सेंसेक्स 2,000 अंक टूटा, निफ्टी 532 अंक नीचे; कच्चे तेल और पश्चिम एशिया तनाव से साप्ताहिक गिरावट 2.7%

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सेंसेक्स 2,000 अंक टूटा, निफ्टी 532 अंक नीचे; कच्चे तेल और पश्चिम एशिया तनाव से साप्ताहिक गिरावट 2.7%

सारांश

पश्चिम एशिया के तनाव और ब्रेंट क्रूड के 110 डॉलर तक पहुँचने से भारतीय बाज़ार को इस सप्ताह बड़ा झटका लगा — सेंसेक्स 2,000 अंक टूटा, रियल्टी 8% और आईटी 5.7% धराशायी। SIP के ₹31,115 करोड़ ने डूबते बाज़ार को थामा, लेकिन FII की बिकवाली जारी है।

मुख्य बातें

बीएसई सेंसेक्स इस सप्ताह 2,000 अंकों से अधिक ( 2.7% ) गिरकर 75,238 पर बंद हुआ।
एनएसई निफ्टी 50 532 अंक ( 2.2% ) टूटकर 23,643.5 पर आया।
बीएसई रियल्टी में ~8% , बीएसई आईटी में 5.7% और स्मॉलकैप इंडेक्स में ~4% की गिरावट।
टाइटन कंपनी सेंसेक्स पैक में सबसे बड़ा नुकसान — 7.6% की गिरावट।
ब्रेंट क्रूड 105–110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बना रहा; होर्मुज आपूर्ति बाधा की आशंका।
SIP के ज़रिए अप्रैल में ₹31,115 करोड़ का निवेश, FII बिकवाली के असर को संतुलित किया।

बीएसई सेंसेक्स इस सप्ताह 2,000 अंकों से अधिक यानी 2.7 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,238 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 532 अंक यानी 2.2 प्रतिशत टूटकर 23,643.5 पर आ गया। पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और ब्रेंट क्रूड की कीमतों के 105 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बने रहने से निवेशकों की धारणा पूरे सप्ताह कमज़ोर रही।

साप्ताहिक गिरावट का पूरा चित्र

व्यापक बाज़ार पर दबाव बेंचमार्क सूचकांकों से भी अधिक रहा। बीएसई मिडकैप इंडेक्स में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई, जबकि बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 4 प्रतिशत टूट गया — यह संकेत है कि बिकवाली का दबाव केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे बाज़ार में फैला रहा।

सेक्टोरल मोर्चे पर बीएसई रियल्टी इंडेक्स सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ और उसमें करीब 8 प्रतिशत की गिरावट आई। बीएसई आईटी इंडेक्स 5.7 प्रतिशत लुढ़का। इसके अलावा ऑटो, कैपिटल गुड्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर में भी कमज़ोरी देखी गई।

बीएसई बैंकेक्स और बीएसई पीएसयू दोनों में करीब 3-3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालाँकि डिफेंसिव सेक्टरों ने राहत दी — बीएसई मेटल में 1.5 प्रतिशत और हेल्थकेयर शेयरों में 1.4 प्रतिशत की बढ़त रही।

सेंसेक्स पैक में सबसे बड़े नुकसान

30 शेयरों वाले सेंसेक्स पैक में टाइटन कंपनी सर्वाधिक 7.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे बड़ा नुकसान उठाने वाला शेयर रहा। इसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज, टेक महिंद्रा और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में भी उल्लेखनीय कमज़ोरी दर्ज की गई।

वैश्विक कारण और विशेषज्ञों की राय

बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के कोई ठोस संकेत नहीं मिले, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति पर खतरा बना हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई बाधित होने की आशंका के चलते ब्रेंट क्रूड 105 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच टिका रहा।

विश्लेषकों का कहना है कि ऊँचे कच्चे तेल के दाम, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और अमेरिकी डॉलर की मज़बूती का असर उभरते बाज़ारों पर पड़ रहा है। इससे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली तेज़ हुई और रुपए पर भी दबाव बना। थोक महंगाई में बढ़ोतरी और ऊँची बॉन्ड यील्ड ने भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर चिंताएँ और गहरी कर दी हैं।

घरेलू निवेशकों ने दिया सहारा

गिरावट के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाज़ार को कुछ सहारा दिया। अप्रैल में व्यवस्थित निवेश योजना (SIP) के ज़रिए ₹31,115 करोड़ का निवेश हुआ, जिसने FII की लगातार बिकवाली के असर को काफी हद तक संतुलित करने में मदद की। मज़बूत रिटेल भागीदारी बाज़ार के लिए एक स्थिर आधार बनी रही।

आगे चलकर बाज़ार की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतिगत संकेतों पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

व्यापक थी। SIP के ₹31,115 करोड़ एक उम्मीद की किरण हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या खुदरा निवेशकों की यह भागीदारी तब भी टिकेगी जब महंगाई और ईंधन लागत उनकी बचत को सीधे निचोड़ने लगे। पश्चिम एशिया तनाव के दीर्घकालिक होने की स्थिति में RBI के लिए दर-कटौती की गुंजाइश भी सिकुड़ती दिखती है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी गिरावट आई?
इस सप्ताह बीएसई सेंसेक्स 2,000 अंकों से अधिक यानी 2.7 प्रतिशत गिरकर 75,238 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 532 अंक यानी 2.2 प्रतिशत टूटकर 23,643.5 पर आ गया।
शेयर बाज़ार में इस सप्ताह गिरावट के मुख्य कारण क्या रहे?
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ब्रेंट क्रूड की कीमतों का 105 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बने रहना मुख्य कारण रहे। इसके अलावा वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, अमेरिकी डॉलर की मज़बूती और FII की बिकवाली ने भी दबाव बढ़ाया।
किस सेक्टर को सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ?
बीएसई रियल्टी इंडेक्स में करीब 8 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह सबसे बुरी तरह प्रभावित सेक्टर रहा। इसके बाद बीएसई आईटी इंडेक्स 5.7 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 4 प्रतिशत टूटा।
क्या बाज़ार को किसी सकारात्मक कारक का सहारा मिला?
हाँ, घरेलू संस्थागत निवेशकों और SIP के ज़रिए लगातार निवेश ने बाज़ार को कुछ सहारा दिया। अप्रैल में SIP निवेश ₹31,115 करोड़ रहा, जिसने FII की बिकवाली के असर को काफी हद तक संतुलित किया। मेटल और हेल्थकेयर सेक्टर में क्रमशः 1.5 और 1.4 प्रतिशत की बढ़त भी सकारात्मक रही।
आगे बाज़ार की दिशा क्या रहेगी?
विशेषज्ञों के अनुसार बाज़ार की दिशा मुख्यतः पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतिगत संकेतों पर निर्भर करेगी। थोक महंगाई और ऊँची बॉन्ड यील्ड मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता बनाए रख सकती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले