MCX पर सोना ₹1,60,622 और चांदी ₹2,68,368 पर; अमेरिका-ईरान सीजफायर की उम्मीद से सीमित दायरे में कारोबार
सारांश
मुख्य बातें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार, 29 मई 2026 को सोना और चांदी दोनों सीमित दायरे में कमजोरी के साथ कारोबार करते दिखे, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन्हीं धातुओं में हल्की तेजी बनी रही। अमेरिका-ईरान के बीच कथित तौर पर 60 दिन के सीजफायर समझौते की खबरों ने बाजार की दिशा को अनिश्चित बनाए रखा।
MCX पर सोने का हाल
MCX पर सोने का 5 अगस्त 2026 का वायदा अनुबंध पिछली क्लोजिंग ₹1,60,903 के मुकाबले ₹449 की गिरावट के साथ ₹1,60,454 पर खुला। सुबह 10:15 बजे IST तक यह 0.17 प्रतिशत की मामूली कमजोरी के साथ ₹1,60,622 प्रति 10 ग्राम पर था। दिन के कारोबार में सोने ने ₹1,60,197 का निचला और ₹1,60,962 का ऊपरी स्तर छुआ।
चांदी में भी दबाव
चांदी का 3 जुलाई 2026 का वायदा अनुबंध पिछली क्लोजिंग ₹2,69,537 के मुकाबले ₹1,169 की गिरावट के साथ ₹2,68,368 पर था। दिन के दौरान चांदी ने ₹2,68,018 का न्यूनतम और ₹2,69,400 का अधिकतम स्तर दर्ज किया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तस्वीर अलग
घरेलू बाजार की कमजोरी के विपरीत, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी देखी गई। कॉमेक्स पर सोना 0.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ $4,540 प्रति औंस और चांदी 0.25 प्रतिशत की तेजी के साथ $76 प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। यह अंतर घरेलू मुद्रा की स्थिति और स्थानीय बाजार की भावना को दर्शाता है।
अमेरिका-ईरान तनाव और सीजफायर की उम्मीद
वैश्विक अस्थिरता का प्रमुख कारण अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव है। रिपोर्टों के अनुसार, हाल के दिनों में अमेरिका ने दक्षिण ईरान में कुछ स्थानों पर हमले किए थे, जिसके जवाब में ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया था।
अब रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों देश कथित तौर पर 60 दिन के सीजफायर के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमत हो गए हैं। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम स्वीकृति अभी बाकी बताई जा रही है। इस संभावित समझौते में सीजफायर विस्तार के साथ-साथ ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर औपचारिक वार्ता शुरू करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने पर भी चर्चा शामिल है।
आगे क्या देखें
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अमेरिका-ईरान सीजफायर को औपचारिक मंजूरी मिलती है, तो सोने और चांदी पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि भू-राजनीतिक जोखिम कम होने पर निवेशक सुरक्षित निवेश से बाहर निकलते हैं। दूसरी ओर, समझौते के विफल होने की स्थिति में दोनों धातुओं में तेजी लौट सकती है।