8 अगस्त 2026
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ई-समुद्र लॉन्च: सोनोवाल ने मुंबई में किया समुद्री प्रशासन के डिजिटल परिवर्तन का शुभारंभ

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ई-समुद्र लॉन्च: सोनोवाल ने मुंबई में किया समुद्री प्रशासन के डिजिटल परिवर्तन का शुभारंभ

सारांश

भारत के समुद्री प्रशासन में बड़ा बदलाव — मुंबई में लॉन्च हुआ 'ई-समुद्र' प्लेटफॉर्म अब 3.23 लाख से अधिक नाविकों को एकल डिजिटल विंडो से जोड़ेगा। यह कदम उस वक्त आया है जब भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नाविक आपूर्तिकर्ता देश बन चुका है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 8 अगस्त 2026 को मुंबई में 'ई-समुद्र' डिजिटल प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया।
प्लेटफॉर्म नाविकों, शिपिंग कंपनियों और बंदरगाहों को एकल डिजिटल विंडो पर ऑनलाइन भुगतान, रियल-टाइम ट्रैकिंग और डिजिटल प्रमाणपत्र देगा।
भारत में सक्रिय नाविकों की संख्या 2013 के 1.03 लाख से बढ़कर 2025 में 3.23 लाख से अधिक हो गई है।
भारत अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा नाविक आपूर्तिकर्ता देश और जहाज पुनर्चक्रण में अग्रणी केंद्र बन चुका है।
डीजीएमए ने भू-राजनीतिक संकट के दौरान 4,000 से अधिक फंसे नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की।
नई पहलों में ई-नाविक 24×7 शिकायत निवारण प्रणाली , सीफेयरर ट्रैकिंग डैशबोर्ड और डिजिटल एम्प्लॉयमेंट एग्रीमेंट शामिल हैं।

केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 8 अगस्त 2026 को मुंबई में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में 'ई-समुद्र' डिजिटल प्लेटफॉर्म का औपचारिक शुभारंभ किया। यह प्लेटफॉर्म नाविकों, शिपिंग कंपनियों, बंदरगाहों और समुद्री हितधारकों को एकीकृत डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही सरकार ने नाविकों की सुरक्षा, कल्याण और सेवा वितरण को सुदृढ़ करने के लिए कई सुधारात्मक पहलों की भी घोषणा की।

ई-समुद्र: क्या है यह प्लेटफॉर्म

महानिदेशालय समुद्री प्रशासन (डीजीएमए) द्वारा विकसित ई-समुद्र एक एकल डिजिटल विंडो है, जिसके माध्यम से समुद्री सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध होंगी। इसमें ऑनलाइन भुगतान, रियल-टाइम ट्रैकिंग, डिजिटल प्रमाणपत्र और पूर्णतः ऑनलाइन कार्यप्रवाह जैसी सुविधाएं शामिल हैं। महानिदेशक समुद्री प्रशासन श्याम जगन्नाथन ने इसे परिवर्तनकारी मंच बताते हुए कहा कि यह समुद्री प्रशासन को पारंपरिक कार्यालय-आधारित व्यवस्था से निकालकर 'डिजिटल फर्स्ट' और 'फेसलेस गवर्नेंस' की दिशा में ले जाएगा।

सोनोवाल ने कहा, 'यह केवल एक तकनीकी प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि समुद्री प्रशासन को सरल, पारदर्शी और हितधारक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से नाविकों के लिए जीवन को आसान और समुद्री क्षेत्र के लिए कारोबार को सुगम बनाया जाएगा।'

नाविकों के लिए नई पहलें

ई-समुद्र के अतिरिक्त डीजीएमए ने कई अन्य सुधारात्मक पहलें भी प्रस्तुत कीं। इनमें हाल ही में शुरू की गई ई-नाविक 24×7 शिकायत निवारण प्रणाली, आगामी सीफेयरर ट्रैकिंग डैशबोर्ड, डिजिटल सीफेयरर्स एम्प्लॉयमेंट एग्रीमेंट और सीफेयरर्स वेलफेयर फंड सोसाइटी के अंतर्गत उन्नत कल्याणकारी सुविधाएं प्रमुख हैं। 'सागर में योग' अभियान के माध्यम से नाविकों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और 'सागर में सम्मान' कार्यक्रम के ज़रिए महिला नाविकों के लिए अवसर सुनिश्चित करने के प्रयासों को भी रेखांकित किया गया।

भारत का बढ़ता समुद्री कद

सोनोवाल ने बताया कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नाविक आपूर्तिकर्ता देश बन चुका है और शीघ्र ही इस क्षेत्र में प्रथम स्थान पर आ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत जहाज पुनर्चक्रण (शिप रीसाइक्लिंग) में विश्व का अग्रणी केंद्र बन चुका है और शीर्ष पाँच जहाज निर्माण देशों में शामिल होने की दिशा में काम कर रहा है। गौरतलब है कि भारत में सक्रिय नाविकों की संख्या 2013 में लगभग 1.03 लाख थी, जो 2025 तक बढ़कर 3.23 लाख से अधिक हो गई है — यह वृद्धि डिजिटल सेवाओं और नियामक ढाँचे को मज़बूत करने की ज़रूरत को रेखांकित करती है।

मंत्रालय के सचिव विजय कुमार ने बताया कि भारत की समुद्री नीति अब तीन प्रमुख स्तंभों पर टिकी है: मर्चेंट शिपिंग एक्ट 2025 (जिसमें नाविकों को प्रमुख कर्मी का दर्जा दिया गया है), मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047, और 'न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन' का सिद्धांत।

भू-राजनीतिक संकट में डीजीएमए की भूमिका

कार्यक्रम में हाल के वैश्विक भू-राजनीतिक संकटों के दौरान शिपिंग पर पड़े प्रभावों पर भी चर्चा हुई। मंत्रालय के अनुसार, डीजीएमए ने 16,000 से अधिक कॉल की निगरानी, 40,000 से ज़्यादा संचार गतिविधियों का संचालन और 4,000 से अधिक फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित की।

आगे की राह

सोनोवाल ने कार्यक्रम के दौरान भर्ती एजेंसियों, समुद्री प्रतिनिधियों, कैडेट्स और युवा समुद्री पेशेवरों से सीधे संवाद किया। उन्होंने मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 के तहत भारत की महत्वाकांक्षाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि 'हर भारतीय नाविक सुरक्षित, सम्मानित और समर्थित महसूस करे' — यही सरकार की प्रतिबद्धता है। ई-समुद्र के पूर्ण क्रियान्वयन के साथ भारत का समुद्री प्रशासन एक नए डिजिटल युग में प्रवेश करने की ओर अग्रसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — भारत में डिजिटल सरकारी पोर्टलों का इतिहास बताता है कि लॉन्च और उपयोगिता के बीच की खाई अक्सर चौड़ी रहती है। यह ऐसे समय में आया है जब नाविकों की संख्या एक दशक में तीन गुना बढ़ चुकी है, फिर भी कल्याण और नियामक ढाँचा उस गति से नहीं बढ़ा। 'सागर में सम्मान' जैसे कार्यक्रम सही दिशा में हैं, लेकिन महिला नाविकों की संख्या में 'उल्लेखनीय वृद्धि' के दावे को सत्यापन-योग्य आँकड़ों के बिना नहीं परखा जा सकता। मैरीटाइम विजन 2047 की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि डिजिटल प्लेटफॉर्म केवल घोषणापत्र न बनकर ज़मीनी स्तर पर नाविकों की दशा बदले।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ई-समुद्र डिजिटल प्लेटफॉर्म क्या है?
ई-समुद्र भारत सरकार के महानिदेशालय समुद्री प्रशासन (डीजीएमए) द्वारा विकसित एकल डिजिटल विंडो है, जो नाविकों, शिपिंग कंपनियों और बंदरगाहों को ऑनलाइन भुगतान, रियल-टाइम ट्रैकिंग, डिजिटल प्रमाणपत्र और पूर्णतः ऑनलाइन कार्यप्रवाह जैसी सेवाएं प्रदान करता है। इसे 8 अगस्त 2026 को मुंबई में केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने लॉन्च किया।
ई-समुद्र से नाविकों को क्या फायदा होगा?
नाविकों को अब प्रमाणपत्र, शिकायत निवारण, रोज़गार समझौते और अन्य समुद्री सेवाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिलेंगी, जिससे सरकारी दफ्तरों के चक्कर खत्म होंगे। इसके साथ ई-नाविक 24×7 शिकायत निवारण प्रणाली और सीफेयरर ट्रैकिंग डैशबोर्ड भी उपलब्ध होंगे।
भारत में कितने नाविक हैं और उनकी संख्या कितनी बढ़ी है?
भारत में सक्रिय नाविकों की संख्या 2013 में लगभग 1.03 लाख थी, जो 2025 तक बढ़कर 3.23 लाख से अधिक हो गई है — यानी एक दशक में तीन गुना से अधिक वृद्धि। इसी तेज़ वृद्धि के कारण डिजिटल सेवाओं और कल्याणकारी व्यवस्थाओं को मज़बूत करने की आवश्यकता महसूस की गई।
मर्चेंट शिपिंग एक्ट 2025 में नाविकों के लिए क्या प्रावधान है?
मर्चेंट शिपिंग एक्ट 2025 में नाविकों को 'प्रमुख कर्मी' का दर्जा दिया गया है, जो उनके अधिकारों और सुरक्षा को कानूनी रूप से मज़बूत करता है। यह अधिनियम मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 और 'न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन' के सिद्धांत के साथ मिलकर भारत की समुद्री नीति के तीन प्रमुख स्तंभों में से एक है।
भू-राजनीतिक संकट के दौरान डीजीएमए ने क्या भूमिका निभाई?
मंत्रालय के अनुसार, हाल के वैश्विक भू-राजनीतिक संकटों के दौरान डीजीएमए ने 16,000 से अधिक कॉल की निगरानी की, 40,000 से ज़्यादा संचार गतिविधियों का संचालन किया और 4,000 से अधिक फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित की।
राष्ट्र प्रेस
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