एआई रेगुलेशन की आशंका से एशियाई बाजार धराशायी, कोस्पी 8% और निक्केई 6% टूटा
सारांश
मुख्य बातें
एआई के कड़े नियमन और एआई-संबंधित निवेश में संभावित कटौती की आशंका के चलते शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को एशियाई शेयर बाजारों में भारी बिकवाली का सैलाब आ गया। वॉल स्ट्रीट में गुरुवार रात दर्ज हुई तीव्र गिरावट के बाद तकनीकी शेयरों पर जबरदस्त दबाव पड़ा, जिसने पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के बाजारों को हिला दिया।
मुख्य घटनाक्रम
दक्षिण कोरिया के कोस्पी इंडेक्स में 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जिसके चलते सर्किट ब्रेकर लगाकर ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। बाजार के दोबारा खुलने पर सीमित रिकवरी देखी गई। जापान का निक्केई करीब 6 प्रतिशत टूट गया, जो हाल के वर्षों की सबसे बड़ी एकल-दिवसीय गिरावटों में से एक है। ताइवान का बेंचमार्क इंडेक्स भी 8 प्रतिशत से अधिक नीचे आ गया, जो सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला के प्रति बाजार की गहरी चिंता को दर्शाता है।
कौन-कौन से शेयर सबसे ज्यादा प्रभावित
सेमीकंडक्टर और एआई-केंद्रित कंपनियों को सर्वाधिक नुकसान उठाना पड़ा। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स करीब 10 प्रतिशत गिरा, जबकि मेमोरी चिप निर्माता एसके हाइनिक्स लगभग 12 प्रतिशत टूट गया। एआई क्षेत्र के सबसे बड़े वैश्विक निवेशकों में गिने जाने वाले सॉफ्टबैंक ग्रुप के शेयर भी भविष्य के रिटर्न को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच 11 प्रतिशत लुढ़क गए। यह ऐसे समय में आया है जब सॉफ्टबैंक ने हाल ही में एआई स्टार्टअप में अरबों डॉलर का निवेश किया है।
वॉल स्ट्रीट से शुरू हुई बिकवाली की लहर
एशियाई बाजारों में यह भूचाल गुरुवार रात अमेरिकी बाजारों में आई तेज गिरावट के बाद आया। निवेशकों की चिंता थी कि अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट्स की मजबूत उपस्थिति से तेजी से विस्तार पा रहे एआई सेक्टर पर नियामकीय जाँच का दबाव बढ़ सकता है। नैस्डैक कंपोजिट 5.5 प्रतिशत गिरा, एसएंडपी 500 में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई और डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 3.4 प्रतिशत टूट गया। इस बिकवाली से एसएंडपी 500 कंपनियों की संयुक्त मार्केट वैल्यू से करीब $3 ट्रिलियन (लगभग ₹250 लाख करोड़) स्वाहा हो गए और वॉल स्ट्रीट वोलैटिलिटी इंडेक्स में तेज उछाल आया।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट ने उस बढ़ते संशय को उजागर किया है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर चिप्स और डेटा सेंटर में हो रहे भारी निवेश की रफ्तार तब भी बनी रहेगी, जब नियामक सख्त रुख अपनाएँ। गौरतलब है कि विशेषज्ञों ने निवेशकों की अति-लीवरेज्ड पोजिशनिंग और मजबूरी में हुई बिकवाली को भी इस गिरावट को और गहरा करने वाले कारकों के रूप में रेखांकित किया। आलोचकों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में एआई शेयरों में आया उफान काफी हद तक अपेक्षाओं पर टिका था, वास्तविक राजस्व पर नहीं।
कमोडिटी बाजार और आगे की राह
इक्विटी बाजारों की उठापटक के बीच कमोडिटी बाजार में एक अलग ही तस्वीर सामने आई। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 2 प्रतिशत बढ़कर $100.31 प्रति बैरल पर पहुँच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 1 प्रतिशत से अधिक चढ़कर $91.91 प्रति बैरल पर पहुँच गया। बाजार विश्लेषकों की नजर अब अमेरिकी नीति-निर्माताओं के अगले कदम और एआई कंपनियों की आगामी तिमाही गाइडेंस पर टिकी है, जो भविष्य के बाजार रुझान तय करेंगे।