एफएसएसएआई ने दूध में मिलावट को रोकने के लिए लाइसेंस को अनिवार्य किया
सारांश
Key Takeaways
- एफएसएसएआई ने दूध में मिलावट रोकने के लिए लाइसेंस को अनिवार्य किया।
- दूध विक्रेताओं को पंजीकरण करवाना होगा।
- खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने का उद्देश्य।
- राज्यों को विशेष पंजीकरण अभियान चलाने के निर्देश।
- दूध में संभावित मिलावट की घटनाओं की जांच होगी।
नई दिल्ली, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। देश में दूध में मिलावट की घटनाओं को रोकने के लिए एफएसएसएआई ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया और दूध के उत्पादन तथा बिक्री के लिए लाइसेंस को अनिवार्य कर दिया।
सरकारी एजेंसी ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि सभी दूध उत्पादकों और विक्रेताओं को (डेयरी सहकारी समितियों के सदस्यों को छोड़कर) अपने खाद्य व्यवसाय को संचालित करने से पहले एफएसएसएआई के साथ पंजीकरण या लाइसेंस प्राप्त करना होगा।
इस बयान में कहा गया है कि इसका मुख्य उद्देश्य दूध में मिलावट की घटनाओं को रोकना, खाद्य सुरक्षा अनुपालन को मजबूत करना और सुरक्षित भंडारण तथा स्वच्छ आपूर्ति सुनिश्चित करना है ताकि जनस्वास्थ्य की रक्षा की जा सके। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इस संदर्भ में विशेष पंजीकरण अभियान और प्रवर्तन जांच करने के लिए भी निर्देश दिये गए हैं।
एफएसएसएआई द्वारा जारी नोट में यह भी कहा गया है कि सभी राज्यों में दूध में संभावित मिलावट से संबंधित घटनाओं को ध्यान में रखते हुए, पंजीकरण/लाइसेंसिंग आवश्यकताओं का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
इसके लिए केंद्रीय और सभी राज्यों की प्रवर्तन एजेंसियों से अनुरोध किया गया है कि दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के लाइसेंस और पंजीकरण को सत्यापित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करें।
साथ ही सभी राज्यों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में विशेष पंजीकरण अभियान चलाने की सलाह दी गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के पास एफएसएसएआई पंजीकरण प्रमाणपत्र/लाइसेंस उपलब्ध हो।
पिछले महीने खाद्य उत्पादों में मिलावट का मुद्दा संसद में उठाया गया था।
आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में बोलते हुए कंपनियों पर सेहतमंद और ऊर्जा बढ़ाने वाले झूठे दावों के तहत हानिकारक उत्पाद बेचने का आरोप लगाया।
उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे रोजमर्रा की जरूरी चीजों में खतरनाक पदार्थ मिलाए जाते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दूध में यूरिया, सब्जियों में ऑक्सीटोसिन, पनीर में स्टार्च और कास्टिक सोडा, आइसक्रीम में डिटर्जेंट पाउडर, फलों के जूस में सिंथेटिक फ्लेवर और आर्टिफिशियल रंग, खाने के तेल में मशीन का तेल, मसालों में ईंट का पाउडर और लकड़ी का बुरादा, चाय में सिंथेटिक रंग, और पोल्ट्री उत्पादों में एनाबॉलिक स्टेरॉयड शामिल होते हैं। यहां तक कि देशी घी में जो मिठाइयां बनानी चाहिए, वह भी वनस्पति तेल और डालडा से बनाई जाती है।