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अमित शाह 9 जून को लॉन्च करेंगे लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम, 15 सीमा चौकियाँ होंगी डिजिटल

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अमित शाह 9 जून को लॉन्च करेंगे लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम, 15 सीमा चौकियाँ होंगी डिजिटल

सारांश

अमित शाह 9 जून को LPMS लॉन्च करेंगे — एक डिजिटल प्लेटफॉर्म जो भारत की 15 स्थलीय सीमा चौकियों को एयरपोर्ट और सीपोर्ट की तर्ज पर स्मार्ट बनाएगा। सिंगल-विंडो क्लियरेंस, रियल-टाइम ट्रैकिंग और राष्ट्रीय प्लेटफॉर्मों से एकीकरण के साथ यह 'विकसित भारत 2047' की दिशा में सीमा प्रबंधन का बड़ा डिजिटल कदम है।

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 9 जून को नई दिल्ली में लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (LPMS) का शुभारंभ करेंगे।
LPMS भारत की 15 अंतरराष्ट्रीय सीमा चौकियों को एकीकृत डिजिटल मंच पर लाएगा, जिसमें स्लॉट बुकिंग, सिंगल-विंडो क्लियरेंस और रियल-टाइम ट्रैकिंग शामिल है।
यह प्रणाली इंडियन कस्टम्स इलेक्ट्रॉनिक डेटा इंटरचेंज गेटवे और मोटर व्हीकल इकोसिस्टम जैसे राष्ट्रीय प्लेटफॉर्मों से पूरी तरह एकीकृत होगी।
दावकी (मेघालय) और श्रीमंतपुर (त्रिपुरा) पर नई स्टेकहोल्डर आवास सुविधाओं का भी उद्घाटन होगा।
LPAI पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार सीमाओं पर 15 स्थलीय बंदरगाह संचालित करती है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 9 जून को नई दिल्ली में लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (LPMS) का औपचारिक शुभारंभ करेंगे — एक अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म जो भारत की 15 अंतरराष्ट्रीय सीमा चौकियों के संचालन को एकीकृत करेगा। यह कदम भारत के स्थलीय बंदरगाहों को हवाई अड्डों और समुद्री बंदरगाहों पर पहले से चल रहे डिजिटल तंत्र के समकक्ष लाने की दिशा में एक निर्णायक पहल है।

LPMS क्या है और यह कैसे काम करेगा

लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम एक केंद्रीकृत, तटस्थ और खुला डिजिटल मंच है, जो स्थलीय सीमा चौकियों पर लॉजिस्टिक्स और नियामक सूचनाओं के सुरक्षित, रियल-टाइम आदान-प्रदान को सक्षम बनाता है। आधिकारिक बयान के अनुसार, यह प्रणाली कार्गो और यात्री प्रसंस्करण के लिए एंड-टू-एंड डिजिटल वर्कफ्लो प्रदान करती है, जिसमें स्लॉट बुकिंग, भुगतान, ट्रैकिंग और सिंगल-विंडो क्लियरेंस शामिल हैं।

यह प्लेटफॉर्म इंडियन कस्टम्स इलेक्ट्रॉनिक डेटा इंटरचेंज गेटवे, यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान और मोटर व्हीकल इकोसिस्टम जैसे प्रमुख राष्ट्रीय प्लेटफॉर्मों के साथ पूरी तरह एकीकृत होगा, जिससे अंतर-संचालनीय और पारदर्शी सीमा प्रबंधन सुनिश्चित होगा।

किन सीमा चौकियों पर होगा असर

लैंड पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (LPAI) — जो गृह मंत्रालय के सीमा प्रबंधन विभाग के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय है — फिलहाल भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर 15 स्थलीय बंदरगाहों का संचालन करती है।

इनमें भारत-पाकिस्तान सीमा पर अटारी और डेरा बाबा नानक (पंजाब); भारत-नेपाल सीमा पर रुपैदिहा (उत्तर प्रदेश), रक्सौल और जोगबनी (बिहार); भारत-भूटान सीमा पर दर्रांगा (असम); भारत-बांग्लादेश सीमा पर पेट्रापोल (पश्चिम बंगाल), दावकी (मेघालय), सुतारकंडी, गोलकगंज और मनकाचर (असम), अगरतला, श्रीमंतपुर और सबरूम (त्रिपुरा); तथा भारत-म्यांमार सीमा पर मोरेह (मणिपुर) शामिल हैं।

नई अवसंरचना सुविधाओं का उद्घाटन

LPMS के शुभारंभ के साथ-साथ गृह मंत्री शाह दावकी (मेघालय) और श्रीमंतपुर (त्रिपुरा) स्थित स्थलीय बंदरगाहों पर नवनिर्मित स्टेकहोल्डर आवास सुविधाओं का भी उद्घाटन करेंगे। इससे सीमा सुरक्षा कर्मियों और अन्य महत्वपूर्ण हितधारकों के लिए बुनियादी ढाँचागत सहायता और सुदृढ़ होगी।

व्यापार और सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव

आधिकारिक बयान के अनुसार, LPMS सरकारी एजेंसियों और निजी संचालकों सहित विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय को सहज बनाएगा, जिससे देरी में कमी आएगी और परिचालन दक्षता बढ़ेगी। यह पहल 'विकसित भारत 2047' के रणनीतिक लक्ष्य के अनुरूप स्मार्ट सीमा प्रबंधन, क्रॉस-बॉर्डर व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी सीमा सुरक्षा और व्यापार अवसंरचना दोनों को एक साथ आधुनिक बनाने पर ज़ोर दे रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा ज़मीनी क्रियान्वयन में होगी — विशेषकर उन सीमा चौकियों पर जहाँ कनेक्टिविटी और स्थानीय क्षमता अभी भी सीमित है। भारत के स्थलीय व्यापार का बड़ा हिस्सा बांग्लादेश और नेपाल के साथ है, और इन मार्गों पर देरी व्यापारियों के लिए दशकों से एक पुरानी समस्या रही है। यह प्रणाली यदि वास्तव में सिंगल-विंडो क्लियरेंस को कागज़ से ज़मीन पर उतारती है, तो यह उत्तर-पूर्व और सीमावर्ती राज्यों की अर्थव्यवस्था के लिए परिवर्तनकारी हो सकती है। लेकिन बिना पारदर्शी प्रदर्शन मापदंडों और स्वतंत्र ऑडिट के, यह डिजिटल ढाँचा भी पुरानी बाधाओं को नए इंटरफेस में लपेटने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (LPMS) क्या है?
LPMS एक अत्याधुनिक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो भारत की स्थलीय सीमा चौकियों पर कार्गो और यात्री प्रसंस्करण को एकीकृत करता है। इसमें स्लॉट बुकिंग, भुगतान, रियल-टाइम ट्रैकिंग और सिंगल-विंडो क्लियरेंस जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।
LPMS का शुभारंभ कब और कहाँ होगा?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 9 जून को नई दिल्ली में LPMS का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इसी अवसर पर दावकी (मेघालय) और श्रीमंतपुर (त्रिपुरा) पर नई आवास सुविधाओं का उद्घाटन भी होगा।
LPMS से किन सीमा चौकियों को फायदा होगा?
LPMS लैंड पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (LPAI) द्वारा संचालित 15 स्थलीय बंदरगाहों को कवर करेगा। इनमें पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार सीमाओं पर स्थित चौकियाँ — जैसे अटारी, पेट्रापोल, दावकी, रक्सौल और मोरेह — शामिल हैं।
LPMS किन राष्ट्रीय प्लेटफॉर्मों से जुड़ेगा?
LPMS को इंडियन कस्टम्स इलेक्ट्रॉनिक डेटा इंटरचेंज गेटवे, यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान और मोटर व्हीकल इकोसिस्टम के साथ पूरी तरह एकीकृत किया गया है। इससे अंतर-संचालनीय और पारदर्शी सीमा प्रबंधन सुनिश्चित होगा।
LPMS का व्यापार और सुरक्षा पर क्या असर होगा?
LPMS क्रॉस-बॉर्डर व्यापार में देरी कम करेगा, पारदर्शिता बढ़ाएगा और सरकारी एजेंसियों व निजी संचालकों के बीच समन्वय सहज बनाएगा। यह 'विकसित भारत 2047' के तहत स्मार्ट बॉर्डर मैनेजमेंट के रणनीतिक लक्ष्य का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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