियामक संस्थाओं का ध्यान अब कमोडिटी बाजार को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और जोखिम प्रबंधन के दृष्टिकोण से सक्षम बनाने पर केंद्रित है।

कॉन्क्लेव का उद्देश्य और स्वरूप

प्रवीणा राय ने बताया कि इस कॉन्क्लेव का मूल उद्देश्य फिजिकल और फाइनेंशियल कमोडिटी बाजार के सभी प्रतिभागियों को एक साझा मंच पर लाना है। उन्होंने कहा कि कमोडिटी बाजार की बुनियादी जानकारी तो उद्योग जगत में मौजूद है, परंतु इसका प्रभावी और रणनीतिक उपयोग कैसे किया जाए — इस बारे में व्यापक जागरूकता अभी भी अपेक्षित स्तर से कम है।

उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि उद्योगों और संस्थागत निवेशकों को कमोडिटी डेरिवेटिव्स के माध्यम से मूल्य उतार-चढ़ाव से सुरक्षा और संकट काल में बेहतर जोखिम प्रबंधन के तरीके समझाना इस आयोजन की प्राथमिकता है। कॉन्क्लेव में विश्व के प्रमुख एक्सचेंजों के प्रतिनिधि, अर्थशास्त्री, विश्लेषक, ब्रोकर, नियामक, नीति-निर्माता और शिक्षाविद भाग ले रहे हैं।

रिटेल निवेशकों के लिए विशेष सत्र

प्रवीणा राय ने बताया कि कॉन्क्लेव के तीसरे दिन आधे दिन का एक विशेष सत्र विशेष रूप से रिटेल निवेशकों के लिए आयोजित किया गया है। इस सत्र में नए निवेशकों को सोना-चांदी, धातु और ऊर्जा जैसे कमोडिटी वर्गों के बाजार रुझानों को समझने, कमोडिटी डेरिवेटिव्स में निवेश की शुरुआत करने, तथा वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं और भारतीय आर्थिक परिस्थितियों के बाजार पर प्रभाव का विश्लेषण करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

भारत की वैश्विक कमोडिटी बाजार में संभावनाएँ

कमोडिटी पार्टिसिपेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CPAI) के वैकल्पिक अध्यक्ष अजय गर्ग ने कहा कि भारत का लक्ष्य वैश्विक कमोडिटी बाजार में 'प्राइस सेटर' की भूमिका निभाना है और देश इस दिशा में तेज़ गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी से पूर्व देश में लगभग 4 करोड़ डीमैट खाते थे, जो अब बढ़कर 23 करोड़ से अधिक हो चुके हैं — यह भारतीय निवेशकों की बढ़ती वित्तीय भागीदारी का सशक्त प्रमाण है।

गर्ग ने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर कमोडिटी बाजार का आकार इक्विटी बाजार से भी बड़ा है, जबकि भारत में यह अभी इक्विटी बाजार के लगभग दसवें हिस्से के बराबर है। उन्होंने कहा कि भारत खाद्यान्न और सोना-चांदी जैसी प्रमुख कमोडिटीज का बड़े पैमाने पर आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में भारत की भूमिका विस्तार के लिए पर्याप्त संभावनाएँ मौजूद हैं।

आगे की राह: अगले तीन से पाँच वर्ष निर्णायक

अजय गर्ग ने विश्वास व्यक्त किया कि अगले तीन से पाँच वर्षों में भारत का कमोडिटी बाजार वर्तमान की तुलना में कहीं अधिक सक्रिय और सुदृढ़ होगा। उन्होंने कहा कि नए उत्पादों की उपलब्धता, निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और जागरूकता अभियान मिलकर भारत को वैश्विक कमोडिटी परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में स्थापित करेंगे। यह कॉन्क्लेव केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि भविष्य की ठोस कार्ययोजना तैयार करने का अवसर भी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इस खुदरा उछाल का कितना हिस्सा कमोडिटी बाजार तक पहुँच रहा है — जो अभी भी इक्विटी का मात्र दसवाँ हिस्सा है। कॉन्क्लेव जैसे आयोजन जागरूकता बढ़ाने की दिशा में सही कदम हैं, परंतु संरचनात्मक बाधाएँ — जैसे कमोडिटी ट्रेडिंग पर कर ढाँचा और सीमित उत्पाद विविधता — केवल संवाद से नहीं हटतीं। भारत के 'प्राइस सेटर' बनने का सपना तभी साकार होगा जब नीतिगत सुधार और बाजार गहराई साथ-साथ चलें।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्लोबल कमोडिटी कॉन्क्लेव 2026 क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
ग्लोबल कमोडिटी कॉन्क्लेव 2026 मुंबई में आयोजित एक बहु-दिवसीय उद्योग सम्मेलन है, जिसका उद्देश्य फिजिकल और फाइनेंशियल कमोडिटी बाजार के सभी हितधारकों को एक मंच पर लाना है। इसमें वैश्विक एक्सचेंजों के प्रतिनिधि, नीति-निर्माता, नियामक और शिक्षाविद भाग ले रहे हैं ताकि वैश्विक सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को भारतीय बाजार में लागू किया जा सके।
MCX CEO प्रवीणा राय ने कमोडिटी बाजार और 'विकसित भारत' के बारे में क्या कहा?
प्रवीणा राय ने कहा कि भारत का कमोडिटी बाजार निरंतर विस्तार कर रहा है और 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने में इसकी केंद्रीय भूमिका है। उन्होंने बताया कि सरकार और नियामक संस्थाओं का ध्यान बाजार को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और जोखिम प्रबंधन के लिहाज से सक्षम बनाने पर है।
भारत में डीमैट खातों की संख्या कितनी हो गई है?
CPAI के वैकल्पिक अध्यक्ष अजय गर्ग के अनुसार, कोविड-19 महामारी से पहले देश में लगभग 4 करोड़ डीमैट खाते थे, जो अब बढ़कर 23 करोड़ से अधिक हो चुके हैं। यह वृद्धि भारत में खुदरा निवेशकों की तेज़ी से बढ़ती वित्तीय भागीदारी को दर्शाती है।
भारत का कमोडिटी बाजार वैश्विक बाजार की तुलना में कहाँ खड़ा है?
अजय गर्ग के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कमोडिटी बाजार का आकार इक्विटी बाजार से भी बड़ा है, जबकि भारत में यह अभी इक्विटी बाजार के लगभग दसवें हिस्से के बराबर है। भारत खाद्यान्न और सोना-चांदी जैसी प्रमुख कमोडिटीज का बड़े पैमाने पर आयात करता है, जिससे वैश्विक बाजार में उसकी भूमिका विस्तार की व्यापक संभावनाएँ हैं।
कॉन्क्लेव में रिटेल निवेशकों के लिए क्या विशेष व्यवस्था है?
कॉन्क्लेव के तीसरे दिन आधे दिन का एक विशेष सत्र केवल रिटेल निवेशकों के लिए रखा गया है। इसमें सोना-चांदी, धातु और ऊर्जा जैसे कमोडिटी वर्गों के रुझान, कमोडिटी डेरिवेटिव्स में निवेश की शुरुआत और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं के बाजार पर प्रभाव का व्यावहारिक विश्लेषण सिखाया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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