सोने की कीमतों में इस हफ्ते 0.19% की बढ़त, MCX पर ₹1,58,588 पर कारोबार; भू-राजनीतिक तनाव का असर
सारांश
मुख्य बातें
भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच 23 मई 2026 को समाप्त सप्ताह में सोने की कीमतों में 0.19 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। मुंबई स्थित मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गोल्ड फ्यूचर्स ₹1,58,588 प्रति 10 ग्राम पर और सिल्वर फ्यूचर्स ₹2,71,600 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहे थे।
साप्ताहिक उतार-चढ़ाव का ब्यौरा
शुक्रवार को MCX गोल्ड जून फ्यूचर्स में 0.06 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि MCX सिल्वर मई फ्यूचर्स 0.09 प्रतिशत कमज़ोर हुआ। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आँकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को 999 प्यूरिटी वाले सोने के 10 ग्राम की कीमत ₹1,58,117 रही, जबकि सोमवार को बाज़ार खुलने पर यह ₹1,57,821 थी — यानी सप्ताह भर में ₹296 की वृद्धि।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार और रुपए का असर
विश्लेषकों के अनुसार, सप्ताह के अंत में कॉमेक्स गोल्ड 4,535 डॉलर के आसपास स्थिर हुआ। रुपए में आई मज़बूती ने घरेलू बुलियन बाज़ार पर दबाव बनाया, जिससे MCX पर कीमतें अपेक्षाकृत सीमित दायरे में रहीं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।
भू-राजनीतिक कारक: अमेरिका-ईरान और होर्मुज़ तनाव
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में प्रगति की खबरों से कीमती धातुओं की माँग में कुछ नरमी आई। हालाँकि, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर जारी तनाव ने निकट अवधि में सोने को समर्थन दिए रखा। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका-ईरान वार्ता के सकारात्मक संकेतों के बावजूद अंतिम नतीजे को लेकर अनिश्चितता बाज़ार में उतार-चढ़ाव बनाए हुए है और कॉमेक्स गोल्ड को 4,500 डॉलर के स्तर के आसपास सपोर्ट मिल रहा है।
आयात शुल्क और घरेलू माँग पर असर
केंद्र सरकार ने सोने पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है, जिसे अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी बताया जा रहा है। इससे जुलाई 2024 में की गई शुल्क कटौती पूरी तरह समाप्त हो गई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार, इस बढ़ोतरी के चलते 2026 कैलेंडर वर्ष में भारत में सोने की माँग सालाना आधार पर 10 प्रतिशत या 50-60 टन तक घट सकती है।
बॉन्ड यील्ड और फेड का दबाव
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी निकट अवधि में सोने और चाँदी दोनों के लिए दबाव का कारण बन सकती है। अमेरिका के 30 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 5 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है, जबकि 10 साल के बॉन्ड की यील्ड सप्ताह के अंत में 4.5 प्रतिशत से अधिक रही। बढ़ती यील्ड के कारण अमेरिकी फेडरल रिज़र्व 2026 के अंत तक ब्याज दरें बढ़ा सकता है, जिससे सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश साधनों को रखने की लागत बढ़ सकती है। आगे चलकर घरेलू सोने की कीमतों की दिशा अमेरिका-ईरान संबंधों, डॉलर इंडेक्स की चाल और रुपए के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेगी।