जीआरएसई का पश्चिम बंगाल में ₹2,670 करोड़ का निवेश, रायचक में बनेगा लार्ज वेसल शिपयार्ड
सारांश
मुख्य बातें
सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) लिमिटेड ने पश्चिम बंगाल में ₹2,670 करोड़ के निवेश की घोषणा की है, जिसके तहत तीन शिपयार्ड सुविधाओं का विकास किया जाएगा। कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक कमोडोर पी.आर. हरि (सेवानिवृत्त) ने 23 अगस्त को यह जानकारी देते हुए कहा कि इस निवेश से जीआरएसई की जहाज निर्माण क्षमता में उल्लेखनीय विस्तार होगा।
रायचक में नया स्वतंत्र शिपयार्ड
इस निवेश योजना के केंद्र में दक्षिण 24 परगना जिले के रायचक में एक स्वतंत्र शिपयार्ड का निर्माण है, जहाँ बड़े आकार के जलपोत (लार्ज वेसल) बनाए जाएंगे। यह सुविधा जीआरएसई की मौजूदा क्षमताओं से परे एक नई श्रेणी को कवर करेगी और कंपनी को भारी-भरकम वाणिज्यिक एवं रक्षा जहाजों के निर्माण में सक्षम बनाएगी।
कोलकाता और शालीमार सुविधाओं का उन्नयन
रायचक के अलावा, जीआरएसई कोलकाता और हावड़ा के शालीमार में स्थित अपनी दो मौजूदा सुविधाओं के बुनियादी ढाँचे को भी अपग्रेड करेगी। इनमें से एक में मध्यम और छोटे आकार के जहाज बनाए जाएंगे, जबकि दूसरी में बोट, फेरी और एस-टाइप जहाजों का निर्माण होगा। इस तरह तीनों सुविधाएँ मिलकर जहाज निर्माण की एक व्यापक और विविध श्रृंखला को कवर करेंगी।
युद्धपोत निर्माण में आत्मनिर्भरता
कमोडोर हरि ने युद्धपोत निर्माण के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि देश अब इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर है। उन्होंने कहा कि अब तक भारत में 270 युद्धपोत बने हैं, जिनमें से 40 प्रतिशत का निर्माण अकेले जीआरएसई ने किया है। पिछले तीन परियोजनाओं में कंपनी ने 80 प्रतिशत तक स्वदेशीकरण हासिल किया है और शेष 20 प्रतिशत में भी स्वदेशी सामग्री अपनाने का लक्ष्य है।
गौरतलब है कि 2019 से अब तक जीआरएसई ने 24 युद्धपोत लॉन्च किए हैं और उनमें से 22 की डिलीवरी समय से पहले की है — जो पहले के दौर में 5 से 10 साल लगने वाली परियोजनाओं की तुलना में एक बड़ा बदलाव है। कंपनी अभी एक साथ अलग-अलग श्रेणियों के 28 जहाज बनाने में सक्षम है।
क्षमता विस्तार और भविष्य की योजना
नई सुविधाएँ पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद जीआरएसई की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 32 प्लेटफॉर्म तक पहुँच जाएगी। कमोडोर हरि ने यह भी बताया कि कंपनी का डिज़ाइन आधार परिपक्व है और तकनीकी बदलावों को तेजी से आत्मसात करने की क्षमता रखता है, जिससे ग्राहकों को अद्यतन तकनीक के साथ समय पर डिलीवरी संभव हो पाती है। जीआरएसई फिलहाल पश्चिम बंगाल की सबसे बड़ी हेवी इंजीनियरिंग इकाई है।