'ई-समुद्र' पोर्टल लॉन्च: समुद्री प्रशासन डिजिटल, 3.23 लाख नाविकों को मिलेगी सिंगल-विंडो सेवा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 8 अगस्त 2026 को मुंबई में 'ई-समुद्र' नामक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया, जो नाविकों, शिपिंग कंपनियों, बंदरगाहों और समुद्री क्षेत्र के समस्त हितधारकों को एक ही डिजिटल खिड़की पर सेवाएँ उपलब्ध कराएगा। यह पहल 'मैरीटाइम इंडिया विजन 2030' और 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' के तहत समुद्री शासन को आधुनिक बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
मंत्री सोनोवाल का उद्घाटन और प्रमुख घोषणाएँ
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने प्लेटफॉर्म का उद्घाटन करते हुए कहा, 'हर भारतीय नाविक सुरक्षित, सम्मानित और संरक्षित होना चाहिए — यही हमारी प्राथमिकता है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की समुद्री विकास रणनीति के केंद्र में नाविकों का कल्याण रहेगा।
सोनोवाल ने बताया कि भारत वर्तमान में दुनिया में नाविकों की आपूर्ति करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है और सरकार उसे पहले स्थान तक पहुँचाने की दिशा में काम कर रही है। साथ ही, भारत पहले से ही विश्व का अग्रणी शिप रीसाइक्लिंग हब है और सरकार देश को दुनिया के शीर्ष पाँच जहाज निर्माण देशों में शामिल करने के लक्ष्य पर अग्रसर है।
ई-समुद्र: सिंगल डिजिटल विंडो की विशेषताएँ
पोत परिवहन मंत्रालय के सचिव विजय कुमार ने बताया कि ई-समुद्र समुद्री सेवाओं के लिए सिंगल डिजिटल विंडो के रूप में कार्य करेगा। इसके माध्यम से ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल भुगतान, रियल-टाइम ट्रैकिंग और डिजिटल प्रमाणपत्र जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा, 'ई-समुद्र एंड-टू-एंड डिजिटल वर्कफ्लो के साथ समुद्री सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल स्वरूप देगा।'
महासागरीय प्रशासन के महानिदेशक श्याम जगन्नाथन ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म समुद्री प्रशासन को पारंपरिक कार्यालय-आधारित प्रणाली से निकालकर डिजिटल-फर्स्ट और फेसलेस गवर्नेंस की दिशा में ले जाएगा, जिससे सेवाओं की डिलीवरी तेज होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
नाविकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, भारत में सक्रिय नाविकों की संख्या वर्ष 2013 में लगभग 1.03 लाख थी, जो बढ़कर 2025 में 3.23 लाख से अधिक हो गई है — यानी एक दशक में तीन गुना से भी अधिक वृद्धि। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक शिपिंग उद्योग कुशल नाविकों की भारी माँग का सामना कर रहा है, और भारत इस माँग को पूरा करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
भू-राजनीतिक संकट में भारतीय नाविकों की सुरक्षा
मंत्रालय ने बताया कि हाल के भू-राजनीतिक तनावों के दौरान भारतीय समुद्री प्रशासन ने 16,000 से अधिक कॉल्स की निगरानी की और 40,000 से अधिक संचार गतिविधियों का प्रबंधन किया। विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों, भारतीय नौसेना और अन्य एजेंसियों के सहयोग से संकटग्रस्त क्षेत्रों में फँसे 4,000 से अधिक भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया गया।
आगे की राह
गौरतलब है कि ई-समुद्र प्लेटफॉर्म केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि समुद्री शासन को अधिक सरल, पारदर्शी और हितधारक-केंद्रित बनाने की दिशा में नीतिगत बदलाव का प्रतीक है। मंत्री सोनोवाल के अनुसार, यह पहल भारत को वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करने के दीर्घकालिक लक्ष्य की ओर एक ठोस कदम है।