निर्मला सीतारमण के नाम पर फर्जी 'क्वांटम एआई' स्कीम, सरकार ने जारी की सख्त चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम का दुरुपयोग करते हुए जालसाज एक फर्जी 'क्वांटम एआई' निवेश स्कीम चला रहे हैं, जिसे लेकर सरकार ने 24 मई 2026 को सख्त चेतावनी जारी की है। सरकारी एजेंसी पीआईबी (प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो) की फैक्ट चेक यूनिट ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय इस प्रकार की कोई भी निवेश योजना या प्लेटफॉर्म नहीं चलाते।
क्या है फर्जी स्कीम का दावा
इस फर्जी योजना में नागरिकों को लुभाने के लिए दावा किया जा रहा था कि केवल ₹22,000 के शुरुआती निवेश पर ₹3,00,000 तक की मासिक आय सरकारी गारंटी के साथ और बिना किसी जोखिम के अर्जित की जा सकती है। स्कीम के पंजीकरण की अंतिम तिथि 24 मई बताई जा रही थी, जो संभवतः लोगों में जल्दबाज़ी पैदा करने की चाल थी।
यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी के मामले पूरे देश में तेज़ी से बढ़ रहे हैं और साइबर अपराधी सरकारी हस्तियों के नाम का इस्तेमाल कर आम नागरिकों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं।
पीआईबी फैक्ट चेक की कार्रवाई
पीआईबी फैक्ट चेक यूनिट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट जारी कर इस स्कीम का पर्दाफाश किया। पोस्ट में कहा गया कि यह स्कीम 'पूरी तरह से फर्जी' है और इस तरह की योजनाएं लोगों को धोखा देकर उनसे पैसे हड़पने के उद्देश्य से बनाई जाती हैं। सरकार ने नागरिकों को ऐसे संदिग्ध लिंक या प्लेटफॉर्म से दूर रहने की सलाह दी।
नागरिकों के लिए सरकार की सलाह
सरकार ने नागरिकों को स्पष्ट रूप से आगाह किया है कि वे सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर प्रसारित हो रहे संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें। इसके साथ ही, किसी भी अविश्वसनीय प्लेटफॉर्म पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी या बैंकिंग विवरण साझा न करें।
गौरतलब है कि इस प्रकार की फर्जी योजनाओं में अक्सर प्रतिष्ठित सरकारी व्यक्तित्वों के नाम, तस्वीरें और नकली सरकारी लोगो का इस्तेमाल किया जाता है ताकि योजना वैध दिखे।
संदिग्ध सामग्री की शिकायत कैसे करें
सरकार ने बताया कि भारत सरकार से संबंधित किसी भी संदिग्ध सामग्री की सूचना सीधे पीआईबी फैक्ट चेक को व्हाट्सएप के माध्यम से +91 8799711259 पर या आधिकारिक ईमेल के ज़रिए दी जा सकती है। सतर्क नागरिक इस तंत्र का उपयोग कर अफवाहों और फर्जी योजनाओं की जाँच करा सकते हैं।
आने वाले दिनों में साइबर अपराध एजेंसियों द्वारा इस स्कीम के संचालकों के विरुद्ध कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।